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देश के 72 फीसदी किसानों को नहीं है पीएम फसल बीमा योजना की जानकारी

Mon, 20 Aug 2018 05:21 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 20 Aug 2018 05:21 PM IST
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only 28 percent farmers have knowledge of crop insurance scheme

किसान अभी भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के विवरणों से ठीक तरह से वाकिफ नहीं हैं, जबकि सरकार और बीमा कंपनियां कर्ज नहीं लेने वाले किसानों के बीच योजना को पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

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यह बात जलवायु जोखिम प्रबंधन कंपनी वेदर रिस्क मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूआरएमएस) ने कही। कंपनी ने कहा कि अधिकतर राज्यों में हालांकि योजना में दाखिल किसानों के बीच काफी अधिक संतोष का भाव देखा जा रहा है। इसका कारण है किसानों को सहयोग और बीमा कंपनियों की भागीदारी तथा भुगतान हासिल करने करने वाले बीमित किसानों के संदर्भ में योजना का सही कार्यान्वयन।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2016 में लांच की गई थी। यह आज कृषि का जलवायु और अन्य जोखिमों के विरुद्ध बीमा करने का एक प्रमुख उपकरण है। यह पुरानी कृषि बीमा योजना का परिष्कृत रूप है। इसके तहत कर्जधारक किसानों को तो सब्सिडी दर पर बीमा मिलता ही है, गैर-कर्जधारक किसानों को भी यह सुविधा मिलती है।
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डब्ल्यूआरएमएस ने कहा कि बीएएसआईएक्स द्वारा हाल में आठ राज्यों (उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, नगालैंड, बिहार और महाराष्ट्र) में किए गए सर्वेक्षण में यह पाया गया कि किसानों के तैयार किए गए नमूनों में से महज 28.7 फीसदी को ही पीएमएफबीवाई के बारे में जानकारी थी।

ये हैं कठिनाइयां

सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों के मुताबिक किसानों की शिकायत यह है कि गैर-कर्जधारक किसानों के लिए दाखिले की प्रक्रिया कठिन है। उन्हें स्थानीय राजस्व विभाग से बुवाई प्रमाणपत्र और भूमि रिकार्ड हासिल करना होता है, जिसमें काफी समय जाया होता है।

बैंक की शाखाएं और ग्राहक सेवा केंद्र हमें दाखिले के लिए तैयार भी नहीं होते हैं, क्योंकि वे किसी अन्य काम में व्यस्त होते हैं। साथ ही किसानों को यह भी नहीं बताया जाता है कि उन्हें दावा क्यों मिला या नहीं मिला और दावे की गणना किस आधार पर की जाती है।

बीमा खरीदने वाले अधिकतर किसान हैं कर्जधारक

only 28 percent farmers have knowledge of crop insurance scheme

सर्वेक्षण के मुताबिक 40.8 फीसदी किसानों ने औपचारिक स्रोतों से जानकारी जुटाई, जैसे कृषि विभाग, बीमा कंपनियां या ग्राहक सेवा केंद्र और शेष को जागरूकता फैलाने वाले खास चैनलों से जानकारी मिली। जिन्हें योजना की जानकारी थी, उनमें से महज 12.9 फीसदी किसान ही अपनी फसल का बीमा करा पाए।

उनमें से भी 77 फीसदी किसान कर्ज से लिंक्ड थे। 41.3 फीसदी किसानों ने जरूरी दस्तावेजों के अभाव को बीमा लेने के लिहाज से एक प्रमुख चुनौती बताया। अन्य चुनौतियों में थे खेत की छोटी जोत (21.4 फीसदी), सरकारी अधिकारी की ओर से सहयोग का अभाव (26 फीसदी) और ऑनलाइन प्रणाली की अक्षमता (17.3 फीसदी)।

दक्ष कर्मियों की है कमी

सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया कि जो किसान यहां उल्लिखित कारणों की वजह से अपनी फसल का बीमा नहीं कर पाए, उनमें बीमा हासिल करने की तीव्र ललक है। डब्ल्यूआरएमएस के प्रबंध निदेशक सोनू अग्रवाल ने एक बयान में कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में पीएमएफबीवाई का अच्छी तरह से कार्यान्वयन नहीं हो पाने का एक प्रमुख कारण है दक्ष कर्मियों को अभाव।

कार्यान्वयन के हर चरण में जागरूकता का अभाव है। गैर-कर्जधारक किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए डब्ल्यूआरएमएस ने सुझाव दिया कि सरल प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए, ताकि किसानों को योजना में आवेदन करने में, योजना के तहत कवर किए जाने वाले जोखिमों और अपने नुकसान के बारे में सूचना देने के तरीकों के बारे में विवरण हासिल करने में मदद मिल सके।

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