Samwad 2025: 'पैसा जरूरी नहीं है यह कहने से पहले पैसा कमा लें', लखनऊ में संवाद के मंच पर बोले बाजार के दिग्गज
Samwad 2025: लखनऊ में अमर उजाला संवाद के मंच पर शुक्रवार को कारोबारी जगत के दिग्गज भी जुटे। इस दौरान निवेश, बाजार और कारोबार पर खुलकर बातचीत हुई। बाजार के दिग्गजों ने निवेश और बाजार की चाल पर क्या कुछ कहा? आइए जानते हैं।
विस्तार
"पैसे के बारे में कहा गया है कि पैसों के पीछे मत भागना, पैसा हाथ का मैल है, पैसे से सबकुछ नहीं खरीदा जा सकता है। पर जब मैं बाजार में आया तो वॉरेन बफेट की एक बात पता चली। वे कहते हैं पैसा जरूरी नहीं है यह कहने से पहले पैसा बना लेना जरूरी है।" यह बात कही है कोटक म्यूचुअल फंड के सीईओ नीलेश शाह ने अमर उजाला के संवाद मंच पर। उन्होंने संवाद के बाजार क्या करें, क्या न करें सत्र में अपनी बात रखी। उनके साथ चर्चा में व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ आशीष सोमैया भी शामिल हुए।
बाजार में गिरावट पर शाह बोले- हमें शोर को दरकिनार कर आगे बढ़ना चाहिए
टैरिफ पर बोलते हुए नीलेश शाह ने कहा कि हमारा बाजार ऐसा है जहां हमें शोर को दरकिनार कर जो वास्तव में हो रहा उस पर ध्यान रखने की जरूरत है। हमें कंपनी के कैशफ्लो पर ध्यान रखने की जरूरत है। ट्रंप के बारे में नीलेश ने कहा कि उनका हाल हिंदी सिनेमा के डॉयलॉग जैसा है। वह डॉयलॉग है- मैं दिल में आता हूं समझ में नहीं आता।
गिरावट के समय फायदा मिलने की बढ़ती है उम्मीद: आशीष सोमैया
कार्यक्रम के दौरान व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ आशीष सोमैया ने कहा कि जब भी बाजार में वर्तमान जैसे हालात बनते हैं तो हमें इसका फायदा मिलने की उम्मीद होती है। फिलहाल बाजार में दो दिग्गज भिड़े हुए हैं। हमें उनकी लड़ाई का फायदा मिलेगा। एफआईआई की बिकवाली पर आशीष ने कहा कि इस गिरावट के बावजूद हमारे बाजार का रुझान सुधरेगा।
टैरिफ और बाजार में गिरावट पर क्या बोले निवेश जगत के दिग्गज?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर कोटक म्यूचुअल फंड के सीईओ नीलेश शाह ने कहा कि मार्केट की उम्मीदें बहुत बढ़ गईं थीं। 10 वर्षों में भारत दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। छह साल में करीब 18 लाख करोड़ रुपये का बाजार में मुनाफा आया। ऐसे में बाजार में निवेशकों की आकांक्षाओं को पूरा कर पाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए बाजार में करेक्शन आया। ट्रंप के कारण भी बाजार प्रभावित हुआ। हमारा निर्यात गुड्स में कम है, सर्विसेज में ज्यादा है। हमारी इकोनॉमी ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़ी हुई है। उन्हें सर्दी लगेगी तो कुछ छींक हमें भी आएगी। ट्रंप ने पूरा वातावरण हिलाकर रख दिया है।
'अपुन इच भगवान है' जैसा सोचने पर गिरावट का दौर शुरू हो जाता है: आशीष
मंदी की आशंका पर आशीष ने कहा कि 'निगाहें मंजिल पर थीं, गिरे और गिरकर संभलते रहे, हवाओं ने बहुत कोशिश की, पर चिराग आंधियों में भी जलते रहे।' बाजार गिरेगा लेकिन फिर उठेगा। हमे करेक्शन का लाभ उठाना चाहिए। उसी अनुसार रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग तब पैसा लगाते हैं जब बहुत कॉन्फिडेंस महसूस करते हैं। आपके वर्तमान विश्वास का आपके भविष्य के रिटर्न से कोई लेनादेना नहीं होता है। 'अपुनइच भगवान है' जैसी सोच से नीचे जाने का दौर शुरू हो जाता है। ऐसे में गिरे बाजार में निवेश का अधिक मौका मिलता है।
बाजार में दूसरे पर भरोसा सबसे बड़ी गलती: नीलेश
नीलेश शाह ने कहा कि बाजार में दूसरे पर भरोसा सबसे बड़ी गलती होती है। खुद के रिसर्च के आधार पर निवेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उम्र के साथ-साथ निवेश का रुख भी बदल जाता है। आजकल बाजार मनोविज्ञान के आधार पर काम कर रहा है। गीता पढ़ने की जरूरत है। उससे मनोविज्ञान से जुड़ी बारीकी समझ में आती है। सोने में निवेश पर उन्होंन कहा कि इसमें निवेश जरूरी है। लोग सोना खरीदते हैं फिर बेचते नहीं है। रैली के बाद इसमें गिरावट जरूर आएगी पर निवेश किया जा सकता है। अशीष ने सोने में रैली पर कहा कि पिछले घोड़े की तेजी पर भरोसा नहीं करना चाहिए, नया घोड़ा ढूंढ़ना चाहिए।