चावल के निर्यात के लिए लेना होगा प्रमाण पत्र, यूरोपीय संघ ने बदला नियम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर भारतीय चावल निर्यातक यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों को बासमती और गैर बासमती चावल का निर्यात करना चाहते हैं तो उन्हें एक सरकारी एजेंसी से निरीक्षण प्रमाण पत्र लेना होगा। ईयू के देशों को भारत से बासमती की पीबी1 और 1401 प्रजातियों का सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से कहा, ‘यूरोपीय संघ के देशों को चावल का निर्यात करने के लिए निर्यात निरीक्षण परिषद/निर्यात निरीक्षण एजेंसी से तत्काल निरीक्षण का प्रमाण पत्र लेना होगा।’
यूरोपीय संघ ने बासमती चावल को फंगस से बचाने के लिए किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ट्राइसाइक्लाजोल की अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) का स्तर 0.03 मिलीग्राम से घटाकर 0.01 मिलीग्राम प्रति किग्रा कर दिया है। ईयू ने ऐसा सभी देशों के लिए किया है।
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है और हर साल ईयू को 3 लाख टन चावल का निर्यात करता है। निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) निर्यात प्रमाण पत्र देेने वाली भारत की आधिकारिक संस्था है, जो भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
निर्यात के लिए सुनिश्चित करनी होगी गुणवत्ता
निर्यात (गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण) अधिनियम, 1963 के तहत भारत सरकार द्वारा स्थापित यह संस्था गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण के माध्यम से भारत के निर्यात कारोबार के विकास को सुनिश्चित करती है।
उसके क्षेत्रीय संगठन द्वारा प्रमाणन के आधार पर या तो खेप (कन्साइमेंट) वार निरीक्षण या गुणवत्ता आश्वासन/खाद्य सुरक्षा प्रबंधन के माध्यम से गुणवत्ता और सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाता है। परिषद के अंतर्गत निर्यात निरीक्षण एजेंसियां (ईआईए) मुंबई, कोलकाता, कोच्चि, दिल्ली और चेन्नई में हैं।