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Panipat carpet: पानीपत कालीन की विदेश में मांग, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में बने पहली पसंद

Mon, 03 Apr 2023 05:57 AM IST
Jeet Kumar संदीप सिंह, पानीपत।
संदीप सिंह, पानीपत। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 03 Apr 2023 05:57 AM IST
सार

देश में कालीन उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश के भदोही को प्रमुख रूप से जाना जाता है। लेकिन, अब पानीपत ने उसकी बराबरी कर ली है। पानीपत में कालीन बनाने की 140-150 फैक्टरियां हैं।

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Panipat carpet demand abroad, export 7000 crores
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धागे और टेक्सटाइल के बाद अब पानीपत कालीन उद्योग का भी हब बन चुका है। यहां के तैयार कालीन यूरोपीय देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अरब देशों की पहली पसंद बन चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, पानीपत से हर साल 7,000 करोड़ का कालीन निर्यात होता है। खास बात यह है कि पानीपत के अधिकतर कालीन हाथ से तैयार किए जाते हैं। इसलिए, महंगा होने के बावजूद इसकी मांग काफी ज्यादा है।

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देश में कालीन उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश के भदोही को प्रमुख रूप से जाना जाता है। लेकिन, अब पानीपत ने उसकी बराबरी कर ली है। पानीपत में कालीन बनाने की 140-150 फैक्टरियां हैं। पिछले पांच साल में यहां का कारपेट मार्केट करीब 1,500 करोड़ तक बढ़ा है।
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कई बार ऑर्डर भी पूरे नहीं होते
-स्थानीय उद्यमियों ने कहा, सरकार के सहयोग के बिना ही उन्होंने बेल्जियम और जर्मनी की मशीनों की मदद से उपलब्धि हासिल की है।
-इससे कम समय में अधिक उत्पादन होता है। इसके बावजूद कई बार तो कालीन की बढ़ती मांग के कारण ऑर्डर भी पूरे नहीं हो पाते।

बेहतर कौशल के लिए खुले इंस्टीट्यूट
कालीन मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के सचिव अनिल मित्तल ने बताया, पानीपत में कारपेट स्किल विकसित करने के लिए इंस्टीट्यूट होना चाहिए ताकि उन्हें बेहतर कामगार मिल सकें। भदोही में ऐसा इंस्टीट्यूट खोला गया है। उन्होंने बताया कि उद्यमियों के अथक प्रयासों से पानीपत का कालीन कारोबार 7,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जो भदोही के बराबर है।
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चीन और तुर्किये को पीछे छोड़ जल्द निकलेंगे आगे
पानीपत अंतरराष्ट्रीय मार्केट में अब चीन और तुर्किये को पीछे छोड़ने की दिशा में अग्रसर है। दरअसल, तुर्किये के कालीन मार्केट में आने से पहले भारतीय कारपेट कारोबार को सिर्फ चीन से ही चुनौती मिलती थी। अब तुर्किये में मशीन से बन रहे सस्ते कालीन मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। यहां बेल्जियम और जर्मनी की बनी मशीनों से कालीन बनाया जा रहा है। इससे कम समय में अधिक उत्पादन होता है। इसके साथ ही कई तरह के डिजाइन प्रॉसेस होते हैं।

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