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153 के स्तर पर पहुंचा पाकिस्तानी रुपया, केंद्रीय बैंक ने बढ़ा दी लोन की ब्याज दर

Tue, 21 May 2019 04:54 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Tue, 21 May 2019 04:54 PM IST
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pakistani rupee climbs to 153 against usa dollar, sbp rises repo rate to 12.5 percent

पाकिस्तान की मुश्किलें वित्तीय मोर्चे पर कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को जहां एक तरफ पाकिस्तानी रुपया अपने अभी तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है, वहीं केंद्रीय बैंक ने भी अपनी ब्याज दरों में 150 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर दिया है। इन दोनों से ही लोगों की परेशानी काफी बढ़ने वाली है। 

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153 पर पाकिस्तानी रुपया

पाकिस्तान में मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 153 के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि यह मुद्रा बाजार में 152 के स्तर पर है। इस साल की शुरुआत से लेकर के अभी तक पाकिस्तानी रुपया 21 फीसदी टूट चुका है। 

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एशिया की सबसे खराब करेंसी

हाल ही में ब्लूमबर्ग ने पाकिस्तानी रुपये को एशिया की सबसे खराब करेंसी घोषित किया था। इससे मुल्क में महंगाई अपने चरम स्तर पर पहुंचेगी, जिससे लोगों की जिंदगी में परेशानी काफी बढ़ जाएगी। अभी रमजान के महीने में भी लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। 

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रेपो रेट में 150 बेसिस प्वाइंट का इजाफा

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक-- स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी)-- ने रेपो रेट में 150 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर दिया है। अब रेपो रेट 12.25 फीसदी हो गया है, जिसके बाद बैंकों से कर्ज लेना भी और महंगा हो जाएगा। 


बैंक ने यह बढ़ोतरी मौजूदा महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए की है। एसबीपी के नए गवर्नर रेजा बाकिर की नियुक्ति के बाद यह रेपो रेट तय किया गया है। मार्च के महीने में महंगाई दर 9.41 फीसदी पर पहुंच गई थी, जोकि अप्रैल में घटकर 8.8 फीसदी पर आ गई थी। बैंक का अनुमान की है इस वित्त वर्ष में महंगाई दर का औसत 6.5 फीसदी से लेकर 7.5 फीसदी रहेगा। 

दक्षिण एशिया का ये देश बीते एक साल से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस दौरान उसका विदेशी मुद्रा भंडार कम होकर दो महीने के आयात से भी कम रह गया है।

पिछले साल सत्ता में आए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर विपक्ष फंड के लिए कोशिशों में देरी करने का आरोप लगाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि पद संभालने के बाद उन्होंने फंड के लिए बातचीत में नौ महीने से भी ज्यादा का वक्त लगा दिया। दरअसल, उन्हें उम्मीद थी कि सऊदी अरब, संयुक्त राष्ट्र अमीरात और चीन जैसे सहयोगियों से पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिल सकती है।


हालांकि, तीनों देशों की ओर से मुद्रा भंडार बढ़ाने में समर्थन के बावजूद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संभल नहीं सकी। इसके बाद पिछले महीने ही वित्त मंत्री असद उमर ने इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह अब्दुल हाफीज शेख ने ले ली। 

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