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ठगों पर नकेल: बैंकों को ऐसे लग रही है आर्थिक चपत, सीबीआई के रडार पर आए भीतरी 'नटवरलाल'

Sat, 27 Mar 2021 04:04 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Mar 2021 04:04 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा मामले भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में देखने को मिले थे। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 11 सालों में 2.05 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 53,334 मामले दर्ज किए गए थे...

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RBI report said that over 50,000 fraud cases have been reported in banks during the last 11 years
बैंक फ्रॉड

विस्तार

साल 2019 में आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों ने सभी को हैरानी में डाल दिया था। उस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद लोगों का एक ही सवाल था कि नोटों से भरे सरकारी और निजी बैंक आखिर कंगाल क्यों हो रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया था कि देश में पिछले 11 वर्षों के दौरान बैंकों में 50,000 से ज्यादा धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं। इन केसों के अंतर्गत 2.05 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई थी। इन बैंकों को चपत लगाने वाला कौन है? बैंक धोखाधड़ी के दर्जनों केसों की जांच कर रही सीबीआई टीम के सूत्र बताते हैं, 'नटवरलाल' यानी ठग तो सरकारी बैंकों के भीतर ही बैठे हैं। फर्जी चेहरों और दस्तावेजों के आधार पर लोन दे दिया जाता है। बैंकों में मौजूद सैंकड़ों 'नटवरलाल' अब सीबीआई के रडार पर आ गए हैं।

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भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, उक्त अवधि में धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा मामले भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में देखने को मिले थे। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 11 सालों में 2.05 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 53,334 मामले दर्ज किए गए थे। आईसीआईसीआई बैंक में धोखाधड़ी के 6,811 मामले सामने आए, जिनमें 5,033.81 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। एचडीएफसी बैंक में 1,200.79 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
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अगर कुल मामलों की बात करें तो उनकी संख्या 2,497 रही है। सरकारी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई में धोखाधड़ी के 6,793 केस आए थे। इन मामलों के तहत बैंक के 23,734.74 करोड़ रुपये फंस गए थे। वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान आरबीआई ने बैंकों को लेकर पर्यवेक्षण और सतर्कता बरतने का दावा किया था, लेकिन उसके बावजूद मार्च 2019 तक 71,543 करोड़ रुपये के 6,799 धोखाधड़ी के मामलों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।
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सीबीआई सूत्रों के अनुसार, बैंक धोखाधड़ी के अनेक केस सामने आ रहे हैं। इसी सप्ताह बैंक फ्रॉड की शिकायतों के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने सौ जगहों पर छापामारी की थी। करीब 30 केसों में 3700 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि फंसी हुई है। अधिकांश मामले सरकारी बैंकों से संबंधित हैं। इनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, पीएनबी, एसबीआई, आईडीबीआई, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आदि शामिल हैं।

कानपुर, दिल्ली, चेन्नई, गाजियाबाद, बेल्लारी, राजकोट, करनाल, सूरत और मुंबई आदि शहरों में हुई छापेमारी में सीबीआई को जो दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं, उनकी जांच में सामने आया है कि ये फ्रॉड बिना बैंक कर्मी की मदद से संभव नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि चाहे वह अधिकारी हो या बाबू, उसने बैंक को चूना लगवाने में मदद की है। कई बैंकों में तो साफ पता चल रहा था कि लोन ऐसे व्यक्ति को दिया गया है, जिसका अपना नाम, पता और कंपनी, सब कुछ फर्जी था। ऐसे केस को बैंक कर्मी नहीं पकड़ पाए, क्या यह संभव है। तकरीबन हर बैंकों में कथित तौर पर नटवरलाल बैठे हैं। वे धोखाधड़ी करने वालों की मदद करते हैं। उन्हें दस्तावेज और बैंक के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जानकारी मुहैया कराई जाती है।

दिल्ली जोन के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया मामले में पूर्व चेयरपर्सन/एमडी अर्चना भार्गव के दो ठिकानों पर सर्च की थी। बता दें कि अर्चना भार्गव केनरा बैंक की भी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुकी हैं। आय से ज्यादा संपत्ति मामले में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। उसी आधार पर ईडी ने मनी लॉंड्रिंग केस दर्ज कर मामले की जांच शुरु की है। आरोप है कि उन्होंने विभिन्न पब्लिक सेक्टर के बैंकों में बड़े पद पर काम करते हुए 3.63 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है।


दूसरे मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक ने आरबीआई को बैंक के ऐसे तीन खातों की जानकारी दी है, जो धोखाधड़ी वाले हैं। उन पर 35 करोड़ रुपये से भी ज्यादा राशि बकाया है। इंडियन बैंक गैर-निष्पादित परिसंपत्ति वाले तीन खाते, एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड, प्रिया लिमिटेड और युवराज पावर प्रॉजेक्ट्स को धोखाधड़ी वाले खाते घोषित किया है। तीनों खातों में कुल 35.29 करोड़ रुपये के धन का हस्तांतरण हुआ है। जांच एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि जिन बैंकों में धोखाधड़ी के केस सामने आ रहे हैं, वहां कर्मियों और अधिकारियों से पूछताछ होगी। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, अधिकांश केसों में बैंक स्टाफ की मिलीभगत सामने आ रही है।

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