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रिजर्व बैंक: एआई कंपनियों के वैल्यूएशन में कमी से भारत में बढ़ सकता है पूंजी प्रवाह, आरबीआई गवर्नर का बयान

Sat, 03 Oct 2026 03:59 PM IST
नितिन गौतम आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 03 Oct 2026 03:59 PM IST
सार

आरबीआई गवर्नर ने एआई से जुड़ी वैल्यूएशन में अत्यधिक बढ़ोतरी को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के सामने मौजूद पांच प्रमुख चिंताओं में से एक बताया।

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RBI remains cautious on crypto backs underlying technology Governor Malhotra
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन में कमी से वैश्विक निवेश चक्र में धीमेपन के बावजूद भारत में पूंजी प्रवाह में वृद्धि हो सकती है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से शनिवार को दी गई। राष्ट्रीय राजधानी में कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए, मल्होत्रा ने कहा कि हाल के वर्षों में एआई निवेश में आई तेजी ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट के लिए एक मुख्य प्रेरक रही है।
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गिरावट वैश्विक बाजारों के लिए जोखिम
हालांकि, उन्होंने कहा कि एआई से जुड़े निवेश या कमाई में किसी भी तरह की कमी से इस सेक्टर से जुड़ी वित्तीय संपत्तियों की कीमतों में बड़ा बदलाव आ सकता है। इस तरह की गिरावट वैश्विक बाजारों के लिए जोखिम है, लेकिन इसका भारत पर सकारात्मक प्रभाव होगा। मल्होत्रा ने कहा, 'अगर विकसित देशों में एआई से जुड़ी वैल्यूएशन में सुधार होता है, तो इससे पूंजी के प्रवाह पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।'
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उन्होंने आगे कहा कि हाल के महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट में भी ऊंचे वैल्यूएशन से सुधार हुआ है, लेकिन उन्होंने इसे प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनके अनुसार, अन्य जोखिमों में ग्लोबल स्तर पर बढ़ा हुआ कर्ज, नॉन-बैंक फाइनेंशियल सेक्टर में लीवरेज (उधार लेकर निवेश), प्राइवेट क्रेडिट एक्सपोजर का बढ़ना और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि इन कमजोरियों का मतलब तुरंत कोई फाइनेंशियल संकट आना नहीं है।
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'देश बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है'
उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि मुझे संकट के कोई तुरंत संकेत दिख रहे हैं, लेकिन हमें इन जोखिमों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।' देश  मजबूत व्यापक आर्थिक आधार और बैंकों व नॉन-बैंक फाइनेंशियल संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट के दम पर एक चुनौतीपूर्ण ग्लोबल माहौल का सामना कर रहा है। उन्होंने माना कि कमोडिटी की कीमतों, ग्लोबल फाइनेंशियल स्थितियों और कैपिटल फ्लो के कारण देश बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि घरेलू फाइनेंशियल सिस्टम मजबूती बनाए हुए है।
 
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