RBI Annual Report: मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के नजदीक आने से बढ़ेगी मांग, खाद्य कीमतें बढ़ा सकती हैं जोखिम
आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी सालाना रिपोर्ट में कहा, खाद्य कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति संबंधी दिक्कतों जैसे विभिन्न जोखिमों के बावजूद खुदरा महंगाई के चालू वित्त वर्ष में घटकर 4.5 फीसदी पर आने की उम्मीद है। इसके तय लक्ष्य के नजदीक बढ़ने से खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग मांग में तेजी आएगी।
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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जिन्सों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित मौसमी घटनाक्रमों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, खाने-पीने की वस्तुओं और बेवरेजेज की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई पर जोखिम बना हुआ है। 2023-24 में कुल महंगाई बढ़ाने में खाद्य वस्तुओं और बेवरेजेज की हिस्सेदारी बढ़कर 60.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले 46 फीसदी थी।
आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी सालाना रिपोर्ट में कहा, खाद्य कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति संबंधी दिक्कतों जैसे विभिन्न जोखिमों के बावजूद खुदरा महंगाई के चालू वित्त वर्ष में घटकर 4.5 फीसदी पर आने की उम्मीद है। इसके तय लक्ष्य के नजदीक बढ़ने से खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग मांग में तेजी आएगी।
खुदरा महंगाई अप्रैल, 2024 में घटकर 11 माह के निचले स्तर 4.83 फीसदी पर आ गई। यह आरबीआई के 2-6 फीसदी के तय दायरे में है। हालांकि, खाद्य महंगाई 8.52% से बढ़कर 8.7 फीसदी पहुंच गई।
एमएसपी : उत्पादन लागत पर 50 फीसदी न्यूनतम मुनाफा
2023-24 के खरीफ और रबी दोनों मौसम में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ने सभी फसलों के लिए उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 फीसदी लाभ सुनिश्चित किया। खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में 5.3-10.4 फीसदी की वृद्धि की गई, जबकि रबी फसलों का एमएसपी 2.0-7.1 फीसदी बढ़ाया गया।
- खरीफ फसलों में मूंग के एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। रबी फसलों में मसूर और गेहूं के एमएसपी में सर्वाधिक बढ़ोतरी हुई।
- 31 मार्च, 2024 तक खाद्यान्नों का समग्र सार्वजनिक भंडारण कुल तिमाही भंडारण मानक का 2.9 गुना था।
- डिजिटल फ्रॉड : 709% बढ़ा डिजिटल धोखाधड़ी 708.73 फीसदी बढ़ी है। 2023-24 में कार्ड/ इंटरनेट भुगतान से जुड़े धोखाधड़ी के मामले 3,596 से बढ़कर 29,082 के स्तर पर पहुंच गए।
गोल्ड बॉन्ड : निवेशकों ने की 27,000 करोड़ खरीद
निवेशकों ने 2023-24 में 27,031 करोड़ रुपये के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदे। यह रकम 2022-23 में खरीदे गए 6,551 करोड़ रुपये की तुलना में चार गुना ज्यादा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में कुल 44.34 टन गोल्ड बॉन्ड खरीदे गए। इन्हें चार चरणों में जारी किया गया था।
- अब तक 72,274 करोड़ रुपये के 146.96 टन गोल्ड बॉन्ड के लिए आवेदन किया गया है।
- आरबीआई के पास 822.10 टन सोना है। इसमें 308.03 टन नोट के समर्थन के लिए रखा गया है।
जीडीपी को मिलेगी और गति
आरबीआई को पहली बार खाता-बही के प्रतिशत के रूप में उपलब्ध वास्तविक इक्विटी को 6.5 फीसदी के ऊपरी बैंड पर बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा है। यह झटके और ऊंची ब्याज दरों के बावजूद अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और विकास की गति को बनाए रखने में आरबीआई के विश्वास को दर्शाता है। आरबीआई से केंद्र को मिले रिकॉर्ड लाभांश का इस्तेमाल ऐसी योजनाएं शुरू करने में किया जा सकता है, जो जीडीपी को और गति दे सकती हैं। -संदीप वेंपाती, अर्थशास्त्री, भाजपा