{"_id":"618e7556c5e59068eb123129","slug":"retail-inflation-rises-marginally-to-4-48-pc-in-october","type":"story","status":"publish","title_hn":"महंगाई दर बढ़ी: खाद्य सामग्री महंगी होने का असर, खुदरा मुद्रास्फीति दर बढ़कर 4.48 फीसदी पर पहुंची ","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
महंगाई दर बढ़ी: खाद्य सामग्री महंगी होने का असर, खुदरा मुद्रास्फीति दर बढ़कर 4.48 फीसदी पर पहुंची
Fri, 12 Nov 2021 07:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 12 Nov 2021 07:38 PM IST
सार
retail inflation rise in october : उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति दर सितंबर में 4.35 फीसदी और पिछले साल इसी माह यानी अक्तूबर 2020 में 7.61 फीसदी थी।
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खुदरा महंगाई दर बढ़ी
- फोटो : PTI
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विस्तार
खाद्य कीमतों की कीमतों में तेजी से खुदरा महंगाई अक्तूबर में मामूली बढ़कर 4.48 फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि, यह अब भी आरबीआई के तय लक्ष्य के दायरे में है। सरकार के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई 4.35 फीसदी रही थी, जबकि अक्तूबर, 2020 में यह आंकड़ा 7.61 फीसदी रहा था। इस दौरान ग्रामीण महंगाई सितंबर के 4.13 फीसदी से घटकर 4.07 फीसदी रह गई, जबकि शहरी क्षेत्र की महंगाई दर 4.57 फीसदी से बढ़कर 5.04 फीसदी पहुंच गई।
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राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के मुताबिक, पिछले महीने खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 0.85 फीसदी पहुंच गई। सितंबर में यह दर 0.68 फीसदी रही थी। केंद्रीय बैंक ने सीपीआई आधारित महंगाई दर को 4 फीसदी पर रखने का लक्ष्य तय किया है। इसमें दो फीसदी की कमी या बढ़ोतरी हो सकती है।
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आरबीआई के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के दौरान खुदरा महंगाई की दर 5.3 फीसदी रह सकती है। 2021-22 की दूसरी तिमाही में इसके 5.1 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है। 2022-23 की अप्रैल-जून तिमाही में खुदरा महंगाई दर 5.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है।
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आद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सितंबर में 3.1 फीसदी रही
विनिर्माण और खनन क्षेत्र के प्रदर्शन के दम पर देश का औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) सितंबर में 3.1 फीसदी बढ़ गया। पिछले साल सितंबर में यह एक फीसदी और अक्तूबर में 4.5 फीसदी बढ़ा था। एनएसओ के मुताबिक, आईआईपी में 77.63 फीसदी का योगदान देने वाले विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में इस दौरान 2.7 फीसदी तेजी रही। खनन क्षेत्र में 8.6 फीसदी और बिजली उत्पादन में 0.9 फीसदी बढ़ोतरी रही।
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर अवधि में आईआईपी में 23.5 फीसदी बढ़ोतरी रही, जबकि 2020-21 की समान अवधि में इसमें 20.8 फीसदी की गिरावट रही थी। महामारी की वजह से मार्च, 2020 में औद्योगिक उत्पादन में 18.7 फीसदी की गिरावट रही थी। लॉकडाउन के कारण आर्थिक और कारोबारी गतिविधियां थमने से आईआईपी में पिछले साल अप्रैल में 57.3 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
इस साल मार्च से दिखी तेजी
| महीना | तेजी (फीसदी में) |
| मार्च | 24.2 |
| मई | 27.6 |
| जून | 13.8 |
| जुलाई | 11.5 |
| अगस्त | 12 |