{"_id":"62a0c093e22a01202c178da1","slug":"saudi-arabia-hikes-july-crude-oil-rate-for-asia-buyers-know-its-impact-on-india","type":"story","status":"publish","title_hn":"Crude Oil: सऊदी अरब के फैसले से बढ़ेगी कई देशों की मुश्किलें, कच्चा तेल महंगा होने का भारत में होगा यह बड़ा असर","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Crude Oil: सऊदी अरब के फैसले से बढ़ेगी कई देशों की मुश्किलें, कच्चा तेल महंगा होने का भारत में होगा यह बड़ा असर
Wed, 08 Jun 2022 09:00 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Wed, 08 Jun 2022 09:00 PM IST
सार
सऊदी अरब ने जुलाई महीने के लिए एशियाई देशों के लिए अरब लाइट क्रूड ऑयल के आधिकारिक बिक्री मूल्य (ओएसपी) में जून की तुलना में 2.1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी की गई है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे की संभावना बढ़ गई है।
विज्ञापन
कच्चा तेल
- फोटो : pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कच्चे तेल की कीमतों को लेकर दुनियाभर में उथल-पुथल मची हुई है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से सप्लाई ने पर असर पड़ा और इसके दाम आसमान को छू गए। इस युद्ध के शुरू होने के बाद ही कच्चे तेल का भाव 139 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन अब इसमें कुछ कमी आई है पर अभी भी उच्च स्तर पर बना हुआ है। इस बीच सऊदी अरब ने जो कदम उठाया उसने एशियाई देशों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दरअसल, दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश ने एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल की कीमत में बढ़ा इजाफा किया है।
विज्ञापन
जुलाई के लिए 2.1 डॉलर की वृद्धि
गौरतलब है कि जुलाई महीने के लिए एशियाई देशों के लिए अरब लाइट क्रूड ऑयल के आधिकारिक बिक्री मूल्य (ओएसपी) में जून की तुलना में 2.1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी की गई है। गर्मियों में तेल की ज्यादा मांग को देखते हुए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सऊदी अरब ने ये फैसला लिया है। सऊदी अरब के इस फैसले से भारत को भी बड़ा झटका लगा है। इससे भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, क्योंकि भारत सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है। विश्लेषकों ने पहले ही सऊदी अरब की ओर से ऐसा कदम उठाने का पूर्वानुमान व्यक्त किया था, लेकिन उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1.5 डॉलर की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई थी। वहीं जो वृद्धि की गई है वह इससे कहीं ज्यादा है। कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कराए गए पोल में हर छह में से एक ने दो डॉलर से ज्यादा उछाल का अनुमान व्यक्त किया था।
विज्ञापन
भारत और चीन पर ज्यादा प्रभाव
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने यह फैसला जुलाई में तेल का उत्पादन 648,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने के ओपेक प्लस देशों के बीच हुए समझौते के बावजूद किया है। इससे एशियाई देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यहां बता दें कि एशियाई देशों के लिए बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों का भारत और चीन ओर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। हालांकि भारत और चीन लगातार रूस का तेल खरीद रहे हैं। सऊदी अरामको ने बीते रविवार की रात को कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा किया था। हालांकि, अमेरिका के लिए कच्चे तेल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।
विज्ञापन
पेट्रोल-डीजल में आ सकती है तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव बढ़ने का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के दाम पर पड़ेगा। बता दें कि सरकार के उत्पाद शुल्क घटाने के बाद से देश में तेल के दाम स्थिर हैं ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियों को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा और बढ़ते घाटे को कम करने के लिए उनकी ओर से देश की जनता पर बोझ डाला जाएगा। यह बोझ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा। गौरतलब है कि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है और यह अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदते हैं। आयात किए जा रहे कच्चे तेल की कीमत भारत को अमेरिकी डॉलर में चुकानी होती है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम प्रभावित होते हैं यानी ईंधन महंगे होने लगते हैं।
ऐसे असर डालता है क्रूड ऑयल
यहां आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर का इजाफा होता है तो देश में पेट्रोल-डीजल का दाम 50 से 60 पैसे बढ़ जाता है। ऐसे में उत्पादन कम होने और सप्लाई में रुकावट के चलते इसके दाम में तेजी आना तय है और उम्मीद है कि कच्चा तेल फिर से 130 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकता है। तेल वितरण कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं। साल 2014 तक कीमतों के निर्धारण का काम सरकार के कंधों पर था और हर 15 दिनों में इनकी कीमतें बदलती थीं। लेकिन जून 2014 के बाद ये काम तेल कंपनियों को सौंप दिया गया था। बात करें पेट्रोल-डीजल के दाम की तो इनमें आखिरी बार दिवाली से पहले बदलाव किया गया था, तब से लेकर अब तक इनकी कीमतें स्थिर हैं।
महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ेगा
गौरतबल है देश में खुदरा महंगाई पहले से ही उच्च स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी इसमें और इजाफा करने वाली साबित होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती होने वाली है। दरअसल, कच्चा तेल महंगा हुआ्, तो देश में पेट्रोल-डीजल और गैस पर पड़ने वाला है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई पर खर्च बढ़ेगा और सब्जी-फल समेत रोजमर्रा के सामनों पर महंगाई बढ़ेगी जो कि आपकी जेब पर सीधा असर डालेगी।