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SBI: एनएसओ के आंकड़ों के बाद एसबीआई ने वृद्धि दर के अनुमानों में की कटौती, प्रति व्यक्ति GDP पर दी अच्छी खबर

Wed, 08 Jan 2025 12:08 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 08 Jan 2025 12:08 PM IST
सार

SBI: एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 25 में प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी वित्त वर्ष 23 की तुलना में लगभग 35,000 रुपये अधिक होने का अनुमान है। व्यापक जीडीपी वृद्धि में गिरावट के बावजूद इस वृद्धि को सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है। आइए इस बारे में और जानें।

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SBI downgrades India's GDP growth forecast to 6.3% for FY25 after NSO estimate of 6.4%
भारतीय स्टेट बैंक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

एनएसओ के 6.4% वृद्धि दर के अनुमान के बाद एसबीआई ने भी अपने अनुमानों में कटौती कर दी है। एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.3% कर दिया है। एसबीआई ने आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का हवाला देते हुए अपने अनुमान में यह संशोधन किया है। 

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रिपोर्ट में कहा गया, "वित्त वर्ष 25 के लिए जीडीपी वृद्धि नीचे आकर लगभग 6.3 प्रतिशत रह सकती है"। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण और ऋण वृद्धि में मंदी, उच्च आधार प्रभाव के प्रभाव के साथ, वित्त वर्ष 25 के लिए वृद्धि दर की उम्मीदें कम हुई हैं।
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2025 में भारत की प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी 35 हजार रुपये बढ़ेगी। वास्तविक जीडीपी वृद्धि में मंदी और स्थिर नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के बावजूद, प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी वित्त वर्ष 25 में बेहतर हो सकती है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में यह दावा किया है। 
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रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 25 में प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी वित्त वर्ष 23 की तुलना में लगभग 35,000 रुपये अधिक होने का अनुमान है। व्यापक जीडीपी वृद्धि में गिरावट के बावजूद इस वृद्धि को सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने अपने पहले अग्रिम जीडीपी अनुमानों में, वित्त वर्ष 25 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि निजी खपत आर्थिक विकास के प्रमुख चालक के रूप में उभरी है, जिसने वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक रूप से 7.3 प्रतिशत की उच्चतम वृद्धि दर्ज की है।

प्रति व्यक्ति आधार पर निजी खपत में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो उपभोक्ता खर्च में मजबूत सुधार को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि प्रति व्यक्ति निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) की 6.3 प्रतिशत की वृद्धि प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद की 5.3 प्रतिशत की वृद्धि को पार कर गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रवृत्ति घरेलू वित्तीय व्यवहार में बदलाव का संकेत देती है। आय के सापेक्ष उच्च खपत वृद्धि यह दर्शाती है कि परिवारों ने खर्च के स्तर को बनाए रखने के लिए अपनी बचत में कटौती की होगी। रिपोर्ट में कहा गया है, "वित्त वर्ष 2025 में बचत में शुद्ध कमी से निजी खपत को वित्तपोषित किया गया है।"

निष्कर्ष चुनौतियों के बीच भी भारत की खपत-संचालित अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को उजागर करते हैं। हालांकि, रिपोर्ट ने इस प्रवृत्ति की स्थिरता के बारे में भी सवाल उठाए हैं, खासकर अगर बचत के स्तर में गिरावट जारी रहती है।


इसमें कहा गया है कि "प्रति व्यक्ति पीएफसीई वृद्धि 5.3 प्रतिशत पर प्रति व्यक्ति जीडीपी वृद्धि से अधिक है। अगर यह सच है तो निजी खपत को वित्त वर्ष 25 में बचत में शुद्ध कमी से वित्तपोषित किया गया है।" एसबीआई रिपोर्ट ने भारत के आर्थिक प्रक्षेपवक्र में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की, जिसमें विकास की व्यापक कहानी को आकार देने में प्रति व्यक्ति आय और खपत जैसे व्यक्तिगत आर्थिक संकेतकों के महत्व पर जोर दिया गया।

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