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चीन की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त उछाल, पहली तिमाही के नतीजों से बढ़ा उत्साह
Thu, 16 Jul 2020 05:27 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 16 Jul 2020 05:27 PM IST
सार
- अमेरिका और यूरोपीय देशों से बिगड़े रिश्तों का असर पड़ सकता है अगली तिमाही पर
- कोविड को अपने देश में फैलने से रोकने में मिली कामयाबी का असर दिखा अर्थव्यवस्था पर
- जानकारों ने माना सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों और तत्काल लिए गए फैसलों का असर
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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विस्तार
आपको जान कर ताज्जुब होगा कि जिस देश से कोरोना जैसी वैश्विक महामारी फैली, उसकी अर्थव्यवस्था निरंतर तेजी से बढ़ रही है और अब ये दावा किया जा रहा है कि आने वाले वक्त में भी चीन के आर्थिक हालात लगातार बेहतर होने वाले हैं। जून में खत्म हुई तिमाही की रिपोर्ट देखकर चीन भी हैरत में है कि उसने इतनी मजबूती के साथ 3.2 फीसदी की जबरदस्त उछाल कैसे हासिल कर ली।
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जानकार मानते हैं कि चीन ने बेहद संतुलित और योजनाबद्ध तरीके से अपनी अर्थव्यवस्था को इस संकट की घड़ी में संभाला है और लॉकडाउन के बाद जब से उद्योग धंधे, कारखाने और बाजार खुले हैं, वहां स्थितियां निरंतर बेहतर हुई हैं।
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पिछले साल दिसंबर में कोविड-19 फैलने के बाद से चीन पहला ऐसा देश है, जिसने सबसे पहले अपने बाजार, कारोबार बंद किए और वहां की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने जैसे ही मार्च में ये एलान किया कि कोरोना अब काबू में है, तो सभी बाजार और व्यवसाय तत्काल पूरी तरह शुरू कर दिए गए।
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जब पूरी दुनिया इस महामारी के आतंक और संकट से जूझ रही थी, चीन ने उसी वक्त से अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ ही इसे पहले से और बेहतर बनाने की मुहिम तेज कर दी थी। जेपी मॉरगन एसेट मैनेजमेंट के अधिकारी मार्सेला चाव कहते हैं कि आने वाले वक्त में और तिमाही नतीजों में चीन की अर्थव्यवस्था और बेहतर होने की पूरी संभावना है।
उधर नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स ने एक बयान में कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था जहां तेजी से गिर रही थी, वहीं इसमें 2020 के पहले कुछ महीनों में खासा उछाल आया है। इसका श्रेय जानकार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को देते हैं।
उसने सबसे पहले सबसे असरदार तरीके से तत्काल करीब 6 करोड़ बाहरी लोगों को अपने यहां आने से रोका, आने-जाने के सभी रास्ते और साधन बंद कर दिए और महामारी को फैलने से रोकने के लिए हर वो उपाय किए जिससे जल्दी से जल्दी इससे निजात पाई जा सके। चीन इन सभी में कामयाब भी रहा।
जानकार मानते हैं कि चीन की अचानक सुधरी अर्थव्यवस्था के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) की है। सिनेमा हाल्स, मॉल्स और टूरिज्म पर वहां अब भी सख्त रोक है और लोग इसे पूरी तरह मान भी रहे हैं।
बेशक ये दावा किया जा रहा हो कि चीन की अर्थव्यवस्था में बंपर बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन निजी क्षेत्र के जानकार कहते हैं कि चीन में इस दौरान तीस फीसदी यानी करीब 13 करोड़ लोग अस्थाई तौर पर बेरोजगार हो गए हैं अभी ये भी माना जा रहा है कि इस साल अभी ढाई करोड़ और लोगों के रोजगार छिन जाने की आशंका है।
जबकि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने मई में दावा किया था कि वह 280 बीलियन डालर खर्च करके करीब 90 लाख नए रोजगार उपलब्ध कराएगी, लेकिन जापान और अमेरिका के साथ खराब हुए रिश्तों और करीब एक ट्रिलियन डॉलर के पैकेज को रोलआउट कर लिए जाने के बाद चीन ने रोजगार का अपना वादा फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल रखा है।
कोरोना के आंकड़ों को देखें तो चीन में कुल 83,611 पॉजिटिव मामले सामने आए थे और 4634 मौतें हुई थीं। ये कहा जा रहा था कि बीजिंग में कोरोना ने दोबारा पैर पसारा है, लेकिन ऐसे 330 लोगों की पहचान के बाद तत्काल उनका इलाज कराया जा रहा है।
दो दिन पहले चीन ने अपनी अंदरूनी स्थितियों की समीक्षा करने और कोई नया मामला न आने के बाद स्थानीय पर्यटन के लिए बंद दरवाजे धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दिया है। वहां की संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय ने पचास फीसदी पर्यटकों को आने-जाने की इजाजत दे दी है और आने वाले दिनों में इसे और बढ़ाया जाएगा।
दूसरी तरफ पिछले तीन महीनों में स्मार्टफोन, जूते, खिलौने और दूसरे सामान बनाने वाली तमाम फैक्ट्रियों में उत्पादन पहले की तुलना में 4.4 फीसदी बढ़ा है। जून में चीन से निर्यात भी उम्मीद से कहीं ज्यादा 0.4 फीसदी बढ़ा है।
हालांकि जानकार मानते हैं कि ये नतीजे पिछली तिमाही के हैं और आने वाले वक्त में अमेरिका और दूसरे यूरोपीय देशों के साथ चीन से खराब हुए व्यापारिक रिश्तों का असर देखने को मिल सकता है। जबकि चीन दावा कर रहा है कि उसे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला और वह जल्द अपनी अर्थव्यवस्था को पहले से भी मजबूत कर लेगा।