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US Tariffs: ट्रंप के टैरिफ का हो सकता है विपरीत असर, अमेरिकियों को ही भुगतना पड़ सकता है बड़ा आर्थिक नुकसान

Fri, 01 Aug 2025 03:46 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 01 Aug 2025 03:46 PM IST
सार

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ का प्रभाव भारत की तुलना में अमेरिका के लिए अधिक बुरा होगा। इससे अमेरिका को कम जीडीपी, उच्च मुद्रास्फीति और कमजोर डॉलर का सामना करना पड़ सकता है।

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Trump tariffs may have adverse effects, Americans may have to suffer huge economic losses
Donald Trump - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय निर्यात पर 25  प्रतिशत टैरिफ का असर भारत की तुलना में अमेरिका पर अधिक होगा। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को कम जीडीपी, उच्च मुद्रास्फीति और कमजोर डॉलर का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही रूस के साथ व्यापार पर जुर्माना भी लगाया है। ये टैरिफ 7 अगस्त से लागू होंगे। 

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ट्रंप ने लिया बुरा व्यापारिक निर्णय
एसबीआई ने कहा कि भारत पर जुर्माने के साथ उच्च टैरिफ लगाना अमेरिका का एक बुरा व्यापारिक निर्णय है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की रहस्यमयी शक्तियां इस झटके को अपने आप संतुलित कर सकती हैं और उच्च टैरिफ के असर को कुछ हद तक कम कर सकती हैं।
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अमेरिका परिवारों को करना पड़ सकता है महंगाई का सामना
एसबीआई ने कहा कि अमेरिका में मुद्रास्फीति के नए दबाव के कारण, अमेरिकी मुद्रास्फीति के 2026 तक 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रहने की उम्मीद है। इसमें कहा गया कि इस टैरिफ के कारण अल्पावधि में औसत अमेरिकी परिवार को लगभग 2,400 डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण टैरिफ संचालित मुद्रास्फीति से कीमतें बढ़ना है।  निम्न आय वाले परिवारों को लगभग 1,300 अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो उच्च आय वालों की तुलना में लगभग तिगुना बोझ है। वहीं उच्च आय वाले परिवारों को 5,000 अमेरिकी डॉलर तक का नुकसान हो सकता है, हालांकि उनकी समग्र वित्तीय स्थिरता पर इसका कम प्रभाव पड़ेगा।


भारत ने अपने निर्यात गंतव्यों में विविधिता लाई
भले ही अमेरिका भारत का शीर्ष निर्यातक है, फिर भी भारत ने अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता ला दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स और परमाणु रिएक्टर एवं मशीनरी, भारत से अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात का 49 प्रतिशत है। जेनेरिक दवा बाजार में, भारत अमेरिका की लगभग 47 प्रतिशत दवा आवश्यकताओं की आपूर्ति करता है। 

भारत का व्यापार अधिशेष 12.7 अरब डॉलर पहुंचा
डॉयचे बैंक ने कहा कि भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में विद्युत मशीनरी के पुर्जे, कीमती पत्थर, दवा उत्पाद, वस्त्र और रसायन शामिल हैं। बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक दास ने कहा कि स्वाभाविक रूप से टैरिफ के कारण ये क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून 2025 के बीच भारत का व्यापार अधिशेष 12.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 35.4 प्रतिशत अधिक है। इसका प्रमुख कारण अमेरिका से आयात (11.7 प्रतिशत) की तुलना में अमेरिका को निर्यात (22.3 प्रतिशत) में वृद्धि है।

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