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ED: वकीलों से पूछताछ पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती; ईडी के समन रद्द, जांच एजेंसियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी

Fri, 31 Oct 2025 12:23 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 31 Oct 2025 12:23 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दो वकीलों को जारी ईडी के समन को निरस्त कर दिया और जांच एजेंसियों के लिए नए दिशा-निर्देश तय किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी वकील से उसके मुवक्किल को दी गई कानूनी सलाह के बारे में पूछताछ नहीं की जा सकती।

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Supreme Court cracks down on questioning of lawyers; ED summons cancelled, new guidelines issued for investiga
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए दो वकीलों को जारी ईडी के समन को रद्द करते हुए जांच एजेंसियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि वकीलों को उनके मुवक्किलों को दी गई कानूनी सलाह के संबंध में पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जा सकता। 

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पीठ ने क्या दिया तर्क? 

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला उस स्वतः संज्ञान मामले में सुनाया, जिसमें ईडी ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में समन किया था।

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फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि अदालत ने वकीलों को मिली कानूनी सुरक्षा और जांच एजेंसियों के अधिकारों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि नए दिशा-निर्देश कानूनी पेशे को अनावश्यक दबाव से बचाने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं।

मौलिक अधिकारों का हो सकता है उल्लंघन

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी वकील के डिजिटल उपकरण केवल क्षेत्राधिकार वाली अदालत की अनुमति से ही जब्त किए जा सकते हैं और उन्हें वकील व संबंधित पक्ष की मौजूदगी में ही खोला जा सकेगा, वह भी तब जब उनके आपत्तियों को अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया हो। पीठ ने कहा कि इससे वकीलों को नियुक्त करने वाले आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। अदालत ने टिप्पणी कि ऐसे समन उन आरोपियों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं जिन्होंने अपने वकील पर भरोसा जताया है।

पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियां किसी वकील से उसके मुवक्किल से जुड़ी जानकारी नहीं मांग सकतीं, जब तक कि वह ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023’ की धारा 132 में वर्णित अपवादों के तहत न आती हो। अदालत ने इसे कानूनी पेशे की गरिमा और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।

ईडी की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी कड़ी आपत्ति

यह फैसला उस स्वतः संज्ञान मामले में आया है, जिसमें ईडी द्वारा वरिष्ठ वकीलों को मनी लॉन्ड्रिंग जांच में पूछताछ के लिए बुलाने पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

बेंच ने 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा था और खुद को देश के सभी नागरिकों का संरक्षक बताते हुए कहा था कि वकीलों से इस तरह की पूछताछ न्याय व्यवस्था की जड़ों को कमजोर कर सकती है।


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