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SBI: क्या एमपीसी की अगली बैठक के दौरान रेपो रेट में कटौती का फैसला होगा? एसबीआई चेयरमैन ने जताया ये अनुमान

Wed, 18 Sep 2024 06:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 18 Sep 2024 06:36 PM IST
सार

हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक की कमान संभालने वाले स्टेट बैंक के चेयरमैन की ब्याज दरों पर टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही है। फेड की दो दिवसीय बैठक फिलहाल जारी है। 2020 के बाद पहली बार बाजार का अनुमान है कि फेड ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है।

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RBI unlikely to cut rates in 2024 amid food inflation uncertainty: SBI
रेपो रेट पर बोले एसबीआई चेयरमैन - फोटो : amarujala.com

विस्तार

खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इस बात की संभावना नहीं है कि भारतीय रिजर्व बैंक 2024 में रेपो रेट में कटौती करे। भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी. श्रीनिवासुलु शेट्टी ने बुधवार को एक साक्षात्कार के दौरान यह अनुमान जताया। पीटीआई से बातचीत में शेट्टी ने कहा, "ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक स्वतंत्र फेसला लेते हैं। हालांकि, फेड का निर्णय उन्हें प्रभावित करेगा, लेकिन ब्याज दरों में कटौती के किसी फैसले से पहले आरबीआई खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखेगा।" 

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अमेरिका में नीतिगत दरों में कटौती का अनुमान, पर भारत में होगी देरी 

हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक की कमान संभालने वाले स्टेट बैंक के चेयरमैन की ब्याज दरों पर टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही है। फेड की दो दिवसीय बैठक फिलहाल जारी है। 2020 के बाद पहली बार बाजार का अनुमान है कि फेड ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। अगर फेड ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेता है तो कई अन्य दूसरे केंद्रीय बैंक भी उसका अनुसरण कर सकते हैं।

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चेल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी - फोटो : x.com/TheOfficialSBI

खाद्य पदार्थों की महंगाई को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम

एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि हमारे अनुमान के अनुसार चालू कैलेंडर वर्ष में रेपो रेट में कटौती की उम्मीद कम है। संभवत: किसी भी कटौती के लिए हमें चालू वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2025) का इंतजार करना पड़ सकता है। आरबीआई ब्याज दरों में कटौती का फैसला तब तक टालने की कोशिश करेगा, जब तक खाद्य पदार्थों की महंगाई संतोषजनक स्तर पर न पहुंच जाए।

7 से 9 अक्तूबर के बीच होनी है आरबीआई एमपीसी की बैठक

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 7 से 9 अक्तूबर के बीच होगी। इस बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा। एमपीसी ब्याज दरों पर अपने फैसले के लिए खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है, अगस्त में मामूली रूप से बढ़कर 3.65% पर पहुंच गई है। जुलाई में महंगाई दर 3.54% थी। हालांकि, अगस्त में महंगाई का आंकड़ा केंद्रीय बैंक के औसत लक्ष्य 4% के नीचे है, लेकिन खाद्य पदार्थों के मामले में यह आंकड़ा 5.66% रहा, जिस पर केद्रीय बैंक की नजर बनी हुई है।

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शक्तिकांत दास - फोटो : RBI

फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों नहीं हुआ है कोई परिवर्तन 

अगस्त महीने में हुई बैठक में एमपीसी ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए रेपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा था।  लगातार नौवीं बार नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में फरवरी 2023 के बाद से कोई परिवर्तन नहीं किया है। पिछली बैठक के दौरान मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से चार ने ब्याज दरों को यथावत रखने के पक्ष में वोट दिया था। वहीं दो बाहरी सदस्यों ने इसमें कटौती की वकालत की थी। पिछले ही हफ्ते आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि ब्याज दरों में कटौती का फैसला महंगाई के दीर्घकालिक रुख पर निर्भर करेगा, न कि मासिक आंकड़ों पर।

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भारतीय स्टेट बैंक - फोटो : amarujala.com

सहायक कंपनियों में विनिवेश पर स्टेट बैंक चेयरमैन ने दी यह प्रतिक्रिया

सहायक कंपनियों में भारतीय स्टेट बैंक की हिस्सेदारी बेचने के सवाल पर सेट्टी ने साफ किया कि फिलहाल इस पर कोई विचार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "यदि इन सहायक कंपनियों की पूंजी में वृद्धि की जरूरत हो तो, निश्चित रूप से इस पर विचार करेंगे।" उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी बड़ी सब्सिडियरी को अपने संचालन विस्तार के लिए पैतृक कंपनी से पूंजी की जरूरत नहीं है। बैंक ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में 489.67 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी का निवेश किया है। कंपनी ने कर्मचारियों को ईएसओपी भी आवंटित किया है और इसके परिणामस्वरूप बैंक की हिस्सेदारी 69.95 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 69.11 प्रतिशत हो गई है।

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