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Railway: 'काम का बोझ छिपाने के लिए ड्यूटी के घंटों में किया जा रहा हेरफेर', लोको पायलट यूनियन ने लगाया आरोप

Sat, 02 Aug 2025 12:20 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 02 Aug 2025 12:20 PM IST
सार

रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी लोको पायलट को एक बार में 9 घंटे से ज्यादा और साइन-ऑन से साइन-ऑफ तक कुल मिलाकर 11 घंटे से ज्यादा काम नहीं करना है। 2021 से, रेलवे बोर्ड के सुरक्षा विभाग ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि 80 प्रतिशत ट्रिप 9 घंटे की सीमा के भीतर पूरी की जाएं। हालांकि, अब लोको पायलट यूनियन ने रेलवे जोन्स पर काम के घंटों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Railway: Loco pilots' union alleges manipulation of working hours to hide overutilisation
भारतीय रेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के रेलवे जोन्स ट्रेन चालकों के काम के घंटों में हेराफेरी कर रहे हैं। वे लोको पायलट्स के अधिक इस्तेमाल को छिपाने के लिए ऑनलाइन क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) में 12 से 16 घंटे की यात्रा के दौरान ड्यूटी ब्रेक को गलत तरीके से दर्ज कर रहे हैं। लोको पायलट यूनियन ने ये आरोप लगाए हैं।

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रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी लोको पायलट को एक बार में 9 घंटे से ज्यादा और साइन-ऑन से साइन-ऑफ तक कुल मिलाकर 11 घंटे से ज्यादा काम नहीं करना है। 2021 से, रेलवे बोर्ड के सुरक्षा विभाग ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि 80 प्रतिशत ट्रिप 9 घंटे की सीमा के भीतर पूरी की जाएं।
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रेल मंत्रालय ने पहले कहा था कि उसने न केवल लोको पायलटों की भर्ती शुरू की है, बल्कि उनके लिए कई सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं, जिनमें 900 से अधिक इंजनों में मूत्रालय की सुविधा, 7,000 से अधिक इंजनों में एयर कंडीशनिंग प्रणाली और रेल नेटवर्क में सभी 558 रनिंग रूम का उन्नयन शामिल है।
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ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने कहा है कि सुरक्षा नियम लोको पायलटों पर जरूरत से ज्यादा ड्यूटी का बोझ डालने से रोकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रेल प्रशासन 15-20 प्रतिशत कर्मचारियों की कमी की भरपाई के लिए नियमित रूप से इन नियमों का उल्लंघन कर रहा है।

एआईएलआरएसए के महासचिव अशोक कुमार राउत ने कहा, "हालांकि यह गैरकानूनी प्रथा कई डिवीजनों और जोन में हो रही है, फिर भी हमने इस मुद्दे को पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के महाप्रबंधक के समक्ष उठाना शुरू कर दिया है। हमने लोको पायलटों की कार्य स्थितियों को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों को संकलित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें गलत ट्रिप ब्रेक भी शामिल है।"

ईसीआर ने आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, राउत के अभ्यावेदन के बाद, ईसीआर के एक डिवीजन, धनबाद ने 15 जुलाई, 2025 को एक परिपत्र जारी किया, जिसमें सीएमएस में साइन-ऑन और साइन-ऑफ के बीच ड्यूटी ब्रेक की गलत प्रविष्टि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

सर्कुलर में कहा गया है, "सभी को निर्देश दिया जा रहा है कि वे सीएमएस (क्रू मैनेजमेंट सिस्टम) में पंजीकरण करते समय चालक दल के साइन-ऑन और साइन-ऑफ के बीच ड्यूटी के घंटों में हेरफेर न करें। अगर किसी क्रू लॉबी में ऐसा हो रहा है, तो इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। अगर ऐसे मामले पाए जाते हैं, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।"

राउत ने बताया कि लॉबी के अधिकारी सीएमएस में लोको पायलटों के साइन-ऑन और साइन-ऑफ का समय क्रमशः उनकी शिफ्ट शुरू और खत्म होने पर दर्ज करते हैं। हालांकि, जिन मामलों में कोई लोको पायलट 12 घंटे से ज्यादा काम करता है, वहां लॉबी में तैनात संविदा कर्मचारी कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक आदेश पर 45 मिनट से लेकर 2 घंटे तक के फर्जी ड्यूटी ब्रेक लगा देते हैं ताकि जरूरत से ज्यादा काम करने की बात छिपाई जा सके।

प्रत्येक रेलवे डिवीजन एक निश्चित प्रारूप में रेलवे बोर्ड को मासिक रूप से कर्मचारियों के कार्य घंटों का डेटा प्रस्तुत करता है। कथित तौर पर, इन ड्यूटी ब्रेक का उपयोग अत्यधिक कार्य घंटों का पता लगाने से बचने के लिए किया जाता है, जो परिचालन सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन है।

राउत ने आरोप लगाया, "सिस्टम में ड्यूटी ब्रेक डालने का यह अवैध और असुरक्षित तरीका कुछ वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे कि मुख्य ट्रैक्शन लोको कंट्रोलर और मुख्य क्रू कंट्रोलर, के मौखिक आदेश पर किया जा रहा है। रेलवे ने सीएमएस डेटा एंट्री का काम निजी कर्मियों को सौंप दिया है और ये अधिकारी उन्हें ऐसे ब्रेक डालने का निर्देश देते हैं।"

उन्होंने कहा, "मैंने लॉबी कर्मचारियों की ओर से अवैध ट्रिप ब्रेक के बारे में कुछ डिवीजनों से डेटा एकत्र किया है। मई और जून 2025 में, अकेले धनबाद डिवीजन में ऐसे 2,719 मामले थे; पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर डिवीजन में 1,883; और दानापुर डिवीजन में 785 ऐसे मामले पाए गए।" उन्होंने यह भी दावा किया कि समस्तीपुर और सोनपुर डिवीजनों ने क्रमशः 304 और 83 मामलों में कार्य घंटों में हेरफेर किया।


इस वर्ष के प्रारंभ में, अप्रैल में, दक्षिण मध्य रेलवे ने लोको पायलटों के कार्य घंटों पर सीएमएस डेटा की समीक्षा की और पाया कि सिकंदराबाद डिवीजन में 545 मामले, विजयवाड़ा में 42, गुंटकल में 26, गुंटूर और नांदेड़ में तीन-तीन, और हैदराबाद डिवीजन में एक मामले में मालगाड़ी के लोको पायलटों ने 13:55 से 14:00 बजे के बीच काम किया, लेकिन वास्तविक ड्यूटी घंटे छिपाने के लिए उन्हें गलत समय दर्ज करना पड़ा।

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