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महंगाई की मार : उच्चतम स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम, लेकिन कंपनियों को हो रहा नुकसान, जानिए कैसे
Fri, 19 Mar 2021 01:53 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Fri, 19 Mar 2021 01:53 PM IST
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उच्चतम स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम, लेकिन कंपनियों को हो रहा नुकसान
- फोटो : iStock
पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। आज भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम उच्चतम स्तर पर है। कुछ राज्यों में कई वजहों से पेट्रोल की कीमत अब 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। आम लोग और विपक्ष इसका विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उच्च टैक्स की वजह से देश में तेल की कीमत अधिक है। हालांकि सरकारी देश में आज लगातर 20वें कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। तेल कंपनियों का कहना है कि कीमतें नहीं बदलने की वजह से उन्हें एक लीटर पेट्रोल पर चार रुपये का और एक लीटर डीजल पर दो रुपये का नुकसान हो रहा है
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इसलिए हो रहा नुकसान
ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले 20 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। लेकिन विधानसभा चुनावों के चलते घरेली बाजार में कीमत नहीं बढ़ाई गई। 26 फरवरी को कच्चे तेल की कीमतें 64.68 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बुधवार को 68.42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसके अतिरिक्त डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होकर 72.57 के स्तर पर आ गया है। अगर तेल की कीमतों में बदलाव जारी रहता तो मुंबई में पेट्रोल की कीमत अब तक 103 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती। साथ ही देश के कई अन्य शहरों में भी यह 100 रुपये के पार चली जाती।
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इस संदर्भ में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तेल कंपनियां 15 दिन के रोलिंग एवरेज को ध्यान में रखते हुए कच्चे तेल की कीमत तय करती हैं। रिफाइनर्स के लिए यह एवरेज अब बढ़ गया है। भारतीय बास्केट ब्रेंट क्रूड के हिसाब से चलता है। बुधवार से इसमें कुछ गिरावट आई थी।
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तेल से कितनी जेब भर रही है सरकार?
हाल ही में सरकार ने लोकसभा में कहा कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी, सेस और सरचार्ज से मोटी कमाई होती है। सरकार ने यह स्वीकार किया था कि छह मई 2020 के बाद से एक लीटर पेट्रोल से 33 रुपये का मुनाफा हो रहा है। वहीं एक लीटर डीजल से सरकार को 32 रुपये की कमाई हो रही है। जबकि मार्च 2020 से पांच मई 2020 के बीच उसकी ये आय क्रमशः 23 रुपये और 19 रुपये प्रति लीटर थी। एक जनवरी 2020 से 13 मार्च 2020 तक एक लीटर पेट्रोल और डीजल से सरकार को क्रमश: 20 रुपये और 16 रुपये मिले। यानी एक जनवरी 2020 से तुलना करें, तो सरकार की आय प्रति लीटर पेट्रोल से 13 रुपये और डीजल से 16 रुपये बढ़ी है। ऐसे में अब तेल की कीमतों में भारी टैक्स में कटौती की मांग उठ रही है।
सरकार का तर्क
इससे पहले पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार को बैठकर बात करनी होगी क्योंकि तेल पर दोनों सरकारों द्वारा टैक्स वसूला जाता है। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार को पेट्रोलियम पर राजस्व प्राप्त होता है, तो इसका करीब 41 फीसदी हिस्सा राज्यों के पास जाता है।