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ग्लोबल सिटीज इंडेक्स: दुनिया के उभरते टॉप-100 शहरों में 55 भारतीय, छोटे शहरों का भी दबदबा
Tue, 22 Sep 2026 07:07 AM IST
राकेश कुमार
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 22 Sep 2026 07:07 AM IST
सार
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के उभरते शीर्ष-100 शहरों में 55 भारतीय शहर शामिल हैं। शीर्ष-50 में भी 23 भारतीय शहर हैं। 2050 तक दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन सकती है, जिसकी आर्थिक क्षमता 2 खरब डॉलर से अधिक होगी। हालांकि, जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और आय असमानता के कारण कोई भारतीय शहर समग्र टॉप-250 में नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय शहर दुनिया के सबसे मजबूत शहरी विकास केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था होगी जिसकी आर्थिक क्षमता 2 खरब डॉलर (191.55 लाख करोड़) से ज्यादा हो सकती है। अगले 24 वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए इंजन यानी उभरते शहरों की बात करें तो टॉप-100 में 55 और टॉप-50 में 23 भारतीय शहरों ने जगह बनाई है। इसमें कई छोटे शहर भी शामिल हैं। हालांकि, पांच पैमानों पर तैयार समग्र वैश्विक सूचकांक में शामिल 1000 शहरों में कोई भारतीय शहर शीर्ष 250 में नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-मुंबई जैसे महानगर आबादी के मामले में सबसे आगे होंगे। इसमें दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद और कोलकाता को विकासशील महानगर की श्रेणी में रखा गया है जबकि आगरा, अहमदाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, पुणे, सूरत, वडोदरा, नागपुर आदि उभरते सितारे की सूची में शामिल हैं।
वैश्विक सूचकांक में यूपी के सबसे ज्यादा शहर
वैश्विक सूचकांक में यूपी के सबसे ज्यादा 15 शहरों को जगह मिली है लेकिन इनमें से कोई भी शीर्ष-700 में जगह नहीं बना सका। सबसे ऊपर लखनऊ रहा। वहीं, पंजाब के तीन शहरों को जगह मिली, जबकि हिमाचल प्रदेश का कोई भी शहर इसमें जगह नहीं बना सका है।
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चंडीगढ़ को 558वां स्थान
चंडीगढ़ ने 558वां स्थान हासिल किया। इसने अर्थव्यवस्था में 307, मानव पूंजी में 474, जीवन की गुणवत्ता में 871, पर्यावरण में 750, गवर्नेंस में 415 का स्कोर हासिल किया।
औद्योगिक अर्थव्यवस्था के दम पर लुधियाना पंजाब में सबसे मजबूत है, लेकिन पर्यावरण के मोर्चे पर पीछे है।
प्रयागराज में यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था (735), मानव पूंजी (744), गुणवत्तापूर्ण जीवन (837), पर्यावरण (813) और मेरठ में क्रमश: 761, 742, 893 व 871 रहा।
नई एआई सिटी से बढ़ेगा बंगलूरू का रुतबा
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों में शहर की जनसंख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है, और 2000 से जीडीपी में औसतन करीब 10% सालाना वृद्धि दर्ज हुई है। प्रस्तावित नई एआई सिटी का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि शहर बीपीओ से आगे बढ़कर आरएंडडी और डीप टेक और एआई सेवाओं का केंद्र बनेगा।
दिल्ली 49 पायदान चढ़ेगी ऊपर : अगले 24 वर्षों में दिल्ली 49 पायदान ऊपर चढ़ जाएगी। अभी वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष-100 से बाहर रहने वाली दिल्ली (268वां स्थान) आने वाले दशकों में सबसे तेज जीडीपी विकास दर दिखाने वाले शहरों में शुमार हो जाएगी। वर्ष 2050 तक दिल्ली और मुंबई दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाला महानगर भी बन जाएंगे।
उत्तराखंड
देहरादून 632वां स्थान
देहरादून ने मानव पूंजी में 479 स्कोर किया। पहाड़ी राज्य पर्यावरण (614) और जीवन की गुणवत्ता (879) स्थान पर पिछड़ा हुआ है। हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की जैसे शहरों का सूची में न होना दर्शाता है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक राजधानी तक सीमित हैं। गुरुग्राम-फरीदाबाद को एनसीआर शहरों में गिना गया। इसलिए 1,000 शहरों की सूची में शामिल नहीं किया गया।
जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण और आय असमानता से पिछड़े
यद्यपि मानव पूंजी और आर्थिक विकास में भारतीय शहरों का प्रदर्शन अच्छा रहा है लेकिन जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और आय असमानता जैसे मापदंडों में कम स्कोर मिलने के कारण समग्र रैंकिंग में कोई भी शहर टॉप-100 या 250 में जगह नहीं बना पाता।
अर्थव्यवस्था 30% मानवपूंजी 25% जीवन की गुणवत्ता 25% पर्यावरण 10% गवर्नेंस 10%
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रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-मुंबई जैसे महानगर आबादी के मामले में सबसे आगे होंगे। इसमें दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद और कोलकाता को विकासशील महानगर की श्रेणी में रखा गया है जबकि आगरा, अहमदाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, पुणे, सूरत, वडोदरा, नागपुर आदि उभरते सितारे की सूची में शामिल हैं।
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वैश्विक सूचकांक में यूपी के सबसे ज्यादा शहर
वैश्विक सूचकांक में यूपी के सबसे ज्यादा 15 शहरों को जगह मिली है लेकिन इनमें से कोई भी शीर्ष-700 में जगह नहीं बना सका। सबसे ऊपर लखनऊ रहा। वहीं, पंजाब के तीन शहरों को जगह मिली, जबकि हिमाचल प्रदेश का कोई भी शहर इसमें जगह नहीं बना सका है।
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उत्तर प्रदेश |
स्थान |
|---|---|
| लखनऊ | 725 |
| मुरादाबाद | 745 |
| प्रयागराज | 764 |
| बरेली | 784 |
| अलीगढ़ | 804 |
| गोरखपुर | 821 |
| मेरठ | 827 |
| वाराणसी | 832 |
| आगरा | 861 |
| सहारनपुर | 872 |
| फैजाबाद | 891 |
| कानपुर | 899 |
| हरदोई | 908 |
| शाहजहांपुर | 953 |
| सुल्तानपुर | 999 |
- धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व के बावजूद वाराणसी का पर्यावरण रैंक (952) पूरे भारतीय शहरों में सबसे कमजोर है।
- लखनऊ ने सबसे अच्छा स्कोर मानव पूंजी (493) में किया। गवर्नेंस के मामले में यूपी के सभी शहरों का स्कोर 415 रहा।
- मुरादाबाद का स्कोर अर्थव्यवस्था में 698, मानव पूंजी में 694, जीवन की गुणवत्ता में 833 और पर्यावरण में 831 रहा।
चंडीगढ़ को 558वां स्थान
चंडीगढ़ ने 558वां स्थान हासिल किया। इसने अर्थव्यवस्था में 307, मानव पूंजी में 474, जीवन की गुणवत्ता में 871, पर्यावरण में 750, गवर्नेंस में 415 का स्कोर हासिल किया।
| पंजाब | स्थान |
|---|---|
| लुधियाना | 611 |
| जालंधर | 706 |
| अमृतसर | 747 |
औद्योगिक अर्थव्यवस्था के दम पर लुधियाना पंजाब में सबसे मजबूत है, लेकिन पर्यावरण के मोर्चे पर पीछे है।
प्रयागराज में यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था (735), मानव पूंजी (744), गुणवत्तापूर्ण जीवन (837), पर्यावरण (813) और मेरठ में क्रमश: 761, 742, 893 व 871 रहा।
नई एआई सिटी से बढ़ेगा बंगलूरू का रुतबा
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों में शहर की जनसंख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है, और 2000 से जीडीपी में औसतन करीब 10% सालाना वृद्धि दर्ज हुई है। प्रस्तावित नई एआई सिटी का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि शहर बीपीओ से आगे बढ़कर आरएंडडी और डीप टेक और एआई सेवाओं का केंद्र बनेगा।
दिल्ली 49 पायदान चढ़ेगी ऊपर : अगले 24 वर्षों में दिल्ली 49 पायदान ऊपर चढ़ जाएगी। अभी वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष-100 से बाहर रहने वाली दिल्ली (268वां स्थान) आने वाले दशकों में सबसे तेज जीडीपी विकास दर दिखाने वाले शहरों में शुमार हो जाएगी। वर्ष 2050 तक दिल्ली और मुंबई दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाला महानगर भी बन जाएंगे।
उत्तराखंड
देहरादून 632वां स्थान
देहरादून ने मानव पूंजी में 479 स्कोर किया। पहाड़ी राज्य पर्यावरण (614) और जीवन की गुणवत्ता (879) स्थान पर पिछड़ा हुआ है। हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की जैसे शहरों का सूची में न होना दर्शाता है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक राजधानी तक सीमित हैं। गुरुग्राम-फरीदाबाद को एनसीआर शहरों में गिना गया। इसलिए 1,000 शहरों की सूची में शामिल नहीं किया गया।
जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण और आय असमानता से पिछड़े
यद्यपि मानव पूंजी और आर्थिक विकास में भारतीय शहरों का प्रदर्शन अच्छा रहा है लेकिन जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और आय असमानता जैसे मापदंडों में कम स्कोर मिलने के कारण समग्र रैंकिंग में कोई भी शहर टॉप-100 या 250 में जगह नहीं बना पाता।
समग्र रैंकिंग में प्रमुख शहरों की स्थिति
| क्र. | शहर | समग्र रैंकिंग |
|---|---|---|
| 1 | दिल्ली | 268वां स्थान |
| 2 | बंगलूरू | 311वां स्थान |
| 3 | मुंबई | 330वां स्थान |
| 4 | चेन्नई | 381वां स्थान |
| 5 | हैदराबाद | 421वां स्थान |
| 6 | पुणे | 427वां स्थान |
| 7 | त्रिशूर | 477वां स्थान |
अर्थव्यवस्था 30% मानवपूंजी 25% जीवन की गुणवत्ता 25% पर्यावरण 10% गवर्नेंस 10%