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बेहाल बाजार: शेयर मार्केट पस्त, आसान सवाल-जवाब में समझें सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट के छह बड़े कारण

Fri, 27 Mar 2026 03:39 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Fri, 27 Mar 2026 03:39 PM IST
सार

27 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक डूबने के छह बड़े कारण जानें। अमेरिका-ईरान युद्ध, कच्चे तेल के दाम, गिरता रुपया और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार पर कैसे बनाया दबाव? समझें सबकुछ

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Stock market crash India Sensex fall reasons Nifty 50 drop US Iran war impact Crude oil prices
शेयर बाजार में गिरावट के कारण - फोटो : amarujala.com

विस्तार

शुक्रवार यानी 27 मार्च 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक और बड़ी गिरावट वाले दिन के रूप में दर्ज हो गया। कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स 1,000 से अधिक अंक गोता लगाकर 74000 के स्तर से नीचे फिसल गया, वहीं निफ्टी 50 टूटकर 23,000 के मनौवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। इस ऐतिहासिक बिकवाली से चंद मिनटों में निवेशकों को करीब पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हो गया। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,690.23 (2.24%) अंक गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 486.86 (2.09%) अंक टूटकर 22,819.60 के स्तर पर बंद हुआ। 

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आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं इस बड़ी गिरावट के छह बड़े कारण क्या हैं?

सवाल: बाजार में घबराहट का पहला और सबसे बड़ा भू-राजनीतिक कारण क्या है?

जवाब: बाजार में डर का सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच गहराता युद्ध है। शांति की उम्मीद तब टूट गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए 10 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव को ईरान ने एकतरफा और अनुचित बताकर खारिज कर दिया। निवेशकों को डर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां अगर यातायात सामान्य नहीं हुआ तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला चरमरा जाएगी।

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सवाल: कच्चे तेल की कीमतों ने भारतीय बाजार को कैसे प्रभावित किया?

जवाब: युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 107.19 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 94.07 डॉलर पर पहुंच गया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80-85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए यह महंगा तेल देश में 'आयातित महंगाई' लाएगा। महंगाई बढ़ने से रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों में कटौती नहीं कर पाएगा, जो शेयर बाजार के लिए एक बड़ा नकारात्मक संकेत है।

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सवाल: क्या विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी बाजार का साथ छोड़ दिया है?

जवाब: बिल्कुल। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड ₹1.1 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी निकाल ली है। जब युद्ध जैसे संकट आते हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सोने, अमेरिकी ट्रेजरी और जापानी बांड जैसी सुरक्षित संपत्तियों में लगा देते हैं। जापान में बांड की यील्ड बढ़कर 1.77% हो गई है, जिससे वहां निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो गया है। 

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से शुद्ध 12.14 अरब डॉलर की बिक्री की है। यह रिकॉर्ड पर विदेशी निवेशकों की अब तक की सबसे बड़ी बिकवाली है। शुक्रवार को स्थानीय मुद्रा 0.9 फीसदी गिरकर 94.7875 पर आ गई। युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें लगभग 4.2 फीसदी की गिरावट आई है। इससे विदेशी निवेशकों को नुकसान हुआ है और भारतीय संपत्तियों से उनकी निकासी तेज होने की संभावना है।

ईरान पर युद्ध, जो अब लगभग एक महीने के करीब है, ने तेल की कीमतों में वृद्धि की है। इससे भारत के लिए व्यापक आर्थिक जोखिम बढ़ गए हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 से 90 फीसदी आयात करता है। यह इसे उच्च तेल कीमतों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।

सवाल: रुपये की ऐतिहासिक गिरावट का इस बिकवाली में क्या योगदान रहा?

जवाब: शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने 94.24 के सर्वकालिक निचले (ऑल-टाइम लो) स्तर पर पहुंच गया। रुपये की इस भारी कमजोरी से भारत के लिए कच्चा तेल और गैस खरीदना और भी महंगा हो गया है। जिन भारतीय कंपनियों ने डॉलर में कर्ज लिया है, उनकी लागत भी बढ़ जाएगी, जिससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।



सवाल: विदेशी बाजारों का मूड कैसा था?

जवाब: वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों की भारी बिकवाली ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा चीन पर बड़े पैमाने पर टैरिफ (टैक्स) लगाने की धमकी से नए 'ट्रेड वॉर' की आशंका पैदा हो गई है। इसके कारण अमेरिकी बाजार का सूचकांक नैस्डैक 2.38% और डाउ जोंस 1.01% गिर गया। इसके बाद दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ बंद हुए।

सवाल: विदेशी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट ने आग में घी कैसे डाला?

जवाब: बिकवाली के इस माहौल में ग्लोबल निवेश बैंक 'गोल्डमैन सैक्स' ने भारत की रेटिंग को ओवरवेट से घटाकर मार्केटवेट (डाउनग्रेड) कर दिया। बैंक ने महंगे तेल का हवाला देते हुए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 5.9% कर दिया है। साथ ही, निफ्टी का लक्ष्य भी 29,300 से घटाकर 25,900 कर दिया गया है। इस रिपोर्ट के आते ही एल्गोरिथम ट्रेडिंग के जरिए स्वचालित बिकवाली शुरू हो गई।

27 मार्च की यह गिरावट सामान्य नहीं है। यह युद्ध, महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और एफआईआई की भारी निकासी का नतीजा है। जब तक पश्चिम के तनाव में कमी नहीं आती और कच्चे तेल के दाम 80-90 डॉलर के सुरक्षित स्तर पर नहीं लौटते, निवेशकों को बाजार में अत्यधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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