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JP Morgan: 'अमेरिका भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों के साथ...', मंदी की आशंकाओं पर जेपी मॉर्गन के सीईओ का सुझाव
Tue, 08 Apr 2025 12:24 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 08 Apr 2025 12:24 PM IST
सार
जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था काफी उथल-पुथल का सामना कर रही है। इस पर कर सुधार और विनियमन के संभावित सकारात्मक पहलू व टैरिफ व व्यापार युद्ध के संभावित नकारात्मक पहलू का असर पड़ रहा है। डिमॉन ने भारत और ब्राजील जैसे देशों के बारे में क्या कहा है, आइए जानते हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
जेपी मॉर्गन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमॉन ने चेताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से हाल ही में घोषित टैरिफ उपायों से महंगाई बढ़ सकती है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है। शेयरधारकों को लिखे अपने सालाना पत्र में उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि अमेरिका को भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों के साथ घनिष्ठ व्यापारिक संबंध विकसित करने चाहिए, बजाय इसके कि वह इन देशों पर अपनी नीतियां थोपे।
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उन्होंने कहा, "हाल ही में लगाए गए टैरिफ से महंगाई बढ़ने की संभावना है और इससे कई लोग मंदी की आशंका जता रहे हैं।" जेपी मॉर्गन के सीईओ ने आगाह किया कि बाजार का मूल्यांकन अपेक्षाकृत उच्च बना हुआ है। उन्होंने सोमवार को कहा, "ये महत्वपूर्ण है और कुछ हद तक अभूतपूर्व ताकतें हमें बहुत सतर्क रहने के लिए मजबूर करती हैं।" डिमॉन ने कहा कि भले ही टैरिफ से मंदी न आए, लेकिन इससे विकास धीमा हो जाएगा।
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डिमॉन ने कहा, "अर्थव्यवस्था काफी उथल-पुथल का सामना कर रही है, जिसपर कर सुधार और विनियमन के संभावित सकारात्मक पहलू व टैरिफ और "व्यापार युद्ध" के संभावित नकारात्मक पहलू का असर पड़ रहा है। इसके अलावा मुद्रास्फीति, अधिक राजकोषीय घाटा, परिसंपत्तियों का उच्चतम मूल्य और बाजार की अस्थिरता भी अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही है।
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डिमॉन के अनुसार टैरिफ के कारा कुछ महत्वपूर्ण अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, "हाल फिलहाल में हमें महंगाई के परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसका असर न केवल आयातित वस्तुओं पर बल्कि घरेलू कीमतों पर भी पड़ेगा। इससे इनपुट लागत में वृद्धि होगी और घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ेगी।" उन्होंने कहा कि अमेरिका के अपने कुछ निकटतम सहयोगियों के साथ व्यापार समझौते नहीं हैं, और वाशिंगटन मित्रतापूर्ण हाथ बढ़ाकर भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों को करीब ला सकता है।
डिमॉन ने कहा, "प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ उच्च-मानकों के आधार पर व्यापार करने से अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। यह एक अच्छी जियो पॉलिटिक्स है। हमें भारत और ब्राजील जैसे कई गुटनिरपेक्ष देशों पर अपनी नीतियां थोपने की जरूरत नहीं है, लेकिन हम व्यापार और निवेश के जरिए मित्रतापूर्ण हाथ बढ़ाकर उन्हें अपने करीब ला सकते हैं।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर शुल्क बढ़ाकर 26% कर दिया है और ब्राजील से आयातित उत्पादों पर 10% टैरिफ लगा दिया है।
अरबपति निवेशक और पर्शिंग स्क्वायर के सीईओ बिल एकमैन ने भी चेतावनी दी है हम एक व्यापारिक साझेदार, व्यवसाय करने के स्थान और पूंजी निवेश के बाजार के रूप में अपने देश के प्रति विश्वास को खत्म करने की प्रक्रिया में हैं।" रिपब्लिकन पार्टी के कट्टर वफादार सीनेटर टेड क्रूज ने भी चेतावनी दी है। इससे रिपब्लिकन खेमे में भी विद्रोह की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा, "अगर हम मंदी में चले जाते हैं, खास तौर पर बुरी मंदी में, तो 2026 में राजनीतिक रूप से बहुत उथल-पुथल होगा।"
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अमेरिकी दिग्गजों की ओर से टैरिफ प्रकरण की आलोचना ऐसे दिन हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के एलान के बाद दुनियाभर के बाजार में भारी बिकवाली दिखी। टैरिफ की घोषणा के बाद से निवेशकों को खरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, इन बातों से बेफिक्र ट्रंप ने सोमवार को टैरिफ के बारे में बोलते हुए इसे एक 'दवा' बताया।
ट्रम्प ने सोमवार को चीन पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की। जिससे वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। इससे पहले, अमेरिकी टैरिफ के जवाब में बीजिंग ने भी 34% का जवाबी शुल्क लगाने का एलान किया। अब एक बार फिर ट्रंप के टैरिफ के एलान के बाद चीनी वस्तुओं पर कुल अमेरिकी टैरिफ प्रभावी रूप से 84% का हो गया है। अगर ट्रंप की ओर से पूर्व में चीन पर लगाए गए 20% टैरिफ की दर को भी जोड़ दें, तो अमेरिका में चीनी वस्तुओं पर लगाने वाले टैरिफ की कुल दर 104% हो जाएगी।
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