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ईमानदार करदाताओं को पीएम मोदी की सौगात, आज से फेसलेस हुआ टैक्स सिस्टम

Thu, 13 Aug 2020 11:48 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 13 Aug 2020 11:48 AM IST
खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए 'पारदर्शी कराधान - ईमानदार का सम्मान' नामक एक मंच का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री कई मौकों पर ईमानदार करदाताओं की तारीफ तो करते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ईमानदार करदाताओं के लिए एक बड़ा प्रोग्राम शुरू किया है। 

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PM Narendra Modi roll out Transparent Taxation scheme that rewards top income taxpayers
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : सोशल मीडिया

लाइव अपडेट

11:47 AM, 13-Aug-2020
जो टैक्स देने में सक्षम हैं, लेकिन अभी वो टैक्स नेट में नहीं है, वो स्वप्रेरणा से आगे आएं, ये मेरा आग्रह है और उम्मीद भी। आइए, विश्वास के, अधिकारों के, दायित्वों के, प्लेटफॉर्म की भावना का सम्मान करते हुए, नए भारत, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करें।
11:47 AM, 13-Aug-2020
स्क्रूटनी का चार गुना कम होना, अपने आप में बता रहा है कि बदलाव कितना व्यापक है। बीते छह वर्षों में भारत ने कर प्रशासन और शासन का एक नया मॉडल विकसित होते देखा है। इन सारे प्रयासों के बीच बीते छह से सात साल में इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में करीब ढाई करोड़ की वृद्धि हुई है। लेकिन ये भी सही है कि 130 करोड़ के देश में ये अभी भी बहुत कम है। इतने बड़े देश में सिर्फ डेढ़ करोड़ साथी ही इनकम टैक्स जमा करते हैं।
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11:44 AM, 13-Aug-2020
वर्ष 2012-13 में जितने टैक्स रिटर्न होते थे, उसमें से 0.94 फीसदी की स्क्रूटनी होती थी। वर्ष 2018-19 में ये आंकड़ा घटकर 0.26 फीसदी पर आ गया है। यानि केस की स्क्रूटनी, करीब-करीब चार गुना कम हुई है।
11:44 AM, 13-Aug-2020
अब टैक्सपेयर को उचित, विनम्र और तर्कसंगत व्यवहार का भरोसा दिया गया है। यानि आयकर विभाग को अब टैक्सपेयर के गौरव का, संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा। अब टैक्सपेयर की बात पर विश्वास करना होगा, डिपार्टमेंट उसको बिना किसी आधार के ही शक की नजर से नहीं देख सकता।
11:43 AM, 13-Aug-2020
अभी तक होता ये है कि जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर का टैक्स डिपार्टमेंट हमारी टैक्स से जुड़ी सभी बातों को हैंडल करता है। स्क्रूटनी हो, नोटिस हो, सर्वे हो या फिर जब्ती हो, इसमें उसी शहर के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की, आयकर अधिकारी की मुख्य भूमिका रहती है। टैक्सपेयर्स चार्टर भी देश की विकास यात्रा में बहुत बड़ा कदम है।
11:39 AM, 13-Aug-2020
कोशिश ये है कि हमारी टैक्स प्रणाली सीमलेस हो, पेनलेस हो, फेसलेस हो। सीमलेस यानि टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन, हर टैक्सपेयर को उलझाने के बजाय समस्या को सुलझाने के लिए काम करे। पेनलेस यानि टेक्नोलॉजी से लेकर रूल्स तक सबकुछ आसान हो।
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11:39 AM, 13-Aug-2020
अब हाईकोर्ट में एक करोड़ रुपये तक के और सुप्रीम कोर्ट में दो करोड़ रुपये तक के केस की सीमा तय की गई है। 'विवाद से विश्वास' जैसी योजना से कोशिश ये है कि ज्यादातर मामले कोर्ट से बाहर ही सुलझ जाएं। प्रक्रियाओं की जटिलताओं के साथ-साथ देश में टैक्स भी कम किया गया है। पांच लाख रुपये की आय पर अब टैक्स जीरो है। बाकी स्लैब में भी टैक्स कम हुआ है। कॉरपोरेट टैक्स के मामले में हम दुनिया में सबसे कम टैक्स लेने वाले देशों में से एक हैं।
11:39 AM, 13-Aug-2020
भारत के टैक्स सिस्टम में फंडामेंटल और स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स की जरूरत इसलिए थी क्योंकि हमारा आज का ये सिस्टम गुलामी के कालखंड में बना और फिर धीरे-धीरे विकसित हुआ। जहां जटिलता होती है, वहां अनुपालन भी मुश्किल होता है। कम से कम कानून हो, जो कानून हो वो बहुत स्पष्ट हो तो टैक्सपेयर भी खुश रहता है और देश भी। बीते कुछ समय से यही काम किया जा रहा है। अब जैसे, दर्जनों टैक्स की जगह जीएसटी आ गया।
11:37 AM, 13-Aug-2020
हमारे लिए रिफॉर्म का मतलब है, रिफॉर्म नीति आधारित हो, टुकड़ों में नहीं हो, Hollistic हो और एक रिफॉर्म, दूसरे रिफॉर्म का आधार बने, नए रिफॉर्म का मार्ग बनाए और ऐसा भी नहीं है कि एक बार रिफॉर्म करके रुक गए। ये निरंतर, सतत चलने वाली प्रक्रिया है।
11:35 AM, 13-Aug-2020
एक दौर था जब हमारे यहां रिफॉर्म्स की बहुत बातें होती थीं। कभी मजबूरी में कुछ फैसले लिए जाते थे, कभी दबाव में कुछ फैसले हो जाते थे, तो उन्हें रिफॉर्म कह दिया जाता था। इस कारण इच्छित परिणाम नहीं मिलते थे। अब ये सोच और अप्रोच, दोनों बदल गई है।
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