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महंगाई की आशंका बढ़ी: आरबीआई पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव, रुपया भी कमजोर; क्या अक्तूबर में बढ़ेगा रेपो रेट?

Sat, 03 Oct 2026 07:09 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 03 Oct 2026 07:09 AM IST
सार

महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच आरबीआई पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेश की बिकवाली भी चुनौती बनी हुई है। क्या अक्तूबर की बैठक में रेपो रेट बढ़ाकर आरबीआई महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश करेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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rbi mpc may hike repo rate by 25 bps survey inflation weak rupee decision on october 7
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

महंगाई में तेज वृद्धि की आशंका और दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के रुख में बदलाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सामने ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। 5 से 7 अक्तूबर तक होने वाली आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में इस बार दरें बढ़ाने का फैसला किया जा सकता है।
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रॉयटर्स के अर्थशास्त्रियों के सर्वे के मुताबिक, आरबीआई रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर सकता है। ऐसा हुआ तो फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो दर 5.25 फीसदी के पार निकलेगी। सर्वे में शामिल 53 में से 29 अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर तक 25 आधार अंकों की एक और बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। अगस्त में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो आरबीआई के 4 फीसदी लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। थोक महंगाई भी अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व व जापान केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद आरबीआई के ऐसा करने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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रुपये और विदेशी निवेश की चुनौती : डॉलर के मुकाबले रुपया इस साल करीब 6 फीसदी कमजोर हो चुका है। वहीं, अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी और भारत-अमेरिका ब्याज दरों के अंतर में कमी के कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी है। 
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6.5% के पार जा सकती है महंगाई
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, खुदरा महंगाई सितंबर में बढ़कर करीब 5.65 फीसदी और अक्तूबर-नवंबर में 6.5 फीसदी से ऊपर जा सकती है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में इसके फिर 6 फीसदी से नीचे आने का अनुमान है। ब्रोकरेज ने अक्तूबर की बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ने की संभावना जताई है।


ये भी पढ़ें: रिपोर्ट: मिड-साइज आईटी कंपनियां बड़ी कंपनियों को दे सकती हैं मात, चुनौतियों के बीच कैसे प्रदर्शन की उम्मीद?

रुपये और विदेशी निवेश की चुनौती : डॉलर के मुकाबले रुपया इस साल करीब 6 फीसदी कमजोर हो चुका है। वहीं, अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी और भारत-अमेरिका ब्याज दरों के अंतर में कमी के कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी है। 

पिछली पांच बैठकों में क्या हुआ?
आरबीआई ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% किया था। 2026 में फरवरी, अप्रैल, जून और अगस्त की बैठकों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
 
बैठक क्या हुआ फैसला   रेपो दर  
अगस्त, 2026 कोई बदलाव नहीं 5.25%
जून, 2026 कोई बदलाव नहीं 5.25%
अप्रैल, 2026 कोई बदलाव नहीं 5.25%
फरवरी, 2026   कोई बदलाव नहीं 5.25%
दिसंबर, 2025 25 अंक की कटौती   5.25%
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