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Supreme Court: 'पतंजलि पर सवाल उठा रहे थे पर अब आप क्या कर रहे?' सुप्रीम कोर्ट की अब IMA पर सख्ती, नोटिस जारी

Tue, 07 May 2024 05:46 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 07 May 2024 05:46 PM IST
सार

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में नजारा बदला दिखा। पतंजलि की ओर से दाखिल एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) पर भी सवाल उठाए। अदालत ने इस मामले में आईएमए अध्यक्ष को नोटिस जारी कर 13 मई तक जवाब मांगा है।

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Supreme Court Issues Notice On Patanjali MD's Application Seeking Action Against IMA President
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

कुछ समय पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि, बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में नजारा बदला दिखा। पतंजलि की ओर से दाखिल एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) पर भी सवाल उठाए। अदालत ने इस मामले में आईएमए अध्यक्ष को नोटिस जारी कर 13 मई तक जवाब मांगा है। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानुल्लाह की बेंच ने कहा कि आप पतंजलि पर भ्रामक विज्ञापन के लिए सवाल उठा रहे रहे थे, उनकी दवाओं को हटाने की मांग कर रहे थे, लेकिन आप क्या कर रहे हैं?

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क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से पतंजलि पर सख्ती के बाद समूह ने अखबारों में विज्ञापन देकर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी। हालांकि इसके बावजूद आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन अपने एक बयान के कारण विवादों में घिर गए। दरअसल, उन्होंने अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान एलोपैथी डॉक्टर्स पर की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच पर ही सवाल उठा दिया था। अब इस मामले में पतंजलि ने आईएमए के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने आईएमए के रवैये पर सवाल उठाए। 

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आईएमए के वकील ने क्या जवाब दिया?

आईएमए की ओर से अदालत में पेश वकील ने बचाव करते हुए कहा कि आइएमए अध्यक्ष का मकसद अदालत के बारे में गलत टिप्पणी करना नहीं था। इस पर बेंच ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई मामूली बात नहीं है। आइएमए अध्यक्ष ने मीडिया में सार्वजनिक तौर पर ऐसे मामले पर बात की जिसकी अदालत में सुनवाई चल रही है। अदालत ने कहा कि आईएमए की ओर से पेश अधिवक्ता का जवाब संतोषप्रद नहीं है। बेंच ने आईएमए अध्यक्ष के बारे में बोलते हुए कहा, "यह देखिए कि क्या उन्होंने अपना ही नुकसान कर लिया। देखते हैं, हो सकता है हम आपको एक मौका दें।" जस्टिस कोहली ने कहा, "एक बात हम साफ कर दें कि अदालत यह उम्मीद नहीं करती कि कोई पीठ पीछे कुछ भी बोले। अदालत को भी आलोचना का सामना करना पड़ा है, हम उसके लिए तैयार हैं, लेकिन...।" इस पर आईएमए की ओर से पेश वकील पीएस पटवालिया ने बेंच से आईएमए अध्यक्ष की ओर से माफी मांगते हुए अगली सुनवाई का मौका देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आईएमए अध्यक्ष को यह समझ आ गया है कि उन्हें अपनी जुबान बंद रखनी चाहिए थी।

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सेलिब्रिटीज उत्पादों का प्रचार करने में जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करें

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को याचिका की सुनवाई करते हुए भ्रामक विज्ञापनों पर भी सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी उपभोक्ता उत्पाद का प्रचार करते समय मशहूर और लोकप्रिय हस्तियों (सेलिब्रिटीज) को जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि विज्ञापन जारी करने की अनुमति देने से पहले केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत विज्ञापनदाताओं से एक सेल्फ डेक्लेरेशन ली जानी चाहिए।1994 के कानून का नियम 7 एक विज्ञापन संहिता है जो यह सुनिश्चित करता है कि दिखाए जाने वाले विज्ञापन को देश के कानूनों के अनुरूप तैयार किए गए हों। 


न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को भ्रामक विज्ञापनों और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) द्वारा उनके (विज्ञापनदाताओं) खिलाफ की गई या प्रस्तावित कार्रवाई से अवगत कराने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, 'मशहूर हस्तियों, प्रभावशाली, लोकप्रिय लोगों का उत्पादों के विज्ञापन में बड़ा योगदान होता है, ऐसे में यह जरूरी है कि वे किसी उत्पाद का प्रचार करते समय जिम्मेदारी के साथ काम करें। शीर्ष अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की ओर से दिए गए भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए ये बातें कही।


अदालत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा 2022 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें पतंजलि और योग गुरु रामदेव द्वारा कोविड टीकाकरण अभियान और चिकित्सा की आधुनिक प्रणालियों को बदनाम करने का आरोप लगाया गया है। पीठ पतंजलि उत्पादों के बारे में भ्रामक विज्ञापनों की आलोचना करती रही है और अब इन्हें विभिन्न इंटरनेट चैनलों पर उपलब्ध कराने पर रोक लगा दी गई है।

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