Supreme Court: कर्ज में डूबी भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड पर बड़ा फैसला, JSW स्टील की समाधान योजना बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) से जुड़े मामलों में बीपीएसएल के पूर्व प्रमोटरों और कुछ लेनदारों की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। साथ ही, शीर्ष अदालत ने कंपनी के लिए जेएसडब्ल्यू की समाधान योजना को बरकरार रखा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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सुप्रीम कोर्ट ने मेसर्स भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की समाधान योजना को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने समाधान योजना के खिलाफ कंपनी के पूर्व प्रमोटरों और लेनदारों की याचिका खारिज कर दी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने जेएसडब्ल्यू स्टील की ओर से बीपीएसएल में किए गए लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश पर गौर किया। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 17 फरवरी, 2020 के समाधान योजना के फैसले को बरकरार रखते हुए पीठ ने शुक्रवार को कहा, हमें अपीलों में कोई दम नहीं दिखता। इसलिए अपीलें खारिज की जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पीठ ने अपने फैसले में कहा, एसआरए (सफल समाधान आवेदक)-जेएसडब्ल्यू ने इकाई (कॉर्पोरेट देनदार) के आधुनिकीकरण और विस्तार में भारी मात्रा में निवेश किया है। इतना ही नहीं जेएसडब्ल्यू की ओर से लागू की जा रही समाधान योजना के कारण, कॉर्पोरेट देनदार के चालू व्यवसाय के रूप में चलने से हजारों कर्मचारी अपनी आजीविका चला रहे हैं। दालत ने कहा कि कार्यान्वयन में देरी जेएसडब्ल्यू या ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के कारण नहीं हुई और दोनों ही बाधाओं के बावजूद योजना को लागू करने का प्रयास कर रहे थे।
छोटी पीठ का फैसला पलटा
शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 2 मई को आवेदक जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड की बीपीएसएल के लिए एक समाधान योजना को अवैध और आईबीसी का उल्लंघन करार देते हुए रद्द कर दिया था। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बाद में शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। 31 जुलाई को पीठ ने 2 मई के फैसले को वापस ले लिया था। पीठ ने कहा था कि जस्टिस त्रिवेदी द्वारा लिखित 2 मई के फैसले में न्यायालय के कई फैसलों में कानूनी स्थिति पर सही ढंग से विचार नहीं किया गया था।