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बिजली वितरण कंपनियों पर बकाया बढ़कर हुआ 50 फीसदी, राशि 88,177 करोड़ रुपये तक बढ़ी
Sun, 16 Feb 2020 09:55 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 16 Feb 2020 09:55 PM IST
सार
बिजली उत्पादकों का वितरण कंपनियों पर कुल बकाया दिसंबर, 2019 में इससे पिछले साल के इसी माह के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़कर 88,177 करोड़ रुपये पर पहुंचा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बिजली मंत्रालय के पोर्टल प्राप्ति (भुगतान पुष्टि और उत्पादकों के चालान में पारदर्शिता लाने के लिए बिजली खरीद विश्लेषण) के अनुसार वितरण कंपनियों के ऊपर बिजली उत्पादक कंपनियों का दिसंबर 2018 में बकाया 59,015 करोड़ रुपये था।
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पोर्टल की शुरूआत मई 2018 में हुई। इसका मकसद बिजली उत्पादकों ओर वितरण कंपनियों के बीच बिजली खरीद सौदों के मामले में पारदर्शिता लाना है। दिसंबर 2019 में पिछली बकाया राशि 78,174 करोड़ रुपये पर पहुंच गई जो एक साल पहले इसी महीने में 44,464 करोड़ रुपये पर थी। पिछला बकाया में वह राशि शामिल है जिसका भुगतान 60 दिन की मोहलत अवधि के बाद भी नहीं किया गया है।
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बिजली उत्पादक वितरण कंपनियों को विद्युत आपूर्ति के लिए बिलों के भुगतान को लेकर 60 दिन का समय देते हैं। उसके बाद बकाया राशि पिछला बकाया बना जाता है। उस पर उत्पादक कंपनियां ब्याज वसूलती हैं। बिजली उत्पादक कंपनियों को राहत देने के लिये केंद्र ने एक अगस्त 2019 से भुगतान सुरक्षा प्रणाली लागू की है।
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इस प्रणाली के तहत वितरण कंपनियों को बिजली आपूर्ति प्राप्त करने के लिये साख पत्रों की व्यवस्था करनी होती है। पोर्टल पर उपलब्ध ताजा आंकड़े के अनुसार दिसंबर, 2019 में में कुल बकाया राशि इससे पूर्व माह नवंबर के मुकाबले बढ़कर 82,414 रुपये पहुंच गई।
पिछले साल नवंबर में यह राशि 73,175 करोड़ रुपये थी। आंकड़ों के अनुसार राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु की वितरण कंपनियों पर सर्वाधिक बकाया है। कुल 78,174 करोड़ रुपये के पिछले बकाया में स्वतंत्र बिजली उत्पादकों की हिस्सेदारी 25.45 फीसदी है।
केंद्रीय लोक उपक्रमों में एनटीपीसी का वितरण कंपनियों पर 15,695 करोड़ रुपये बकाया है। उसके बाद एनएलसी इंडिया का स्थान है जिसका 5,010.69 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा एनएचपीसी का 3,165.65 करेाड़ रुपये, टीएचडीसी इंडिया का 2,136.30 करोड़ रुपये तथा दामोदर घाटी निगम का 822.09 करोड़ रुपये बकाया है।
निजी बिजली उत्पादकों में अडाणी पावर का वितरण कंपनियों पर सर्वाधिक 3,201.68 करोड़ रुपये बकाया है। उसके बाद क्रमश: बजाज समूह की ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी का 2,212.66 करोड़ रुपये तथा जीएमआर का 1,930.16 करोड़ रुपये बकाये थे। पोर्टल के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनियों का बकाया दिसंबर में 6,739.47 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।