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RBI: आरबीआई के एमपीसी सदस्य ने कहा- महंगाई पर अचानक काबू पाने के लिए आर्थिक वृद्धि का बलिदान उचित नहीं, मुश्किल से उबरी अर्थव्यवस्था

Mon, 27 Jun 2022 06:50 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Mon, 27 Jun 2022 06:50 AM IST
सार

अर्थव्यवस्था के लिए सतर्क आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए एमपीसी के सदस्य जयंत आर वर्मा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी (जिंस) की ऊंची कीमतें लंबी अवधि तक बने रहने के बावजूद 2022-23 और 2023-24 के लिए आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं तर्कसंगत हैं।

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RBI MPC member Jayanth Varma said There should not be 'intolerable growth sacrifice' to tame inflation abruptly
RBI - फोटो : Social Media

विस्तार

आरबीआई के मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य जयंत आर वर्मा ने कहा कि महामारी मौद्रिक प्रणाली के लिए सबसे बड़ी परीक्षा थी। भारतीय अर्थव्यवस्था इस प्रकोप से मुश्किल से ही उबर पाई है। ऐसे में हमें सावधान रहते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उच्च महंगाई पर अचानक काबू पाने की कोशिश में आर्थिक वृद्धि का असहनीय बलिदान न हो।

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अर्थव्यवस्था के लिए सतर्क आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए वर्मा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी (जिंस) की ऊंची कीमतें लंबी अवधि तक बने रहने के बावजूद 2022-23 और 2023-24 के लिए आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं तर्कसंगत हैं। बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के दबाव में आरबीआई ने कठोर रुख अख्तियार किया है। रेपो दर में इस साल मई से अब तक 0.90 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इससे रेपो दर दो साल के उच्च स्तर 4.90 फीसदी पर पहुंच गई है।
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उच्च वृद्धि की राह पर लौटने में लगेगा समय
वर्मा ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में दुनिया को उच्च वृद्धि की राह पर वापस आने में कुछ समय लगेगा।

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