फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   SC asks Centre to consider revising wage ceiling for Employees Provident Fund Scheme

EPFO: वेतन सीमा में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, केंद्र सरकार को चार महीने में निर्णय लेने का आदेश

Mon, 05 Jan 2026 07:00 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 05 Jan 2026 07:00 PM IST
सार

EPFO: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 11 साल से स्थिर ईपीएफओ वेतन सीमा को संशोधित करने पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा न्यूनतम वेतन से कम है, इससे बड़ी संख्या में कर्मचारी पीएफ कवरेज से वंचित हो रहे हैं। जानें इस बारे में विस्तार से।

विज्ञापन
SC asks Centre to consider revising wage ceiling for Employees Provident Fund Scheme
pf epfo - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत आने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ईपीएफओ योजना के लिए वेतन सीमा (वेज सीलिंग) को बदलने पर विचार करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने सरकार को इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए चार महीने की समय सीमा तय की है। गौरतलब है कि पिछले 11 वर्षों से ईपीएफओ की वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं।

विज्ञापन


जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार के समक्ष अपना अभ्यावेदन और कोर्ट के आदेश की प्रति प्रस्तुत करें। इसके बाद, केंद्र सरकार को इस मामले पर चार महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में कहा कि वर्तमान में ईपीएफओ योजना उन कर्मचारियों को कवरेज से बाहर रखती है जिनका मासिक वेतन 15,000 रुपये से अधिक है। यह सीमा आखिरी बार 2014 में संशोधित की गई थी।

विज्ञापन

क्या है ईपीएफओ में 15000 रुपये की सीमा?

ईपीएफओ नियमों में ₹15,000 की सीमा अनिवार्य सदस्यता और स्वैच्छिक सदस्यताके बीच की विभाजक रेखा है। ईपीएफ योजना, 1952 के पैरा 2(f) के तहत एक अपवर्जित कर्मचारी वह है, जिसका 'वेतन' (बेसिक + डीए) नौकरी ज्वाइन करते समय निर्धारित वैधानिक सीमा (वर्तमान में ₹15,000) से अधिक है। जो पहले से ही फंड का सदस्य नहीं है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन और डीए ₹15,001 है, तो उसे PF का सदस्य बनना कानूनन अनिवार्य नहीं है। हालांकि, वह पैरा 26(6) के तहत नियोक्ता की सहमति के साथ स्वेच्छा से सदस्य बन सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

न्यूनतम वेतन की मौजूदा सीमा में विरोधाभास

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने अदालत में तर्क दिया कि पिछले एक दशक में वेतन सीमा में संशोधन न होने से विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित न्यूनतम वेतन (मिनिमम वेज) अब 15,000 रुपये की ईपीएफओ वेतन सीमा से अधिक हो गया है।


याचिका में कहा गया है कि यह विसंगति संगठित क्षेत्र के बहुसंख्यक श्रमिकों को ईपीएफओ योजना के लाभों और सुरक्षा से वंचित कर रही है, जो कि अनिवार्य रूप से एक सामाजिक कल्याण योजना है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि वेतन सीमा से अधिक कमाई करने वाले कर्मचारियों को योजना का लाभ न मिलना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।


सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश लाखों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है। यदि केंद्र सरकार वेतन सीमा को संशोधित करती है, तो संगठित क्षेत्र के वे कर्मचारी जो वर्तमान में 15,000 रुपये से अधिक के मूल वेतन के कारण पीएफ (PF) के दायरे से बाहर हैं, वे भी सामाजिक सुरक्षा नेट में शामिल हो सकेंगे। अब सभी की निगाहें अगले चार महीनों में केंद्र सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed