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RBI: 'केंद्रीय बैंक के खुलासों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन जरूरी', बोले आरबीआई के डिप्टी गवर्नर
Fri, 14 Nov 2025 07:00 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 14 Nov 2025 07:00 PM IST
सार
Reserve Bank of India: केंद्रीय बैंक के खुलासों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार यह बात कही। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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आरबीआई
- फोटो : PTI
विस्तार
केंद्रीय बैंक के खुलासों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार यह बात कही। मुर्मू ने एसईएसीईएन सेंटर के साथ आयोजित लेखा प्रथाओं के पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, "केंद्रीय बैंक के अधिदेश विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से भिन्न होते हैं, यह उनके ऐतिहासिक और संस्थागत संदर्भों के बारे में बताते हैं।
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विभिन्न देशों के अधिदेशों, कार्यों या भूमिकाओं में भिन्नता के बावजूद, प्रत्येक केंद्रीय बैंक के मूल में मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थिरता होती है। उनका लक्ष्य इन महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के लिए पर्याप्त पूंजी और भंडार/जोखिम बफर बनाए रखना है।" मुर्मू ने कहा, "केंद्रीय बैंकों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया कोई भी वैश्विक रूप से स्वीकृत लेखांकन मानक नहीं है और इसलिए, उनके लेखांकन और प्रकटीकरण प्रथाओं के प्रारूप, गहराई और महत्व में काफी भिन्नता होती है।"
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जबकि कुछ केंद्रीय बैंकों ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों (आईएफआरएस) में निर्धारित सिद्धांतों को या तो पूरी तरह से अपना लिया है या अपनी जरूरतों के अनुसार बदलावों को स्वीकारा है। अन्य बैंकों ने अपने स्वयं के राष्ट्रीय लेखांकन मानकों को लागू करना जारी रखा है या केंद्रीय बैंक के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हाइब्रिड ढांचे का इस्तेमाल किया है।
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आरबीआई की ओर से अपनाई गई लेखांकन प्रथाओं के बारे में मुर्मू ने कहा कि जिस तरह से केंद्रीय बैंक अपने वित्तीय विवरण तैयार करता है और अपनी लेखांकन नीतियां निर्धारित करता है, वह मुख्य रूप से आरबीआई अधिनियम 1934 और आरबीआई सामान्य विनियम 1949 द्वारा निर्देशित होता है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ, इस कानूनी ढांचे के अंतर्गत, ये नीतियां बदलती जरूरतों और प्रथाओं के अनुरूप विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से विवेकपूर्ण लेखांकन नीतियों ने यह सुनिश्चित किया है कि आरबीआई के पास एक मजबूत और लचीला बैलेंस शीट है, जिसमें वास्तविक इक्विटी और पुनर्मूल्यांकन शेष के रूप में जोखिम प्रावधान हैं, जो वर्तमान में क्रमशः बैलेंस शीट का 7.5 प्रतिशत और 17.4 प्रतिशत है।
डिप्टी गवर्नर ने कहा, "इसलिए, बैलेंस शीट के लगभग 25 प्रतिशत की आर्थिक पूंजी के साथ, आरबीआई मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए अपने सार्वजनिक नीतिगत आदेशों को प्रभावी ढंग से पूरा करने की मजबूत स्थिति में है।" उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय बैंक के खुलासों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, "उन्हें केंद्रीय बैंक की नीतिगत गतिविधियों और उनके वित्तीय निहितार्थों को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने के लिए पर्याप्त पारदर्शी होना चाहिए, साथ ही बाजार संवेदनशील सूचनाओं की उचित गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में प्रत्येक लेखा शीर्ष के लिए व्यापक और विस्तृत जानकारी के साथ-साथ महत्वपूर्ण लेखांकन नीतियां भी उपलब्ध कराता है। मुर्मू ने कहा कि इसके अतिरिक्त, आरबीआई की बैलेंस शीट, विदेशी मुद्रा भंडार, तरलता संचालन और आरक्षित धन घटकों और स्रोतों में बदलाव का साप्ताहिक स्नैपशॉट भी प्रकाशित किया जाता है।