निवेश मंत्रा: क्या एसएमई कंपनियों के आईपीओ...;भरपूर जोखिम के साथ कमाई भी
स्टॉक एक्सचेंजों के मुख्य प्लेटफॉर्म की तरह ही छोटे एवं मझोले (एसएमई) प्लेटफॉर्म पर भी आईपीओ की बाढ़ आई है। इस तरह के इश्यू बहुत ज्यादा रिटर्न देते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी उससे ज्यादा होता है। इसमें रिटर्न और जोखिम का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-
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विस्तार
सैंकड़ों गुना आवेदन पा रहीं छोटी और मझोली कंपनियों ने निवेशकों को सैकड़ों गुना तक का रिटर्न भी दिया है। लेकिन अब ये सेबी के शिकंजे में आ गई हैं। कुछ छोटे मर्चेंट बैंकरों के दफ्तरों पर सेबी ने पिछले हफ्ते ही छापा मारा है। खासकर ग्रे मार्केट और ऑपरेटरों के खेल वाले गढ़ गुजरात में दर्जनों जगहों पर इस तरह के छापे की जानकारी सामने आई है। सवाल यह है कि क्या एसएमई कंपनियां सही में ज्यादा आवेदन पा रही हैं या इनमें कृत्रिम तरीके से वॉल्यूम और रिटर्न का निर्माण किया जा रहा है। इस तरह की कंपनियों में निवेश से पहले उनकी बैलेंसशीट, कारोबार और उनके भविष्य के टिकाऊ व्यापार को परखना बहुत जरूरी है।
खुदरा निवेशकों के लिए मुश्किल
मुख्य आईपीओ में खुदरा निवेशक न्यूनतम 15,000 रुपये का आवेदन कर सकते हैं। छोटे आईपीओ में न्यूनतम निवेश एक लाख रुपये है। इसलिए जो एकदम छोटे निवेशक हैं, वे इससे दूर हो जाते हैं। इस तरह के आईपीओ में आवेदन करना खुदरा निवेशकों के लिए बहुत मुश्किल है। पर बड़े और अमीर निवेशक इनमें पैसा लगाकर अच्छी कमाई भी कर लेते हैं। ये आईपीओ कई गुना फायदा देकर आकर्षक बन जाते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी भरपूर है।
2012 में शुरू हुआ था एसएमई प्लेटफॉर्म
बीएसई और एनएसई ने 2012 में छोटी कंपनियों को पैसा जुटाने में मदद करने के लिए एसएमई प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इससे छोटी कंपनियों को बाजार में आने में काफी मदद मिली। हाल में इन आईपीओ को 700 गुना तक आवेदन भी मिला है। लेकिन इन सबके बीच कई ऐसी कंपनियां रहीं, जो बाजार से पैसा जुटाईं और निकल गईं।
जोखिम से बचने मल्टी एसेट फंड चुनें
अधिकांश निवेशक अस्थिरता और बाजार चक्र को लेकर अक्सर चिंतित रहते हैं क्योंकि इससे उनके पोर्टफोलियो पर असर पड़ता है। निवेशकों के बीच धैर्य खोना काफी आम है जिसके कारण समय से पहले निकासी हो जाती है। परिणाम यह होता है कि न तो निवेश का अनुभव अच्छा रहता है और न ही वे वित्तीय लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं। ऐसे में चिंतित होने के बजाय, उन्हें लंबे समय में धन सृजन के अवसरों के रूप में स्वीकार करने की जरूरत है। चाहे वह इक्विटी, डेट सोना या रियल एस्टेट से संबंधित निवेश हो - सभी का अपना-अपना चक्र होता है।
निवेश विशेषज्ञ ललित कुमार बताते हैं कि मल्टी एसेट निवेश रणनीति यह सुनिश्चित करती है कि निवेशक जोखिमों में विविधता ला सकते हैं। निवेश रणनीति का पालन करने वाले ऐसे पोर्टफोलियो किसी विशेष परिसंपत्ति वर्ग के प्रदर्शन के अधीन नहीं हैं।