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ज्वैलरी निर्माताओं के बाद अब हड़ताल की तैयारी में रेडीमेड गारमेंट कारोबारी

Mon, 21 Mar 2016 10:59 PM IST
राजीव कुमार/अमर उजाला, दिल्ली
राजीव कुमार/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 21 Mar 2016 10:59 PM IST
सार

  • हड़ताल की वजह से कई ग्राहकों की अग्रिम राशि फंसी
  • हड़ताल की मार कारीगर पर

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Radymade garment merchants too ready to join Jewellers in strike
सुनार - फोटो : amarujala

विस्तार

जेवरात निर्माण पर एक फीसदी उत्पाद कर के विरोध में ज्वैलरी निर्माताओं की हड़ताल जारी है। मुंबई के बुलियन बाजार में सोमवार को मात्र 10 फीसदी ज्वैलर्स दुकानें खुलीं, वहीं जयपुर में 10 फीसदी से भी कम संख्या में ज्वैलरी की दुकानें खोली गईं।

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दिल्ली में सोमवार को पूरी तरह से ज्वैलरी निर्माताओं की हड़ताल रही। दिल्ली के ज्वैलरी निर्माताओं ने सोमवार शाम को वित्त मंत्री अरुण जेटली के निवास स्थान 2, कृष्ण मेनन लेन के समक्ष प्रदर्शन भी किया जहां से उन्हें गिरफ्तार करके चाणक्यपुरी थाने ले जाया गया। ज्वैलर्स की हड़ताल की वजह से हड़ताल से पूर्व ज्वैलरी के लिए अग्रिम राशि देने वाले ग्राहकों के पैसे फंस गए हैं।
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ज्वैलरी निर्माताओं का कहना है कि उत्पाद कर लगने से सरकारी इंस्पेक्टर उन्हें तबाही की हालत तक ला सकता है। शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात के बाद ज्वैलरी निर्माताओं से जुड़ी एसोसिएशन व फेडरेशन ने देर शाम हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी थी, लेकिन ज्वैलरी निर्माता सिर्फ आश्वासन के बदले हड़ताल समाप्त करने के पक्ष में नहीं थे।
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दिल्ली कूंचा महाजनी के सर्राफा व्यापारी विमल गोयल कहते हैं, 18 दिनों से सर्राफा बाजार बंद था, ऐसे में बिना किसी परिणाम के हड़ताल को समाप्त करने का कोई औचित्य नहीं। सर्राफा नेता सरकार के दबाव में आ गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार को जब 6-8 महीने के बाद वस्तु व सेवा कर लगाना है तो अभी उत्पाद कर लगाने का क्या मतलब है।

एक अन्य सर्राफा कारोबारी पवन झलानी कहते हैं, जब वर्ष 2012 में यूपीए की सरकार ने ज्वैलरी पर उत्पाद कर लगाया था तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने इसका विरोध किया था और कारोबारियों का साथ दिया था जिसकी वजह से उत्पाद कर को वापस लेना पड़ा।  

हड़ताल की मार कारीगर पर

Radymade garment merchants too ready to join Jewellers in strike
सुनार - फोटो : amarujala

बांबे बुलियन बाजार के कारोबारी सुरेश हुंडिया ने बताया कि मुंबई के 90 फीसदी ज्वैलरी कारोबारी हड़ताल पर है जबकि 10 फीसदी ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी हैं। जयपुर स्थित जेम्स व ज्वैलरी निर्यातक एवं जेम्स व ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि जयपुर में भी सोमवार दोपहर तक कमोबेश ज्वैलरी की दुकानें बंद रहीं।

उन्होंने बताया कि उत्पाद कर से ज्वैलरी निर्यात नहीं जुड़ा है, लेकिन घरेलू स्तर पर इस प्रकार की हड़ताल होने से ज्वैलरी निर्यातकों का काम भी प्रभावित होता है क्योंकि कई प्रकार के काम निर्यातक घरेलू दुकानदार से करवाते हैं। सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक हड़ताल की असली मार कारीगर पर पड़ेगी क्योंकि इनमें से अधिकतर कारीगर रोजाना स्तर पर कमाने-खाने वाले हैं।

सर्राफा कारोबारियों ने बताया कि उन्हें उत्पाद कर से दिक्कत नहीं है क्योंकि उत्पाद कर का भार वह उपभोक्ताओं पर डाल देंगे, लेकिन इसकी आड़ में उत्पाद कर इंस्पेक्टर उन्हें तबाह कर देगा।

अब गारमेंट कारोबारी हड़ताल की तैयारी में

Radymade garment merchants too ready to join Jewellers in strike
ज्वैलर हड़ताल

ज्वैलरी निर्माताओं की हड़ताल के बाद अब रेडीमेड गारमेंट निर्माता हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। आगामी वित्त वर्ष के लिए पेश बजट में 1000 रुपये से अधिक कीमत वाले गारमेंट पर एक फीसदी उत्पाद कर लगाया गया है।

दिल्ली व आसपास के गारमेंट निर्माताओं के मुताबिक दक्षिण भारत की कई जगहों पर गारमेंट पर उत्पाद कर के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और अब वे हड़ताल पर जाने का मन बना रहे हैं।

क्लोथ मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के अध्यक्ष राहुल मेहता के मुताबिक सरकार जब जल्द ही जीएसटी लागू करने जा रही है तो मात्र कुछ महीनों के लिए गारमेंट पर उत्पाद कर नहीं लगाया जाना चाहिए।

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