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मानसून का आप पर पड़ता है यह असर, जानिए क्यों हैं इस बार अल नीनो के आसार

Sat, 06 Apr 2019 05:40 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 06 Apr 2019 05:40 PM IST
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this is how monsoon affects the life, why there is el nino and impact on agriculture economy

मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली संस्था स्काईमेट ने इस बार कमजोर मानसून रहने की भविष्यवाणी की है। स्काईमेट ने कहा है कि जून से सितंबर तक चार माह की बारिश सामान्य से सात फीसदी तक कम रह सकती है। गर्मी भी ज्यादा पड़ेगी। इसका मतलब यह है कि इस बार अलनीनो का खतरा रहने के आसार हैं। मानसून अगर कमजोर रहता है तो फिर देश में सूखा पड़ेगा, जिसके चलते खेती में पैदावार कम होगी और इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। 

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15 फीसदी हिस्से में पड़ेगा सूखा

स्काईमेट के मुताबिक देश के 15 फीसदी हिस्से में सूखा पड़ने की संभावना है। अब सवाल उठता है कि यह 15 फीसदी हिस्सा कहां का हो सकता है। स्काईमेट के मुताबिक यह हिस्सा देश का उत्तर और पूर्वी भाग हो सकता है। 

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यह होता है सामान्य मानसून

अगर देश में 96 से लेकर के 104 फीसदी बारिश होती है तो फिर उसे सामान्य मानसून माना जाता है। वहीं 90 से 96 फीसदी के बीच हुई बारिश सामान्य से नीचे माना जाता है। 90 फीसदी से कम बारिश को कमजोर मानसून माना जाता है। 

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पांच में से तीन साल पड़ा सूखा

पिछले पांच साल में तीन साल देश में सूखा पड़ा है। 2014, 2015 और 2018 में बारिश 90 फीसदी से कम हुई थी। 2018 में हालांकि सूखा ज्यादा नहीं पड़ा था, क्योंकि सितंबर के बाद भी कई जगह बारिश होती रही। 

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अच्छी बारिश इसलिए है जरूरी

हालांकि देश के अच्छी बारिश होना बहुत जरूरी है। हालांकि खेती से होने वाली पैदावार भारत की अर्थव्यवस्था का केवल 14 फीसदी है लेकिन इससे देश की आधी से ज्यादा आबादी को रोजगार मिलता है। मानसून से देश को 70 फीसदी बारिश मिलती है, जो पहले खरीफ और फिर राबी सीजन में किसानों को पानी की उपलब्धता बरकरार रखता है। इसी पानी की बदौलत सिंचाई व्यवस्था सुचारू तौर पर चलती है। 

इसलिए हैं इस बार अल नीनो के आसार

प्रशांत महासागर के इस बार ज्यादा गर्म रहने की संभावना है। इस महासागर से ही भारत में मानसून के बादल आते हैं। अगर यह महासागर नरम रहता है तो फिर देश में अच्छी बारिश की संभावना रहती है। उसको हम ला नीना कहते हैं। लेकिन कम बारिश और सूखा पड़ने की स्थिति में अल नीनो होता है। अबकी बार महासागर के गर्म रहने के आसार हैं जो देश के मानसून पर अपना असर डालेगा।  

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झुलसाती गर्मी

इस बार पड़ेगी ज्यादा गर्मी

स्काईमेट के वाइस-प्रेसिडेंट महेश पालावत ने बताया कि अलनीनो की वजह से न सिर्फ मानसून औसत से कम रहेगा, बल्कि मध्य व दक्षिण भारत के हिस्से में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी। मध्यप्रदेश, विदर्भ व दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में तापमान अभी से 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक है, जो यहां के सामान्य तापमान से 4 से 5 डिग्री तक ज्यादा है।

मई से जून के पहले हफ्ते तक भी इन क्षेत्रों में 4 से 5 डिग्री तक अधिक गर्मी पड़ेगी। दिल्ली एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी हीटवेव की स्थिति नहीं है, लेकिन यहां भी गर्मी बढ़ेगी। हालांकि उत्तरी और उत्तर पश्चिमी भारत के हिस्सों में प्री-मानसून एक्टिविटी बार-बार होती रहेगी।

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