Economy: वित्त मंत्री बोलीं- खुदरा महंगाई स्थिर, ऋण माफी के भ्रामक विज्ञापनों को लेकर आरबीआई ने किया आगाह
कोर महंगाई दर अप्रैल 2023 के 4.3 फीसदी से घटकर अक्तूबर 2023 में 4.3 फीसदी पर आ गई। मंत्री ने कहा कि 2016 में मुद्रास्फीति सहिष्णुता बैंड की अधिसूचना के बाद भारत में खुदरा मुद्रास्फीति ज्यादातर स्वीकार्य सीमा के भीतर रही है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति अब 'स्थिर' है और कुछ मौकों पर मुद्रास्फीति में अस्थायी वृद्धि वैश्विक झटकों और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण मांग-आपूर्ति में अंतर के कारण हुई है। लोकसभा में एक लिखित जवाब में, सीतारमण ने कहा कि भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल-अक्टूबर 2022 में 7.1 प्रतिशत के औसत से घटकर 2023 की इसी अवधि में 5.4 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने कहा, "खुदरा मुद्रास्फीति अब स्थिर है और दो से छह प्रतिशत के अधिसूचित दायरे में है। खुदरा मुद्रास्फीति से अस्थिर खाद्य और ईंधन वस्तुओं को हटाने के बाद मुख्य मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को कमजोर करने में महत्वपूर्ण रहा है।" कोर महंगाई दर अप्रैल 2023 के 4.3 फीसदी से घटकर अक्तूबर 2023 में 4.3 फीसदी पर आ गई। मंत्री ने कहा कि 2016 में मुद्रास्फीति सहिष्णुता बैंड की अधिसूचना के बाद भारत में खुदरा मुद्रास्फीति ज्यादातर स्वीकार्य सीमा के भीतर रही है।
सीतारमण ने कहा, 'कुछ मौकों पर मुद्रास्फीति में अस्थायी वृद्धि वैश्विक झटकों और प्रतिकूल मौसम स्थितियों से उत्पन्न मांग-आपूर्ति में अंतर के कारण होती है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से आपूर्ति पक्ष की सक्रिय पहल और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से मांग में स्थिरता लाने के प्रभावी उपायों से मांग-आपूर्ति में अंतर को दूर करने और मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने में मदद मिली है।
2030 तक देश की जैव अर्थव्यवस्था 600 अरब डॉलर पर पहुंचेगी: मंडाविया
दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को अहमदाबाद में कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था पिछले आठ साल में आठ गुना बढ़कर 80 अरब डॉलर हो गई है। देश ने 2030 तक इसके 600 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। मंत्री वाइब्रेंट गुजरात से पहले 'जैव प्रौद्योगिकी : विकास भारत के लिए नवाचार और कल्याण का मार्ग' विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
आरबीआई ने ऋण माफी से जुड़े भ्रामक प्रचार को लेकर किया आगाह
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जनता को प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया मंच पर ऋण माफी की पेशकश से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सोमवार को आगाह किया। आरबीआई की ओर से जारी बयान के अनुसार, उसने ऋण माफी की पेशकश करके उधारकर्ताओं को लुभाने वाले कुछ भ्रामक विज्ञापनों पर गौर किया है। ये संस्थाएं प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया मंच पर भी ऐसे कई अभियानों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही हैं।
ऐसी संस्थाओं द्वारा बिना किसी अधिकार के ‘‘ऋण माफी प्रमाणपत्र’’ जारी करने के लिए सेवा/कानूनी शुल्क वसूलने की भी खबरें हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुछ स्थानों पर कुछ लोगों द्वारा कर्ज माफी की पेशकश से संबंधित अभियान चलाए जा रहे हैं, जो अपने अधिकारों को लागू करने में बैंकों के प्रयासों को कमजोर करते हैं।
आरबीआई ने कहा, ‘‘ ऐसी संस्थाएं गलतबयानी कर रही हैं कि बैंकों सहित वित्त संस्थानों का बकाया चुकाने की जरूरत नहीं है। ऐसी गतिविधियां वित्त संस्थानों की स्थिरता और सबसे अधिक जमाकर्ताओं के हित को कमजोर करती हैं।’’ आरबीआई ने आगाह किया कि ऐसी संस्थाओं के साथ जुड़ने से सीधे तौर पर वित्तीय नुकसान हो सकता है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि जनता को आगाह किया जाता है कि वे ऐसे झूठे व भ्रामक अभियानों का शिकार न बनें और ऐसी घटनाओं की शिकायत कानून प्रवर्तन एजेंसियों से करें।
पूर्ववर्ती सरकार ने 1.41 लाख करोड़ रुपये के तेल बॉंड जारी किए थे, चुकाई गई ढाई गुना राशि, बोले हरदीप सिंह पुरी
सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि कांग्रेस नीत पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर काबू के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये के तेल बॉंड जारी किए गए थे जिसके लिए मौजूदा सरकार ने 3.50 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि उस समय पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर काबू पाने के लिए ऐसा कदम उठाया गया जिसका भार अगली सरकार को उठाना पड़ा।
सरकार ने डी-ऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर प्रतिबंध अगले साल 31 मार्च तक बढ़ा दिया है। इस पर पहली बार इस साल जुलाई में प्रतिबंध लगाया गया था। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा, ''बिना तेल वाले चावल की भूसी के निर्यात पर प्रतिबंध 31 मार्च, 2024 तक बढ़ाया जाता है।"
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में दूध की कीमतों में वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक चारा है और निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू बाजार में उत्पाद की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिससे दरों को नियंत्रित किया जा सकता है।
हालांकि, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने पहले सरकार से निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था क्योंकि इस कदम से पशु चारा और दूध की कीमतों पर न्यूनतम प्रभाव पड़ने की संभावना है। अनुमानों के अनुसार राइस ब्रान एक्सट्रैक्सन के लगभग 25 प्रतिशत का इस्तेमाल पशुचारे के लिए किया जाता है।