CPSE: 'सिर्फ देश नहीं, दुनिया में करें मुकाबला'; पीएमओ के अधिकारी ने सरकारी कंपनियों को दी यह सलाह
CPSE Global Ambitions: पीएमओ के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने सरकारी कंपनियों को दिया 'ग्लोबल' मंत्र। उन्होंने कहा है कि एफटीए के दौर में अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए। पढ़ें 'दक्ष' (DAKSH) प्रोग्राम और रणनीतिक क्षेत्रों पर सरकार का पूरा विजन।
विस्तार
भारत की आर्थिक कूटनीति अब मुक्त व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों के जरिए वैश्विक एकीकरण की ओर बढ़ रही है। इस बदलते परिदृश्य में, केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) को साफ-साफ संदेश दिया है कि उन्हें अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने शुक्रवार को सरकारी कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व को यह सलाह दी।
प्रतिस्पर्धा और दक्षता का नया दौर
नई दिल्ली में आयोजित 'दक्ष' (DAKSH) नेतृत्व विकास कार्यक्रम के दूसरे बैच के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीके मिश्रा ने कहा कि वैश्वीकरण और आर्थिक सुधारों ने घरेलू और वैश्विक परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब 'सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र' की बहस पुरानी हो चुकी है। अब फोकस पूरी तरह से दक्षता , नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता पर है। मिश्रा ने जोर देकर कहा, "जैसे-जैसे भारत मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अपने संबंधों को गहरा कर रहा है, सीपीएसई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।
रणनीतिक क्षेत्रों में सीपीएसई की भूमिका अहम
पीके मिश्रा ने 2021 की सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति का हवाला देते हुए याद दिलाया कि भले ही निजी क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, लेकिन ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचा और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सरकारी कंपनियां अब भी अनिवार्य हैं। इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय हित, स्थिरता और लचीलापन सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार हमेशा सही नहीं होते, और ऐसे में सार्वजनिक उपक्रम 'संतुलन' बनाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तकनीक और नवाचार: भविष्य की चाबी
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने तकनीकी बदलावों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीपीएसई को साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जा संक्रमण) जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व करना चाहिए। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और यूपीआई (यूपीआई) की वैश्विक सफलता का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकारी कंपनियों से तकनीक-उन्मुख बनने का आह्वान किया।
क्या है 'दक्ष' प्रोग्राम?
यह कार्यक्रम सीपीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक प्रमुख नेतृत्व विकास पहल है, जिसे 'मिशन कर्मयोगी' के तहत क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) और स्कोप (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।
- संरचना: यह 12 महीने का एक परिवर्तनकारी सफर है, जिसमें डिजिटल लर्निंग, क्लासरूम टीचिंग और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर शामिल है।
- प्रतिभागी: सीबीसी की सदस्य अलका मित्तल ने बताया कि पहले बैच में 73 अधिकारी प्रशिक्षित हुए थे, जबकि दूसरे बैच में 72 प्रतिभागी शामिल हैं। ये ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, खनन और विनिर्माण जैसे विविध क्षेत्रों से आते हैं।
- उद्देश्य: स्कोप के महानिदेशक अतुल सोबती के अनुसार, यह कार्यक्रम नेताओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को बदलने और तैयार करने का अवसर देगा।
सरकार का यह रुख बताता है कि विनिवेश और निजीकरण की चर्चाओं के बीच, रणनीतिक क्षेत्रों में सरकारी कंपनियों को न केवल बनाए रखा जाएगा, बल्कि उन्हें वैश्विक दिग्गजों के साथ मुकाबला करने के लिए आधुनिक और सक्षम बनाया जाएगा।