US-China Deal Explained: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच हुए अमेरिका-चीन टैरिफ समझौते से हमारे देश को कितना फायदा?
US-China Deal: सोमवार को चीन और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए उनके द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार संबंधों के महत्व को समझते हुए उनके बीच सहमति बनी है। इस खबर के दुनिया के बाजार के लिए क्या मायने हैं, आइए विशेषज्ञों के नजरिए से समझते हैं।
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सोमवार को चीन और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए उनके द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार संबंधों के महत्व देखते हुए दोनों देशों के बीच टैरिफ पर सहमति बनी है। अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हुए है कि वे 90 दिनों के लिए अपने पहले से घोषित पारस्परिक शुल्क और जवाबी शुल्क वापस ले लेंगे। इस बीच चीन और अमेरिकी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाएगा और अमेरिका चीनी वस्तुओं पर लगभग 30 प्रतिशत कर लगाएगा।
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बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर होने वाले व्यापार में जो व्यावधान टैरिफ की वजह से पड़ रहे थे, उसके लिए यह घोषणा अच्छी है। भारत पर भी इसका असर होगा क्योंकि चीन एक बार फिर अमेरिका में अपनी वस्तुओं का व्यापार कर सकेगा और इससे भारत में डंपिंग की समस्या से निजात मिलेगी। इससे भारतीय बाजार अपनी तरह से आगे बढ़ते रहेंगे।
अमेरिका-चीन के बीच सुलह पर जानकारों की क्या राय?
भारतीय बाजार को मिलेगा डंपिंग का समाधान
बाजार के वरिष्ठ विशेषज्ञ किशोर ओस्तवाल का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच बनी सहमति विश्व व्यापार के लिए अच्छी खबर है। वैश्विक स्तर पर होने वाले व्यापार में जो व्यवधान टैरिफ की वजह से पड़ रहे थे, उसके लिए यह घोषणा अच्छी है। भारत पर भी इसका असर होगा क्योंकि चीन एक बार फिर अमेरिका में अपनी वस्तुओं का व्यापार कर सकेगा और भारत में डंपिंग की समस्या नहीं होगी। टैरिफ में कमी के बाद भी भारत के बाजार में बढ़त दिख रही है। अमेरिका के लिए भारतीय बाजार काफी महत्वपूर्ण है और वह भारत को प्राथमिकता देता है। इसलिए भारतीय बाजार अपनी तरह से आगे बढ़ते रहेंगे।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाया है लचीलापन
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइस रिसर्च के प्रमुख देवर्ष वकील कहते हैं दोनों देशों के बीच पारस्परिक टैरिफ घोषणा के बाद, बाजारों में हुए नुकसान की भरपाई होने संभावना है। अमेरिका-चीन व्यापार तनाव कम होने के संकेतों ने निवेशकों की घबराहट को कम कर दिया है। भारत के बाजारों और अर्थव्यवस्था ने पहले से ही लचीलापन दिखाया है, जो लगातार बाहरी उथल-पुथल के बाद स्थिर रही। भविष्य में वैश्विक स्तर पर और घरेलू स्तर पर कारोबार अच्छा होने के संकेत है।
बाजार के लिए सकारात्मक है यह समझौता
इक्किरस सिक्योरिटीज की अर्थशास्त्री अनिता रंगन कहती हैं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता 2 अप्रैल 2025 से टैरिफ-व्यापार असहमति पर अनिश्चितता के स्तर को कम करने के लिए कुल मिलाकर सकारात्मक है। हालांकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है, इसलिए इस समझौते से विश्व को कई गुना लाभ होगा।
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महंगाई को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी सुलह
सबसे पहला लाभ यह है कि महंगाई के तेजी से बढ़ने की जो अटकलें थी अब वह समाप्त हो गई हैं। हालांकि पहले से अधिक टैरिफ मुद्रास्फीति का कारण बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल यह प्रबंधनीय स्तर पर है। दूसरा फायदा अमेरिका में मंदी पैदा होने डर कम होना है। इसका भारत के लिए सकारात्मक असर होगा क्योंकि भारत की सेवाओं पर अमेरिका काफी हद तक निर्भर करता है और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारी भी है।
भारत के लिए आगे की राह होगी आसान
अमेरिका चीन के बीच सुलह से तीसरा महत्वपूर्ण लाभ भारत के लिए आगे की राह आसान होना है। भारत सकारात्मक और लाभकारी व्यापार विकास की उम्मीद कर सकता है। रंगन कहती हैं, कुल मिलाकर मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और अमेरिकी विकास काफी हद तक बरकरार है। फेड के लिए राह कुछ नीतियों के बाद स्पष्ट हो सकती है। फेड 2025 की तीसरी या चौथी तिमाही में कभी भी अपने दर कटौती चक्र को फिर से शुरू कर सकता है। भारत के लिए यह घटनाक्रम सकारात्क होना चाहिए क्योंकि यह निर्यात की अनिश्चिततओं को कुछ हद तक दूर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूंजी प्रवाह की वापसी सकारात्मक होनी चाहिए। क्योंकि भारत सेमीकंडक्टर, आईटी हार्डवेयर, ऑटो और ऑटो पाटर्स और अन्य संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण एफडीआई निवेश के साथ व्यापार में पूरी तरह से लाभ उठा सकता है, जहां भारत चीन+1 के साथ कुछ अन्य व्यापारिक लाभ भी उठा सकता है।
अमेरिका का व्यापार घाटा कम होने की संभावना
विेशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि व्यापार वार्ता सकारात्मक होगी, अब जब अमेरिका और चीन के बीच पारस्परिक टैरिफ घोषणा हो गई है, तो इससे व्यापार में वृद्धी होगी, इसके साथ ही अमेरिका के 1.2 ट्रिलियन डॉलर के विशाल व्यापार घाटे को कम करने काफी सहायता इस समझौते से मिलेगी। चीन और अमेरिका की घोषणा के बाद ही एशियाई बाजारों में उछाला आया, हांगकांग में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि शंघाई में लगभग 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। व्यापार समझौता की घोषणा के बाद जापान और ताइवान के स्टॉक एक्सचेंजों में बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के अनुसार अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत टैरिफ को 115 प्रतिशत अंक घटाकर 30 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है, जबकि चीन ने दरों को घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है।
घोषणा से चीन और अमेरिका के बीच तनाव होगा कम
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि यह घोषणा दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव में महत्वपूर्ण कमी लाएगी। उन्होंने कहा, "हालांकि इस तरह के घटनाक्रम वैश्विक व्यापार स्थिरता के लिए मोटे तौर पर सकारात्मक हैं, लेकिन वे भारत के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों प्रस्तुत करते हैं।" उन्होंने कहा कि टैरिफ में कमी से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रसायन जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अमेरिका-चीन द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होने की संभावना है।
भारतीय निर्यातकों के बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जहां भारत ने हाल ही में अमेरिका-चीन व्यापार बाधाओं का लाभ उठाते हुए अपनी पैठ बनाई है। हालांकि, रल्हन ने कहा कि भारत इस बदलाव का लाभ उन क्षेत्रों में निर्यात को मजबूत करने के लिए उठा सकता है जो अमेरिका-चीन व्यापार से अपेक्षाकृत अछूते हैं, जैसे फार्मास्यूटिकल एपीआई, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, कार्बनिक रसायन और आईटी-सक्षम सेवाएं।
जानकार बोले- अमेरिका के साथ सक्रिय रूप से जुड़े भारत
उन्होंने कहा, "भारत को अपनी तरजीही व्यापार पहुंच को सुरक्षित और विस्तारित करने के लिए अमेरिका के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए, तथा एक विश्वसनीय वैकल्पिक स्रोत गंतव्य के रूप में अपनी भूमिका पर जोर देना चाहिए।" रल्हन ने कहा कि टैरिफ कटौती की अस्थायी प्रकृति के कारण कंपनियां मेक इन इंडिया और पीएलआई योजनाओं के तहत भारत में विनिर्माण का विस्तार करके भविष्य की अस्थिरता से बचाव कर सकती हैं, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो घटकों और वस्त्रों के मामले में।