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अर्थव्यवस्था को लगेगा झटका, वित्त वर्ष में 5.1 फीसदी रह सकती है जीडीपीः क्रिसिल

Mon, 02 Dec 2019 05:55 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 02 Dec 2019 05:55 PM IST
सार

  • 6.3 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान जताया था रेटिंग एजेंसी ने पहले
  • क्रिसिल ने कहा, आरबीआई एक बार फिर घटा सकता है रेपो रेट  

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rating agency crisil downgrade india gdp forecast from 6.3 to 5.1 percent
जीडीपी में गिरावट का लगाया अनुमान

विस्तार

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष में भारत के विकास दर के अपने अनुमान को घटाकर 5.1 फीसदी कर दिया है। इससे पहले उसने विकास दर 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। क्रिसिल ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब आरबीआई की मौद्रित नीति समिति (एमपीसी) की बैठक मंगलवार से शुरू हो रही है और केंद्रीय बैंक पांच दिसंबर को नीतिगत दरों की घोषणा कर सकता है। क्रिसिल का यह अनुमान जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा के 4.7 फीसदी के अनुमान के बाद सबसे कम है। 

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रेटिंग एजेंसी ने विकास दर का आंकड़ा आने के कुछ दिन बाद ही यह अनुमान जताया है। पिछले सप्ताह जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास दर 4.5 फीसदी रही। पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में यह 4.75 फीसदी रही थी, जो कई साल का निचला स्तर है।
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क्रिसिल ने अपनी शोध रिपोर्ट में कहा कि औद्योगिक उत्पादन, वस्तु निर्यात, बैंक कर्ज उठाव, कर संग्रह, माल ढुलाई और बिजली उत्पादन जैसे प्रमुख अल्पकाली संकेतक विकास दर में नरमी का संकेत दे रहे हैं।
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हालांकि, दूसरी छमाही में विकास दर थोड़ा बेहतर होकर 5.5 फीसदी रह सकता है। इससे पहले आरबीआई ने अक्तूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा में विकास दर अनुमान को संशोधित कर 6.9 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया था। ऐसी संभावना है कि केंद्रीय बैंक पांच दिसंबर को रेपो रेट में एक बार फिर कटौती कर सकता है। 

निकट भविष्य में नीचे रह सकती है विकास दर

उधर, डन एंड ब्रैडस्ट्रीट ने एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की विकास दर निकट भविष्य में नीचे रह सकती है क्योंकि नरमी और गहरा गई है। यह नरमी उम्मीद के विपरीत लंबे समय तक रह सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश में नरमी बनी हुई है, जिससे औद्योगिक उत्पादन में धीरे-धीरे तेजी आएगी।

इसके अलावा, हाल में आई बाढ़ और कृषि उत्पादन कम रहने से ग्रामीण क्षेत्र में मांग प्रभावित रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहन से लेकर रियल एस्टेट तक दबाव में हैं, जो कंपनियों के मुनाफे और सरकार के राजस्व संग्रह पर दिख रहा है।



डन एंड ब्रैडस्ट्रीट के मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि मंदी और गहरा गई है। भारत में घरेलू शेयर बाजार के सूचकांकों में तेजी, धीमी विकास दर, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी नीति निर्माताओं के लिए एक जटिल चुनौती है। 

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