फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   RBI's interest rate cut surprised experts, changing the policy stance from accommodative to neutral leaves lim

RBI: सीआरआर में कटौती के फैसले से जानकार भी चौंके, नीतिगत रुख को उदार से तटस्थ करने के क्या मायने? जानें

Fri, 06 Jun 2025 06:44 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Fri, 06 Jun 2025 06:44 PM IST
सार

RBI MPC Announcement: भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से काफी साहसिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 50 आधार अंकों की कटौती की गई है। दूसरी ओर, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 100 आधार अंकों की कटौती करके इसे 3 प्रतिशत करने का फैसला और चौंकाने वाला है। एमपीसी के फैसलों पर जानकारों की राय क्या है, आइए जानते हैं।

विज्ञापन
RBI's interest rate cut surprised experts, changing the policy stance from accommodative to neutral leaves lim
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बार एमपीसी की बैठक में काफी साहसिक कदम उठाए है। बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती की गई है, जबकि बाजार को महज 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद थी। दूसरी ओर, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी 100 आधार अंकों की कटौती करके इसे 3 प्रतिशत करने का चौंकाने वाला फैसला लिया गया है। इससे बैंकिंग प्रणाली में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से भविष्य में दरों में कटौती का फैसला आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के अहम आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इसके साथ ही वैश्विक परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभाएंगी।  

विज्ञापन


सैमको सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मार्केट प्रासपेटिक अपूर्व सेठ कहते हैं गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साहिसक कदम उठाते हुए आक्रामक रुख अपनाया और रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की। इसके साथ ही सीआरआर में भी 100 आधार अंकों की कटौती की गई है। इससे बैंकिंग प्रणाली में लगभग 2.5 ट्रिलियन नकदी आएगी। सीआरआर में घोषित कटौती 25-25 आधार अंकों के साथ चार चरणों में लागू की जाएगी। यह 6 सितंबर, 4 अक्तूबर, 1 नवंबर और 29 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह से शुरू होगी।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि चीन ने सितंबर 2024 में अपनी सीआरआर में 50 आधार अंकों की कटौती की जिससे उसके बैंकिंग सिस्टम में 142 बिलियन डॉलर की राशि डाली गई। इसकी तुलना में भारत के इस फैसले से जिसमें छह महीनों में 30 बिलियन डॉलर जारी होने की उम्मीद है। यह घरेलू खपत के लिए महत्वपूर्ण  प्रोत्साहन देगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनके अनुसार कॉरपोरेट, उपभोक्ताओं और निवेशकों पर निर्भर है कि वे इस मौके का लाभ कैसे उठाएंगे। अब तक कॉरपोरेट पूंजीगत व्यय धीमा रहा है, इसका मुख्य कारण कंपनियों की बैलेंस शीट में नरमी और वैश्विक बाधाएं रही हैं। अब जब आरबीआई ने लिक्विडिटी के मोर्चे पर चीजें बेहतर बना दी है तो अब निवेश बढ़ाने और विकास के अगले चरण के लिए जरूरी क्षमता का निर्माण करने की जिम्मेदारी निजी उद्यमों पर है।

RBI's interest rate cut surprised experts, changing the policy stance from accommodative to neutral leaves lim
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

वैश्विक अनिश्चितता आगे की कटौती के लिए बड़ी भूमिका निभा सकती हैं

इक्रिस सिक्योरिटीज की अर्थशास्त्री अनिता रंगन कहती हैं कि 50 आधार अंकों की बड़ी कटौती करते हुए आरबीआई ने अपना रुख उदार से तटस्थ कर लिया है। पिछली एमपीसी के बाद ही आरबीआई ने अपना रुख बदला था। जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि भविष्य में कटौती की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि आरबीआई के इस तटस्थ रुख से भविष्य में कटौती के लिए सीमित गुंजाइश है। केंद्रीय बैंक ने केवल एक तिमाही में ही अपने पिछली नरम नीति को पलट दिया है। हालांकि नरम नीति का एक वैकल्पिक उपाय इस वर्ष चार किस्तों में सीआरआर में कटौती के फैसले के जरिए किया गया गया है। इससे बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ रुपये की तरलता आएगी।

रंगन के अनुसार आगे की दरों में कटौती पर रोक से पता चलता है कि आरबीआई एफएक्स के बारे में चिंतित है, लेकिन घरेलू स्तर पर विकास के इंजन को चालू रखने के लिए तरलता को बढ़ावा देना जारी रखेगा। मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत से घटाकर 3.7 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 26 के लिए वृद्धि पर अपरिवर्तित है। हालांकि ऐसा लगता है कि यह वृद्धि अब मुद्रास्फीति के बारे में नहीं है, यह बाहरी बनाम आंतारिक स्थितियों के बारे में है। वृद्धि के लिए फ्रंट लोडिंग जरूरी है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता आगे की कटौती को रोकने बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

 

तटस्थ रुख से भविष्य में कटौती के लिए सीमित गुंजाइश

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा कहती है आरबीआई द्वारा उम्मीद से अधिक नीति दरों में कटौती की घोषणा और सामयोजन से तटस्थ नीतिगत रुख में बदलाव से पता चलता है कि वर्तमान चक्र में नीति में और ढील देने की गुंजाइश अब कम हो गई है। हालांकि गवर्नर का लहजा मोटे तौर पर नरम रहा है, जो केंद्रीय बैंक की विकास को प्राथमिकता देने की मंशा को दिखाता है। आरबीआई का वित्त वर्ष 26 के लिए विकास अनुमानों को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्ति रखने का निर्णय अपेक्षित लाइनों पर था।

लेकिन हमारा पूर्वानुमान थोड़ा रूढ़िवादी है जो वैश्विक अनिश्चितता और बाधाओं व नीति के बीच वित्त वर्ष 26 के लिए 6.2 प्रतिशत रखा है। हालांकि आरबीआई ने मुद्रास्फीति को अपने अनुमान से घटा कर 3.7 कर दिया है जो मुद्रास्फीति की कमी को दर्शाता है, लेकिन हम मौसम संबंधि रिस्क को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत पर रखते हैं। क्योंकि इस साल मानसून की शुरुआत से ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में फसल के नुकसान की शुरुआत की रिपोर्ट पहले ही आ चुकी है, जो आने वाले महीनों में मुद्रस्फीति को बढ़ा सकती है। भविष्य में हम आरबीआई से किसी और दर में कटौती की उम्मीद नहीं करते हैं, जब तक कि विकास के लिए नकारात्मक जोखिम न हो।

आरबीआई ने तीनों मोर्चों पर चौंकाया है

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुख्य अर्थशास्त्री सुवोदीप रक्षित कहते हैं आरबीआई ने तीनों मोर्चों पर चौकाया है, पहला 50 आधार अंकों की कटौती दूसरा 100 अंकों की सीआरआर में कटौती और अपना रुख बदलकर फिर से तटस्थ कर लिया है। इस घोषणा का भविष्य में  यह मतलब है कि  प्रभावी रूप से दर कटौती के चक्र को रोक दिया है। आरबीआई की भविष्य की नीति कार्रवाई घरेलू विकास और मुद्रास्फीति पर निर्भर करेगी। उनका कहना है कि वैश्विक विकास और घरेलू मुद्रस्फीति के जोखिमों यदि बढ़ते हैं, हमें अगली कुछ नीतियों में दरो में और कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यदि बैंकिंग प्रणाली में तरलता कि बात करें तो रिजर्व बैंक द्वारा सीआरआर में 100 आधार अंकों की कटौती से 2.5 ट्रिलियन की नकदी उपलब्ध होगी।

घरेलू मांग और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सकारात्मक कदम

एलएंडटी फाइनेंस लिमिटेड की प्रबंध निदेशक और सीईओ सुदीप्ता रॉय बताती हैं बड़े स्तर पर रेपो दर में कटौती और सीआआर में 100 आधार अंकों की कटौती मौद्रिक प्रोत्साहन को आगे बढ़ाने में मदद करेंगा और ऋण की मांग बढ़ेगी, जबकि वित्तीय प्रणाली में टिकाऊ तरलता आएगी और अर्थव्यवस्था में धन की कुल लागत कम होगी। घरेलू मांग और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सकारात्मक कदम है।


विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed