रसातल में गया पाकिस्तानी रुपया, खाने-पीने के लिए नहीं बचा एक महीने का भी पैसा
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पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की हालत आर्थिक तौर पर बद से बदतर होती जा रही है। 25 जुलाई को देश में होने वाले आम चुनाव से पहले ही पाकिस्तानी रुपया रसातल में जा चुका है। वहीं दूसरी तरफ देश में खाने-पीने के लिए केवल एक महीने से कम का पैसा बचा हुआ है।
131 के पार हुआ रुपया
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने चौथी बार डॉलर के मुकाबले एक बार फिर से अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर दिया है। अब खुले बाजार में एक डॉलर 131 रुपये के करीब हो गया है। हालांकि बैंकों में यह रेट 128 रुपये हो गया है। अब पाकिस्तान आईएमएफ से मदद मांगेगा, क्योंकि इसके बिना सरकार के पास कोई चारा नहीं बचा है।
बढ़ गया करंट अकाउंट डेफिसिट
पाकिस्तान में करंट अकाउंट डेफिसिट भी काफी बढ़ गया है। अब उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार भी काफी कम है। रुपये में जारी गिरावट पर स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने कहा है, ''यह बाज़ार में जारी उठा-पटक का नतीज़ा है। हालात पर हमलोगों की नज़र बनी हुई है।
पाकिस्तान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के एक अर्थशास्त्री अशफाक हसन खान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि अभी पाकिस्तान में अंतरिम सरकार है और चुनाव के वक्त में वो आईएमफ जाने पर मजबूर हो सकती है।
2013 में भी लिया था कर्ज
इससे पहले उसने 2013 में आईएमएफ से कर्ज लिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि आईएमएफ करेंसी की वैल्यू घटाने के लिए कह सकता है। इसलिए पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि वह पहले से इसकी तैयारी कर रहा है।
चीन से मांगी मदद
रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए पाकिस्तान ने अपने पुराने दोस्त चीन से मदद मांगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर उसने मदद नहीं की तो फिर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर आगे चलकर काफी संकट में आ सकती है। पाकिस्तान अपना आयात को घटाने पर जोर देना चाहता है और निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है।