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PPBL: 'संदिग्ध लेनदेन का पता लगाने व रिपोर्ट करने में नाकाम रहा पीपीबीएल', FIU ने अपने आदेश में कही यह बात
Tue, 05 Mar 2024 06:59 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 05 Mar 2024 06:59 PM IST
सार
PPBL: पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) को भारतीय रिजर्व बैंक (पीपीबीएल) द्वारा 29 फरवरी से ग्राहकों से ताजा जमा स्वीकार न करने का निर्देश दिए जाने के बाद से कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बाद में इस तारीख को बढ़ाकर 15 मार्च कर दिया गया।
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पेटीएम पेमेंट्स बैंक
- फोटो : Social Media
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विस्तार
पेटीएम पेमेंट्स बैंक धनशोधन रोधी कानून के तहत संदिग्ध लेनदेन का पता लगाने और उसकी रिपोर्ट करने के लिए कोई आंतरिक तंत्र स्थापित करने में विफल रहा इसके साथ ही वह अपनी भुगतान सेवा की जांच पड़ताल करने में असफल रहा। ये बातें एफआईयू (Financial Intelligence Unit) ने अपने उस आदेश में कही है जिसके जरिए पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर 5.49 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
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संघीय वित्तीय खुफिया जानकारी एकत्र करने वाली एजेंसी ने अपने 1 मार्च के आदेश में कहा कि बैंक के खिलाफ ये आरोप चार साल से अधिक की जांच और 14 फरवरी, 2022 को इसके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस के बाद "प्रमाणित" हुए थे।
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वित्त मंत्रालय द्वारा एफआईयू की कार्रवाई पर एक प्रेस बयान जारी करने के बाद, पेटीएम पेमेंट्स बैंक के प्रवक्ता ने कहा था कि जुर्माना एक व्यापार खंड के भीतर मुद्दों से संबंधित है जिसे दो साल पहले बंद कर दिया गया था। प्रवक्ता ने कहा, ''इस अवधि के बाद हमने अपनी निगरानी प्रणाली और रिपोर्टिंग तंत्र को वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) के लिहाज से बढ़ाया है।"
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पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) को भारतीय रिजर्व बैंक (पीपीबीएल) द्वारा 29 फरवरी से ग्राहकों से ताजा जमा स्वीकार न करने का निर्देश दिए जाने के बाद से कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बाद में इस तारीख को बढ़ाकर 15 मार्च कर दिया गया।
इसके बाद विजय शेखर शर्मा ने पीपीबीएल के अंशकालिक गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पद छोड़ दिया और बैंक के बोर्ड का पुनर्गठन किया गया। पीटीआई के अनुसार एफआईयू के आदेश में कहा गया है कि संकटग्रस्त पेटीएम इकाई के खिलाफ कार्यवाही 2020 में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा "एक विदेशी सिंडिकेट के तहत कई व्यवसायों द्वारा की गई व्यापक अवैध गतिविधि" और बाद में हैदराबाद पुलिस की साइबर अपराध इकाई द्वारा आईपीसी और तेलंगाना राज्य जुआ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के संदर्भ में शुरू हुई थी।