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रिपोर्ट: पाबंदियों में ढील के साथ नियुक्ति दर में सुधार, आर्थिक उथल-पुथल से प्रभावित महिलाएं और युवा पेशेवर
Wed, 07 Jul 2021 03:56 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Wed, 07 Jul 2021 03:56 PM IST
सार
लिंक्डइन के अनुसार, 'कामकाजी महिलाओं में कामकाजी पुरुषों की तुलना में भरोसा चार गुना कम हुआ है। वहीं नए स्नातकों को नौकरी खोजने में लगने वाला औसत समय दो से बढ़कर तीन महीने हो गया है।
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- फोटो : istock
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विस्तार
कोरोना वायरस महामारी के बीच देश में नियुक्ति दर में हल्का सुधार हुआ है। अप्रैल में यह 10 फीसदी थी जो मई में बढ़कर 35 फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि, पेशेवरों को जोड़ने वाले मंच लिंक्डइन के आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 की दूसरी लहर से पेशेवर आर्थिक अनिश्चितता के कारण ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लिंक्डइन पर भारत में नियुक्ति दर इस साल मार्च में 50 फीसदी थी जो अप्रैल 2021 में घटकर 10 फीसदी पर आ गई। हालांकि, स्थानीय स्तर पर लगाई गई पाबंदियों में ढील के साथ मई में इसमें कुछ सुधार आया और यह 35 फीसदी रही।
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आर्थिक उथल-पुथल से प्रभावित महिलाएं और युवा पेशेवर
हालांकि, कामकाजी महिलाएं और युवा पेशेवर अभी भी आर्थिक उथल-पुथल से काफी प्रभावित हैं। लिंक्डइन के अनुसार, 'कामकाजी महिलाओं में कामकाजी पुरुषों की तुलना में भरोसा चार गुना कम हुआ है। वहीं नए स्नातकों को नौकरी खोजने में लगने वाला औसत समय दो से बढ़कर तीन महीने हो गया है।'
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सक्रियता से नियुक्ति कर रहे ये उद्योग
लिंक्डइन पर वित्त, कॉर्पोरेट सेवा, विनिर्माण, स्वास्थ्य और हार्डवेयर तथा नेटवर्किंग जैसे कुछ प्रमुख उद्योग सक्रियता से नियुक्ति कर रहे हैं। दूसरी तरफ, जिन उद्योगों में नियुक्ति में कमी आई है, उनमें उपभोक्ता सामान, मीडिया एवं संचार, वाहन, विपणन और विज्ञापन उद्योग शामिल हैं।
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आईटी क्षेत्र में मांग में वृद्धि जारी
लिंक्डइन के आंकड़े के अनुसार 2020 में महामारी के बीच, विशेषीकृत इंजीनियरिंग, कृत्रिम मेधा, साइबर सुरक्षा और डाटा साइंस क्षेत्रों में नियुक्ति को लेकर मांग बढ़ी थी। करीब एक साल बाद आईटी क्षेत्र में मांग में वृद्धि जारी है। इस क्षेत्र में एप्लिकेशन डेवलपर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और एसएपी (सिस्टम एप्लीकेशन एंड प्रोडक्ट्स) विशेषज्ञों की मांग ज्यादा है।
मालूम हो कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते महीने मई 2021 में बेरोजगारी दर 12 फीसदी हो गई। जबकि अप्रैल 2021 में यह आंकड़ा आठ फीसदी था। मई 2021 में 11 महीने बाद बेरोजगारी दर दोहरे अंकों में पहुंची। पिछले साल जून 2020 में यह 10.18 फीसदी पर थी। पिछले साल अप्रैल, मई और जून 2020 के अलावा जनवरी 2016 के बाद से किसी भी महीने में बेरोजगारी दर दोहरे अंकों में नहीं थी।