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Anarock: रियल एस्टेट सेक्टर में निजी इक्विटी प्रवाह जुलाई-सितंबर में 15% कम हुआ, जानिए क्या है कारण

Sat, 11 Oct 2025 02:14 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 11 Oct 2025 02:14 PM IST
सार

Anarock: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच जुलाई-सितंबर में भारतीय रियल एस्टेट में निजी इक्विटी निवेश 15 प्रतिशत घटकर 81.9 करोड़ डॉलर रह गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में निजी इक्विटी (पीई) प्रवाह 96.7 करोड़ डॉलर था। एनरॉक ने इस बारे में क्या कहा है, आइए जानते हैं विस्तार से।

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Private equity inflows into the real estate sector declined by 15% in July-September, find out the reasons
रीयल एस्टेड सेक्टर - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच जुलाई-सितंबर में भारतीय रियल एस्टेट में निजी इक्विटी निवेश 15 प्रतिशत घटकर 81.9 करोड़ डॉलर रह गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में निजी इक्विटी (पीई) प्रवाह 96.7 करोड़ डॉलर था। संपत्ति सलाहकार एनारॉक ने यह दावा किया है। 

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एनारॉक की शाखा एनारॉक कैपिटल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-सितंबर अवधि में पीई निवेश पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 2.6 अरब डॉलर से 15 प्रतिशत घटकर 2.2 बिलियन डॉलर रह गया। इस वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान कुल निवेश में विदेशी पूंजी की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत रही।
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एनारॉक कैपिटल के सीईओ शोभित अग्रवाल ने कहा, "वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में मजबूत डील ने उम्मीद की एक किरण दिखाई, हालांकि यह अल्पकालिक था क्योंकि दूसरी तिमाही में गतिविधि फिर से कम हो गई। पूरे साल के आधार पर देखा जाए तो पीई गतिविधि वित्त वर्ष 2021 में देखी गई 6.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की ऊंचाई से लगातार गिरकर वित्त वर्ष 2025 में 3.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है।"
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उन्होंने कहा कि आवासीय क्षेत्र में रियल एस्टेट की बिक्री मात्रा अधिक है और इसलिए डेवलपर्स के नकदी प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अग्रवाल ने कहा, "इससे महंगे एआईएफ पर उनकी निर्भरता कम हो गई है। इसके अलावा, बेहतर व्यावसायिक गतिशीलता के कारण, बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है और वे पहले के वर्षों के विपरीत, रियल एस्टेट को ऋण देने के लिए अधिक इच्छुक हो गए हैं।"

वाणिज्यिक अचल संपत्ति के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण काफी अनिश्चितता है। इसके कारण मुद्रास्फीति बढ़ रही है, तथा अन्य वैश्विक व्यापक आर्थिक अनिश्चितताएं हैं।

अग्रवाल ने कहा, "यही कारण है कि वैश्विक निवेश प्रवाह में कमी आई है। हम इसे एक अस्थायी घटना मानते हैं क्योंकि भारत एक विकासशील बाजार बना हुआ है और उन कुछ देशों में से एक है जहाँ निवेश बढ़ सकता है। एक बार जब ये अनिश्चितताएं दूर हो जाएं और बेहतर स्पष्टता सामने आए, तो वाणिज्यिक अचल संपत्ति में पीई फंड प्रवाह में तेजी आना जारी रहेगा।"


इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों के दौरान, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कोई पीई निवेश नहीं हुआ। वहीं, खुदरा, मिश्रित उपयोग और वाणिज्यिक परिसंपत्ति वर्गों में मजबूत निवेश देखने को मिला। सलाहकार ने कहा कि चालू छमाही में होटल और डेटा केंद्रों में निवेश के प्रस्ताव आए।

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