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चार माह तक चली खेती की ये अनोखी स्पर्धा, पारंपरिक खेती के सामने तकनीक की हुई जीत
Wed, 10 Feb 2021 03:06 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Wed, 10 Feb 2021 03:06 PM IST
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स्ट्रॉबेरी की खेती
- फोटो : pixabay
भारत में किसानों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है और किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। एक ओर जहां देश के अलग-अलग हिस्सों के किसान आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दुनिया में कईं किसान कामयाबी की ऊंचाइयां छू रहे हैं। चीन में कृषि के क्षेत्र में चौथी औद्योगिक क्रांति के मद्देनजर स्ट्रॉबेरी की खेती की अनोखी स्पर्धा आयोजित की। यह स्पर्धा करीब चार महीने तक चली।
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दो टीमों का हुआ गठन
स्पर्धा के तहत दो टीमों का गठन हुआ था। पहली टीम में वे किसान थे जिन्होंने खेती के लिए परंपरागत तरीका अपनाया और दूसरी टीम में वो किसान थे जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) जैसी उन्नत तकनीक और मशीन का इस्तेमाल किया।
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तकनीक ने किसानों को किया पराजित
जब नतीजे आए, तो साफ हुआ कि खेती के क्षेत्र में तकनीक ने किसानों को पराजित कर दिया। आप ये जानकर हैरान होंगे कि परंपरागत खेती की तुलना में तकनीक का इस्तेमाल करने वाले किसानों ने स्ट्रॉबेरी का कईं गुना ज्यादा उत्पादन किया। वे 196 फीसदी अधिक उत्पादन करने में सफल हुए। इतना ही नहीं, तकनीक का इस्तेमाल करने वाले किसानों की विजेता टीम ने निवेश की तुलना में औसतन 75.5 फीसदी से अधिक रिटर्न भी हासिल किया।
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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने स्मार्ट औद्योगिक खेती स्पर्धा का आयोजन किया था। मेजबानी चीन के सबसे बड़े संस्थान कृषि प्रौद्योगिक मंच 'पिंडोदुओ' और चीन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने संयुक्त रूप से की। विजेता टीम के किसानों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के साथ अन्य तकनीक की मदद से स्ट्रॉबेरी की खेती की। इन किसानों ने तापमान को नियंत्रित करने के लिए इंटेलीजेंट सेंसर का भी उपयोग किया। इसके अतिरिक्त पानी व मिट्टी के पोषक तत्वों को बचाने के लिए पॉलीमर तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। स्पर्धा से सामने आया कि तकनीक से परंपरागत खेती की तुलना में 90 फीसदी कम पानी का इस्तेमाल हुआ।