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राज्यसभा में पास हुआ दिवालिया बिल, 330 दिनों में निपटाना होगा मामला

Mon, 29 Jul 2019 09:05 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 29 Jul 2019 09:05 PM IST
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rajya sabha passes insolvency and bankruptcy code bill, companies will get 330 days time

राज्यसभा ने सोमवार को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) से जुड़े सात संशोधनों पर अपनी मुहर लगा दी है। दिवालिया हो चुकी कंपनियों का मामला 330 दिनों में निपटाना होगा।

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फिलहाल मिलता है 270 दिन का वक्त

फिलहाल दिवालिया प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी पक्षों को 270 दिन का वक्त मिलता है। इसमें कानूनी लड़ाई और दूसरी सभी न्यायिक प्रक्रिया शामिल हैं। 330 दिन का वक्त इसलिए तय किया गया है क्योंकि कई बार प्रमोटर्स आक्रामक ढंग से अपने केस की पैरवी करते हैं और कंपनी पर अपना कंट्रोल खत्म होने से रोकना चाहते हैं। हालांकि कई मामलों में काफी वक्त लग जाता है। 

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साफ किया अधिकारों का फर्क 

संशोधन में फाइनेंशियल क्रेडिटर्स और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के अधिकारों में साफ-साफ फर्क बताया गया है। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स रेस्क्यू प्लान के पक्ष में वोट नहीं करते हैं। दिवालिया हो चुकी कंपनी की वैल्यू को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

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विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मूल कानून में किए गए संशोधनों की काफी समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि विधेयक के जरिए सात खंडों का संशोधन किया जाएगा। इनका मकसद कानून की अस्पष्टता को दूर करना है। वित्त मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। 

इससे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि बदलते भारत की भावना में हमें इस तरह के कानूनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि मूल कानून के जरिए चूककर्ताओं को कानून का सामना करना ही पड़ेगा। 

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि समाधान प्रक्रिया हो जाने के बाद किसी कंपनी या उद्यम के नये बोलीदाता या चलाने वालों पर कर अधिकारियों का कोई दबाव नहीं रहेगा क्योंकि पुराना लोन या अपराध उनका नहीं है बल्कि कंपनी चलाने वाले पुराने लोगों या व्यक्ति का है।


उन्होंने कहा कि विधायिका संविधान में प्रदत्त अधिकारों के तहत इस विधेयक के जरिए संशोधन ला रही है। उन्होंने कहा कि हम अपने अनुभवों के आधार पर समय समय पर मूल संहिता में संशोधन ला रहे हैं। 

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