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एजीआरः सुप्रीम कोर्ट करेगा सरकारी कंपनियों की सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई

Fri, 24 Jan 2020 04:31 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 24 Jan 2020 04:31 PM IST
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supreme court to hear modification plea of psu companies on agr next week
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वो समायोजित एकल राजस्व (एजीआर) के मामले में सरकारी कंपनियों द्वारा दायर की गई सुधारात्मक याचिका पर जल्द सुनवाई करेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सरकारी कंपनियों को भी एजीआर भरने के लिए कहा था। इन कंपनियों ने भी अपनी आंतरिक बातचीत और सिग्नल के लिए दूरसंचार विभाग से टेलीकॉम लाइसेंस ले रखा है। 

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता में गठित पीठ अगले हफ्ते इसकी सुनवाई करेगी। यह सुनवाई वोडाफोन आइडिया और एयरटेल द्वारा दायर की गई सुधारात्मक याचिका के साथ ही होगी। इन कंपनियों ने भी एजीआर का भुगतान करने की तारीख को आगे बढ़ाने की कोर्ट से अपील की है। 
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दूरसंचार विभाग (डॉट) ने गेल, ऑयल इंडिया और पावरग्रिड जैसी गैर दूरसंचार कंपनियों से लगभग 3 लाख करोड़ रुपये की मांग की है। इन कंपनियों के ऊपर ऐसी किसी धनराशि की देनदारी नहीं बनती है। डॉट गेल इंडिया से 1.72 लाख करोड़ रुपये, ऑयल इंडिया से 48 हजार करोड़ रुपये, पावरग्रिड से 40 हजार करोड़ रुपये और रेल व एक अन्य सरकारी कंपनी से ऐसी ही मांग कर रहा है। 
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डॉट की यह मांग सरकारी कंपनियों की कुल नेटवर्थ से काफी ज्यादा है। प्रधान ने कहा, ‘हम दूरसंचार मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं। हमने मांग पर अपना जवाब दे दिया था। संभवत: संवाद की कमी के चलते भारत सरकार का एक विभाग, दूसरे विभाग के अंतर्गत आने वाली पीएसयू से ऐसी मांग कर रहा है।’

 दूरसंचार कंपनियों को सांविधिक बकायों के रूप में सरकार को लगभग 1.47 लाख करोड़ रुपये चुकाने हैं। वहीं सरकार की 26.12 फीसदी हिस्सेदारी वाली टाटा कम्युनिकेशंस ने भी डॉट की 6,633 करोड़ रुपये की एजीआर मांग के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका को सुनवाई के लिए शामिल नहीं किया है। कंपनी ने कहा कि उसने सितंबर तिमाही में डॉट से मिले मांग नोटिस का जवाब दे दिया है, लेकिन विभाग की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।


दूसंचार कंपनियों को लाइसेंस शुल्क के 92,642 करोड़ रुपये, स्पेक्ट्रम शुल्क के 55,054 करोड़ रुपये सरकार को चुकाने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर में कहा था कि गैर दूरसंचार राजस्व के आधार पर सांविधिक बकायों यानी एजीआर की गणना की जानी चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 24 अक्तूबर के आदेश के क्रम में लाइसेंसी कंपनियों से बकाया वसूलने के निर्देश दिए थे।

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