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दिल्ली में 78 के पार हुआ पेट्रोल, लगातार 15 दिन से बढ़ रहे हैं दाम

Mon, 28 May 2018 12:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 28 May 2018 12:34 PM IST
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petrol diesel prices rise on 15 consecutive day

देश भर में लगातार 15वें दिन पेट्रोल-डीजल के दामों में तेजी बनी रही है। सोमवार को जहां दिल्ली में पेट्रोल 78 रुपये के पार हो गया, वहीं मुंबई में यह 86 रुपये के करीब पहुंच गया है। पेट्रोल-डीजल के दामों में यह बढ़ोतरी वैट, एक्साइज ड्यूटी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से लगी हुई है। 

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चार महानगरों में यह है दाम
कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 80.76 रुपये, दिल्ली में 78.12 रुपये, मुंबई में 85.93 रुपये और चेन्नई में 81.11 रुपये है। देश के प्रमुख शहरों की बात करें तो फिर पंजाब के जालंधर में पेट्रोल 83.88 रुपये, पटना में 83.59 रुपये और हैदराबाद में 82.76 रुपये है। जनता ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर संज्ञान ले और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंदर ले आए।
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74 रुपये के करीब पहुंचा डीजल
डीजल की कीमतें दिल्ली में 69.17 रुपये, कोलकाता में 71.72 रुपये, मुंबई में 73.64 रुपये और चेन्नई में 73.03 रुपये होंगी। राज्यों द्वारा लगाई जाने वाली लेवीज के कारण राज्यों मे कीमतें अलग-अलग होती हैं।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ईंधन की बढ़ती कीमतों को संकट की स्थिति मान रही है। उन्होंने बताया कि सिर्फ उत्पाद शुल्क घटाने पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। सरकार कीमतों को कम करने के लिए इस सप्ताह एकसाथ कई कदम उठाएगी। वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय इस पर मंथन कर रहे हैं।

सिर्फ उत्पाद शुल्क में कटौती करने पर नहीं रहा जाएगा निर्भर

petrol diesel prices rise on 15 consecutive day

सरकार ने नवंबर, 2014 और जनवरी, 2016 के बीच नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया है, जबकि एक बार 2 रुपये प्रति लीटर कमी की गई। नौ बार में पेट्रोल पर 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाने से सरकार को 2.42 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई। इस दौरान सरकार ने सभी राज्यों से वैट कम करने को कहा, लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने ही कमी की। 

कैसे घटेंगी कीमतें
केंद्र व राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अंकुश के लिए एक साथ कई कदम उठाने होंगे। केंद्र को जहां उत्पाद शुल्क में कटौती करनी होगी, वहीं राज्यों को वैट घटाना होगा। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने का लाभ सिर्फ उन्हीं राज्यों को मिलेगा, जहां वैट की दर काफी ज्यादा है। जिन राज्यों में वैट 20 फीसदी के आसपास है, वहां जीएसटी की उच्चतम दर 28 फीसदी लागू करने से नुकसान होगा।

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