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टैरिफ का असर: 6 महीने में बुरी तरह प्रभावित होगा एक चौथाई कपड़ा निर्यात, कपास पर केंद्रीय फैसले से मिलेगी राहत
Fri, 29 Aug 2025 06:58 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 29 Aug 2025 06:58 AM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका भारत के कपड़ा उद्योग के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और निर्यातक ऑर्डर रद्द होने की समस्या से जूझ रहे हैं। 2024-25 में कपड़ा और परिधान क्षेत्र का आकार 179 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इसमें 142 अरब डॉलर का घरेलू बाजार और 37 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : META AI
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विस्तार
अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के कारण अगले छह महीने में भारत के कपड़ा निर्यात का करीब एक चौथाई हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका भारत के कपड़ा उद्योग के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और निर्यातक ऑर्डर रद्द होने की समस्या से जूझ रहे हैं। 2024-25 में कपड़ा और परिधान क्षेत्र का आकार 179 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इसमें 142 अरब डॉलर का घरेलू बाजार और 37 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है।
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भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने कहा, हम अगले छह महीनों में कम-से-कम 20-25 फीसदी की गिरावट की आशंका देख रहे हैं, क्योंकि निर्यात में 28 फीसदी गिरावट आ सकती है। इसमें मुख्य रूप से परिधान और मेड-अप उत्पाद शामिल हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा, 50 फीसदी टैरिफ देश के कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उच्च टैरिफ से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर गंभीर असर पड़ेगा। इससे निर्यातकों और उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान होगा।
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सेखरी ने कहा, हमारा उद्योग पहले से ही टैरिफ वृद्धि के प्रभावों का सामना कर रहा है। हम टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक बाजारों और रणनीतियों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही, कपड़ा और वाणिज्य मंत्रालय के साथ भी सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं। दोनों मंत्रालयों से सहयोग का आश्वासन मिला है।
कपास पर केंद्र के फैसले से मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का कहना है, कपास के शुल्क मुक्त आयात को तीन महीने बढ़ाने से घरेलू कपड़ा उद्योग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। चटर्जी ने कहा, हम बड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। पहले दी गई छूट से कपास के लिए दिए जाने वाले नए ऑर्डरों पर कोई लाभ नहीं मिल रहा था, क्योंकि इसे भेजने में कम से कम 45-50 दिन लगते हैं। अब अपेक्षाकृत लंबी छूट से नए ऑर्डरों पर लाभ होगा।
हीरा पॉलिश : 30 फीसदी तक घटेगी कमाई
50 फीसदी टैरिफ से देश के प्राकृतिक हीरा पॉलिश उद्योग का चालू वित्त वर्ष में राजस्व 28-30 फीसदी कम होकर 12.50 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। 2024-25 में उद्योग का राजस्व 16 अरब डॉलर था। क्रिसिल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा, पिछले तीन वित्त वर्षों में प्राकृतिक हीरों की कीमतों और बिक्री की मात्रा में 40 फीसदी की गिरावट के बाद यह झटका आया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ की वजह से अमेरिका को निर्यात करना मुश्किल हो गया है। इसके दो कारण हैं। पहला...हीरा उद्योग का मुनाफा कम होने से ये अतिरिक्त टैरिफ देना बहुत कठिन है। दूसरा...मांग घटने से इसे सीधे ग्राहक पर डालना भी आसान नहीं होगा।
जीएसटी 2.0 से कम होगा टैरिफ का असर
फिच सॉल्यूशंस की कंपनी बीएमआई का मानना है कि प्रस्तावित जीएसटी सुधार से वस्तुओं पर कर की दर कम होगी। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही, यह फैसला उपभोग को बढ़ावा देगा और टैरिफ के प्रभाव को खत्म कर सकता है।