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CMIE: जरूरी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट जल्द, सीएमआईई का दावा: प्याज के दाम 3,750 रुपये क्विंटल तक संभव
Fri, 22 Nov 2024 06:32 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 22 Nov 2024 06:32 AM IST
सार
देश में आलू, प्याज और टमाटर की बढ़ती कीमत जनता के लिए चिंता का विषय है। इसी बीच सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) का दावा सामने आया है। जिसमें बताया गया है कि ऊंची कीमतों से अब ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
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सीएमआईई का दावा: घट सकती है इन चीजों की कीमतें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जरूरी वस्तुओं की कीमतों में जल्द कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, दिसंबर अंत तक प्याज के दाम प्रति क्विंटल 3,750 रुपये तक आ सकते हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) का दावा है, ऊंची कीमतों से अब ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
सीएमआईई के मुताबिक
प्याज की थोक कीमतें जून से अक्तूबर तक 4,654 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं। 16 नवंबर को समाप्त सप्ताह में कीमतें बढ़कर 5,131 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं। जून से पहले यह 2,000 रुपये के भाव पर थी। अब इसमें गिरावट आने लगी है। प्याज की कीमतों में गिरावट दो कारण से होगी। इस माह से प्याज की आवक बढ़ने लगी है। इससे आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव कम हो सकेगा। अक्तूबर में बाजारों में प्याज की आवक एक साल पहले की तुलना में 23.8% कम थी। एक से 19 नवंबर तक प्याज की आवक एक साल पहले की तुलना में 23.2 प्रतिशत ज्यादा रही है। ब्यूरो
दाल, आलू व टमाटर के भी भाव घटने की उम्मीद
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सचिव निधि खरे के मुताबिक, सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई पहल कीं। उनमें प्रमुख रूप से दालों के मुफ्त आयात, जमाखोरी रोकने के लिए भंडारण सीमा लागू करना, रियायती दरों पर चना और मूंग दाल की खुदरा बिक्री जैसे कदम शामिल हैं। जहां प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये की दर से हो रही है। उनके मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से इन सभी वस्तुओं की कीमतें स्थिर रही हैं और अब उनमें कमी भी आ रही है। कीमतों में तेजी मुख्य रूप से मौसमी और आपूर्ति के कारण रही हैं।
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सीएमआईई के मुताबिक
प्याज की थोक कीमतें जून से अक्तूबर तक 4,654 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं। 16 नवंबर को समाप्त सप्ताह में कीमतें बढ़कर 5,131 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं। जून से पहले यह 2,000 रुपये के भाव पर थी। अब इसमें गिरावट आने लगी है। प्याज की कीमतों में गिरावट दो कारण से होगी। इस माह से प्याज की आवक बढ़ने लगी है। इससे आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव कम हो सकेगा। अक्तूबर में बाजारों में प्याज की आवक एक साल पहले की तुलना में 23.8% कम थी। एक से 19 नवंबर तक प्याज की आवक एक साल पहले की तुलना में 23.2 प्रतिशत ज्यादा रही है। ब्यूरो
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दाल, आलू व टमाटर के भी भाव घटने की उम्मीद
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सचिव निधि खरे के मुताबिक, सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई पहल कीं। उनमें प्रमुख रूप से दालों के मुफ्त आयात, जमाखोरी रोकने के लिए भंडारण सीमा लागू करना, रियायती दरों पर चना और मूंग दाल की खुदरा बिक्री जैसे कदम शामिल हैं। जहां प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये की दर से हो रही है। उनके मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से इन सभी वस्तुओं की कीमतें स्थिर रही हैं और अब उनमें कमी भी आ रही है। कीमतों में तेजी मुख्य रूप से मौसमी और आपूर्ति के कारण रही हैं।
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