कुछ ऐसे चलानी होगी बुलेट ट्रेन, तभी समय पर चुका पाएंगे कर्ज
अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन अगर रोजाना 100 फेरे लगाती है, तब जाकर रेलवे समय पर इस प्रोजेक्ट के लिए लिए गए लोन को लौटा सकेगा। यह रिपोर्ट आईआईएम अहमदाबाद की ओर से बनाई गई है। इसके तहत ट्रेन को रोजाना 88 हजार से 1.18 लाख यात्रियों को ढोना होगा। इसके लिए रेलवे को हर घंटे 3 ट्रेनों को रवाना करना होगा।
यह रिपोर्ट 'डेडिकेटेड हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क इन इंडिया: इश्यू इन डेवलपमेंट' नाम से प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट को आईआईएम के फैकल्टी मेंबर जी रघुराम और प्रशान्त उदयकुमार ने साथ मिलकर बनाया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार अगर रेलवे 300 किलोमीटर की दूरी के लिए प्रति व्यक्ति 1500 रुपए की टिकट रखता है और रोजाना 88 हजार से 1.18 लाख यात्रियों को ढोता है, तभी वह समय पर अपना कर्ज चुका पाएगा। यह ट्रेन कुल मिलाकर 534 किलोमीटर की दूरी एक तरफ से तय करेगी।
किसने दिया है कितना लोन
बुलेट ट्रेन चलाए जाने के इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे को कुल मिलाकर 97,636 करोड़ रुपए का लोन मिल रहा है। इसमें 80 प्रतिशत राशि जापान देगा और बची हुई 20 प्रतिशत केंद्र सरकार की तरफ से मिलेगी।
जापान से लिए गए कर्ज को 15 सालों तक न लौटाने की छूट मिल रही है, जबकि 16वें साल से 50 साल की अवधि के अंदर यह लोन लौटाना होगा, जिस पर 0.1 प्रतिशत का ब्याज लगेगा। इसके अलावा जो 20 प्रतिशत की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जानी है, उस पर 8 प्रतिशत का ब्याज लगेगा।
इस रिपोर्ट में इस बात को समझाने के लिए एक उदाहरण भी दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अगर 15 साल बाद रेलवे को 100 रुपए का राजस्व मिलता है तो उसका 20-40 रुपया (यानी 20-40 प्रतिशत) व्यवस्था में खर्च होगा। वहीं बाकी की रकम से जापान के कर्ज को ब्याज समेत चुकाने का काम शुरू किया जाएगा।