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पर्यटन उद्योग की गुहार: कर्ज नहीं-मदद चाहिए, पर्यटक वीजा जारी करने की मांग
Wed, 30 Jun 2021 06:49 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 30 Jun 2021 06:49 AM IST
सार
- वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कर्मचारियों के वेतन का 50 फीसदी मदद के रूप में मांगा
- पर्यटन उद्योग को 70 हजार करोड़ की चपत लगी है, पिछले साल के लॉकडाउन में
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ताजमहल का दीदार करते विदेशी पर्यटक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की राहत पैकेज घोषणाओं से पर्यटन उद्योग खुश नहीं है। टूर एवं ट्रैवल एजेंसियों ने केंद्र सरकार से कर्ज के बजाए मदद की गुहार लगाई है। उद्योग से जुड़े कई संस्थाओं ने वित्तमंत्री को पत्र लिखकर आर्थिक मदद के रूप में कर्मचारियों के वेतन की 50 फीसदी राशि देने की मांग की है।
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देश के 1,600 टूरिस्ट ऑपरेटर की संस्था इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूरिस्ट ऑपरेटर्स (आईएटीए) ने कहा है कि उन्हें 2019-20 के दौरान अपने कर्मचारियों को दी गई सैलरी का 50 फीसदी हिस्सा मदद के रूप में मिलना चाहिए। इसी तरह, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हर टूरिस्ट गाइड को पर्यटन विभाग से ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद चाहिए।
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वित्तमंत्री ने सोमवार को कोरोना राहत पैकेज के तहत टूरिस्ट गाइड को एक लाख रुपये और टूर ऑपरेटर या ट्रैवल एजेंसी को 10 लाख रुपये तक कर्ज का एलान किया था। आईएटीए अध्यक्ष राजीव मेहरा ने कहा कि पिछले वर्ष 25 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद से सरकार ने एक भी विदेशी पर्यटक वीजा जारी नहीं किया है। इस दिशा में भी जल्द कदम उठाया जाना चाहिए।
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बड़ी ट्रैवल एजेंसियों को ही लाभ
टूर एंड ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले नारायण शमतानी का कहना है कि सरकार केवल उन्हीं ट्रेवल एजेंसियों को मान्यता देती है, जो साल में दो करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा कमाती हैं। देश में इस तरह की ट्रैवल एजेंसियां काफी कम हैं। अगर सरकार की मदद इन मान्यता प्राप्त एजेंसियों को ही दी जाएगी, तो छोटी ट्रैवल एजेंसियों को लाभ नहीं मिलेगा। एक अन्य ट्रैवल एजेंट ने मांग की है कि सरकार को पर्यटन वीजा शुरू कर देना चाहिए। अमेरिका-यूरोप से पर्यटक भले ही भारत नहीं आएंगे, लेकिन बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के सैलानी खरीदानी करने या रिश्तेदारों से मिलने आ सकते हैं। इससे हमारा व्यापार कुछ तो शुरू होगा।
90 फीसदी व्यापार पर असर, 80 फीसदी तक छंटनी
आईएटीए महासचिव रजनीश कायस्थ ने बताया कि उनके अधिकतर सदस्यों के व्यापार पर 90 फीसदी यानी 70,000 करोड़ रुपये की मार पड़ी है। इसमें से ज्यादातर एजेंसियों ने 80-90 फीसदी कर्मचारियों को या तो हटा दिया है या बिना वेतन के छुट्टी पर भेज दिया है। उद्योग पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर व्यापार ठप है, तो दूसरी ओर कार्यालयों का किराया वाहनों की ईएमआई, रोड टैक्स आदि का बोझ पड़ रहा है। संक्रमण की दूसरी लहर के बाद लगभग सभी देशों ने भारत को लाल सूची में डालते हुए उड़ानें बंद कर दी हैं।
17 महीने से विदेशी पर्यटन ठप
महामारी की वजह से ट्रैवल, टूर, होटल, रेस्तरां से जुड़े व्यापारियों का बुरा हाल है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के बाद बेहाल क्षेत्र में अक्तूबर से कुछ सुधार आना शुरू हुआ, तो इस साल फरवरी-मार्च की दूसरी लहर ने उसे दोबारा खत्म कर दिया। विदेशी पर्यटन तो 17 महीनों से ठप पड़ा है। पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल ने संसद में कहा था कि 2019 के मुकाबले 2020 में 75 फीसदी कम विदेशी यात्री भारत आए। 25 मार्च, 2020 के बाद से एक भी विदेशी पर्यटक नहीं आया।