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Bank Deposit Insurance Scheme: पीएम मोदी बोले- 'हो सकता है कि किसी की गलती से बैंक डूबे, लेकिन अब किसी जमाकर्ता का पैसा नहीं डूबेगा'
Sun, 12 Dec 2021 12:58 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sun, 12 Dec 2021 12:58 PM IST
सार
बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर को एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है। बैंक सुधार के क्षेत्र में यह बड़ा कदम है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बैंकों में जमा ग्राहकों के पैसे अब पूरी तरह सुरक्षित हैं। अगर कोई बैंक डूबता भी है, तो तीन महीने के भीतर जमाकर्ता का पैसा वापस मिल जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बैंक ग्राहकों को ये भरोसा दिलाते हुए कहा कि 98 प्रतिशत बैंक खाते पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमारी सरकार का पहला लक्ष्य उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा है।
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‘जमाकर्ता सबसे पहले’ कार्यक्रम में शामिल प्रधानमंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र मेें किए गए सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले सात साल में हमने बैंकिंग क्षेत्र और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाया है। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (संशोधित) बिल के जरिये जमाकर्ताओं की बीमित राशि का दायरा एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया।
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अब बैंक डूबने या दिवालिया होने की स्थिति में ग्राहकों को पांच लाख रुपये का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाता है। यह राशि तीन महीने के भीतर ग्राहक के खाते में आ जाती है। पहले ग्राहकों को महज एक लाख रुपये दिए जाते थे। योजना के तहत 98.1 फीसदी खातों को बीमा कवर मिल रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 80 फीसदी ही है।
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तीन लाख ग्राहकों को भुगतान जल्द
प्रधानमंत्री ने कहा, योजना लागू होने के बाद से अब तक एक लाख ग्राहकों को 1,300 करोड़ रुपये भुगतान किया जा चुका है। आरबीआई के मोरेटोरियम में चल रहे संकटग्रस्त बैंकों से जुड़े तीन लाख और ग्राहकों को जल्द बीमा राशि का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैंक किसी भी राष्ट्र की उन्नति में अहम भूमिका निभाते हैं और बैंकों की वृद्धि जमाकर्ताओं पर निर्भर रहती है। लिहाजा हमें जमाकर्ताओं की सुरक्षा सबसे पहले करनी होगी।
सिर्फ पैसा नहीं पूरी जिंदगी फंस जाती थी
एक समय था जब कोई बैंक संकट में आ जाता था, तब जमाकर्ताओं को अपना ही पैसा पाने में नाकोदम निकल जाता था और चारों तरफ हाहाकार मच जाता था। कोई भी व्यक्ति बहुत विश्वास के साथ बैंक में पैसा जमा कराता है। खासकर फिक्स सैलरी वाले लोग हैं। लेकिन गलत नीतियों के कारण जब बैंक डूबता है तब इन परिवारों का सिर्फ पैसा नहीं पूरी जिंदगी ही फंस जाती थी। लेकिन अब तीन महीने के अंदर जमाकर्ता को पैसा मिलेगा। यह कानून के दायरे में आ चुका है।
इस योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदशों के सभी सहकारी बैंकों के जमा खाते भी आते हैं। इसमें डिपॉजिट इंश्योरेंस के तहत जमा खाते, फिक्सड डिपॉजिट, चालू खाते और रेकरिंग डिपॉजिट भी आते हैं।
पांच लाख किया गया बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर
बैंक सुधार की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए बैँक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर को पांच लाख रुपये कर दिया गया है। पहले यह एक लाख रुपये ही था। इसके तहत बैंक के डूबने पर अब पांच लाख रुपये मिलते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर पूर्ण रूप से संरक्षित खातों की संख्या 98.1 प्रतिशत पहुंच गई थी।
सभी तरह के खातों का बीमा
डिपॉजिट इंश्योरेंस का लाभ सभी तरह के जमा खातों बचत, एफडी, चालू खाते और रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलता है। इसके तहत वाणिज्यिक बैंकों के साथ राज्य, केंद्र व प्राथमिक सहकारी बैंकों के जमाकर्ता भी आते हैं।
ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने में सावधानी बरतें : दास
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंक जमाकर्ताओं को सावधान करते हुए कहा कि ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने में सावधानी बरतनी होगी। कार्यक्रम में उन्होंने कहा, मेरा अनुभव बताता है कि ज्यादा रिटर्न के पीछे जोखिम भी अधिक रहता है। अगर कोई बैंक आपकी जमाओं पर ज्यादा ब्याज की पेशकश कर रहा है, तो उसके पीछे जोखिम भी छिपा होगा। लिहाजा ग्राहकों को अपना पैसा जमा करते समय जोखिम का आकलन करना होगा। रिजर्व बैंक पूरे बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती के लिए लगातार काम कर रहा है, लेकिन यह सभी के सहयोग से ही संभव होगा।
मुख्यमंत्री रहते मोदी ने उठाई थी मांग : गोयल
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान ही नरेंद्र मोदी ने बैंक जमाकर्ताओं की बीमा राशि बढ़ाकर 5 लाख करने की सिफारिश की थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था।
हालांकि, यूपीए सरकार ने इस पर कदम नहीं उठाया और आखिरकार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने ही इसे लागू किया। पहले एक लाख रुपये मिलने में 10 साल लग जाते थे, अब पांच लाख का भुगतान 90 दिन में हो जाता है। इतना ही नहीं देश में कुल 252.6 करोड़ जमा खाते हैं, जिनमें से 247.8 करोड़ खातों में पांच लाख से कम राशि है। ऐसे में बैंक डूबने या नुकसान की स्थिति में इन जमाकर्ताओं को तो पूरा पैसा वापस मिल जाएगा।