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ECR: विदेशों में बढ़ रहे हैं अकुशल भारतीय कामगार, 2021 के मुकाबले ढाई गुना बढ़े; केंद्र ने संसद में दी जानकारी

Mon, 25 Nov 2024 07:16 PM IST
द बोनस न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: द बोनस Updated Mon, 25 Nov 2024 07:16 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने बताया कि विदेश जाने वाले इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड यानी इसीआर पासपोर्ट धारक अकुशल यानी अनस्किल्ड भारतीय कामगारों की संख्या पिछले 3 साल में लगातार बढ़ी है। इन भारतीय कामगारों को इसीआर कैटेगरी वाले देशों में जाने की मंजूरी दी जाती है। इसीआर पासपोर्ट धारक आमतौर पर अकुशल यानी अनस्किल्ड और अर्धकुशल यानी सेमी स्किल्ड होते हैं। 

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Number of unskilled Indian workers abroad is increasing, increased by two and a half times compared to 2021
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI / Freepik

विस्तार

विदेश जाने वाले अकुशल भारतीय कामगारों की संख्या बढ़ रही है। मतलब विदेशों में ग्रोसरी स्टोर या पार्किंग स्पेस में काम करने वाले स्टाफ में भारतीय कामगारों की संख्या बढ़ रही है। सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी। सरकार के मुताबिक पिछले 3 साल में विदेश जाने वाले ऐसे कामगारों की संख्या में वृद्धि हुई है।
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सरकार ने बताया कि विदेश जाने वाले इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड यानी इसीआर पासपोर्ट धारक अकुशल यानी अनस्किल्ड भारतीय कामगारों की संख्या पिछले 3 साल में लगातार बढ़ी है। इन भारतीय कामगारों को इसीआर कैटेगरी वाले देशों में जाने की मंजूरी दी जाती है। इसीआर पासपोर्ट धारक आमतौर पर अकुशल यानी अनस्किल्ड और अर्धकुशल यानी सेमी स्किल्ड होते हैं। सरकार के आकड़ों के मुताबिक, जहां 2021 में ये संख्या 1.30 लाख से ज्यादा (1,32,675) थी, 2023 में ये ढाई गुना से ज्यादा बढ़कर करीब 4 लाख (3,98,317) हो गई।
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क्या होते हैं अकुशल कामगार?
अकुशल कामगार या श्रमिक वैसे लोग होते हैं जिन्हें किसी खास कौशल, शिक्षा या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती। अकुशल काम में मैन्युअल लेबर, बुनियादी प्रशासनिक कार्य या कोई नियमित कामकाज वगैरह शामिल होते हैं।
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अकुशल कामगारों को अमूमन एक बेसिक वेज यानी मेहनताना मिलता है। अकुशल कामों में किसी ग्रोसरी स्टोर के स्टाफ की नौकरी, फास्ट फूड चेन में काम, घर की साफ-सफाई, पार्किंग स्पेस में बतौर स्टाफ का काम आदि शामिल होते हैं।

सरकारी कौशल योजनाएं
सरकार ने संसद में ये भी बताया कि देश की आबादी में स्किल से जुड़ा जो अंतर है, उसे पाटने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of skill development and entrepreneurship) अलग-अलग योजनाओं के तहत कौशल विकास केंद्रों/कॉलेजों/संस्थानों के एक बड़े नेटवर्क के जरिए कौशल, पुनः कौशल और अप-स्किल ट्रेनिंग दे रहा है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जन शिक्षण संस्थान (JSS), नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोमोशन स्कीम (NAPS) और क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (CTS) जैसी योजनाओं के जरिए ये ट्रेनिंग दी जा रही है।


सरकार का लक्ष्य
सरकार भारत को एक ग्लोबल स्किल हब बनाना चाहती है। उसका लक्ष्य भारत को अलग-अलग वैश्विक क्षेत्रों के लिए एक विश्वसनीय और उच्च कौशल वाले वर्कफोर्स का स्रोत बनाना है।
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